सुशील श्रीवास्तव गिरोह का शूटर मुकेश सिंह गिरफ्तार, हजारीबाग व रामगढ़ पुलिस ने मिलकर की कार्रवाई

Updated at : 06 Feb 2021 2:12 PM (IST)
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सुशील श्रीवास्तव गिरोह का शूटर मुकेश सिंह गिरफ्तार, हजारीबाग व रामगढ़ पुलिस ने मिलकर की कार्रवाई

सुशील श्रीवास्तव गिरोह का शूटर मुकेश सिंह गिरफ्तार

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jharkhand news, hazaribagh news in hindi हजारीबाग : गैंगस्टर सुशील श्रीवास्तव गिरोह के मुख्य शूटर मुकेश सिंह को हजारीबाग और रामगढ़ पुलिस ने संयुक्त छापामारी कर गिरफ्तार किया है. पुलिस मुकेश सिंह को गुप्त ठिकानों पर रख पूछताछ कर रही है. वह बिहार के गया का रहनेवाला बताया जाता है.

हजारीबाग एसपी कार्तिक एस और रामगढ़ एसपी प्रभात कुमार के निर्देश पर दोनों जिला के के पुलिस ने संयुक्त रूप से छापामारी कर यह सफलता पायी है. सूत्रों के अनुसार मुकेश पर हजारीबाग और रामगढ़ जिला में दो दर्जन से अधिक मामला दर्ज है.

हजारीबाग के बड़कागांव, गिद्दी, उरीमारी, केरेडारी, रामगढ़ के पतरातू, भुरकुंडा एवं पिपरवार में इसके विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज है. इस पर रंगदारी, लेवी, हत्या, गोलीकांड का मामला दर्ज है. वहीं कोयला कारोबारी, संवेदकों, ट्रांसपोर्टरों से श्रीवास्तव गिरोह के लिए लेवी वसूली का आरोप है.

2007 में यूपी के गौतम सिंह की हत्या के बाद सुर्खियों में आया था मुकेश

भुरकुंडा : हजारीबाग पुलिस के हत्थे चढ़ा मुकेश सिंह वर्तमान में अपराध की दुनिया का बड़ा नाम बना हुआ था. भुरकुंडा, सयाल, उरीमारी, गिद्दी, भदानीनगर, कुजू क्षेत्र में ठेकेदारों, ट्रांसपोर्टरों, रैक लोडरों से फोन कर रंगदारी वसूलना उसका मुख्य पेशा था. श्रीवास्तव गुट के लिए काम करने वाला मुकेश रिवर साइड भुरकुंडा का रहने वाला है.

स्थानीय गर्ल्स स्कूल के पास कभी वह सामान्य जिंदगी जीता था. करीब 25 वर्ष पहले उसका नाता अपराध की दुनिया से जुड़ा. इसके बाद वह एक के बाद एक अपराध करता रहा. पहली बार 2007 में रिवर साइड मयूर स्टेडियम में उत्तरप्रदेश के गौतम सिंह की हत्या में उसका नाम उभर कर आया था. इसके बाद वह अंडरग्राउंड हो गया. इस दौरान श्रीवास्तव गुट की छत्रछाया में रहते हुए वह लगातार आपराधिक घटनाओं को अंजाम देता रहा.

मिहिजाम में भोला पांडेय व गिद्दी के शिवनाथ महतो हत्याकांड में भी उसका नाम आया था. खलारी, कुजू, रामगढ़ में भी कई घटनाओं में वह शामिल रहा. इस क्षेत्र में क्राइम करने के बाद वह बिहार को अपना ठिकाना बना लेता था. इसके कारण पुलिस की गिरफ्त से वह हमेशा बचता रहा. हालांकि, रामगढ़ पुलिस कई बार उसकी टोह में बिहार स्थित उसके ठिकाने पर पहुंची,

लेकिन वह हाथ नहीं लगा. श्रीवास्तव गुट में अमरेंद्र तिवारी की हत्या के बाद गुट की पूरी बागडोर खुद ब खुद उसके हाथ आ गयी. इसके बाद उसने एक बार फिर से कोयलांचल क्षेत्र से रंगदारी वसूलने में पूरी ताकत लगा दी. उसकी सक्रियता पुलिस के लिए लगातार चुनौती बनती जा रही थी. इसके बाद रामगढ़ व हजारीबाग पुलिस ने एसआइटी का गठन कर उसे पकड़ लिया.

Posted By : Sameer Oraon

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