गुमला में इलाज के अभाव में कोरवा जनजाति की महिला की मौत, गरीबी और तंगहाली में जी रहा परिवार

Updated at : 07 Aug 2022 9:31 AM (IST)
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गुमला में इलाज के अभाव में कोरवा जनजाति की महिला की मौत, गरीबी और तंगहाली में जी रहा परिवार

गुमला से 75 किमी दूर डुमरी प्रखंड के कादोझरिया पाठ की आदिम कोरवा जनजाति महिला ललिता कोरवाइन (50) की इलाज के अभाव में मौत हो गयी. यह जनजाति विलुप्तप्राय है. ललिता की मौत से गुमला प्रशासन की लापरवाही सामने आया है.

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दुर्जय पासवान/प्रेम प्रकाश

Gumla News: गुमला से 75 किमी दूर डुमरी प्रखंड के कादोझरिया पाठ की आदिम कोरवा जनजाति महिला ललिता कोरवाइन (50) की इलाज के अभाव में मौत हो गयी. यह जनजाति विलुप्तप्राय है. ललिता की मौत से गुमला प्रशासन की लापरवाही सामने आया है. क्योंकि ललिता बीमार है. गरीबी के कारण इलाज कराने में असमर्थ है. प्रशासन के संज्ञान में यह मामला था. इसके बाद भी प्रशासन ने विलुप्त प्राय: कोरवा जनजाति महिला की इलाज की व्यवस्था नहीं किया.

श्रम मंत्री ने भी दिए थे निर्देश

आदिम कोरवा जनजाति की महिला की इलाज के अभाव में मौत हो गयी. जबकि, झारखंड राज्य के श्रम मंत्री सत्यानंद भोक्ता ने महिला के इलाज का निर्देश दिये थे. गरीबी व तंगहाली में जी रहा परिवार ललिता का इलाज नहीं करा पाया. जिस कारण ललिता ने घर पर ही दम तोड़ दी.

राशन कार्ड नहीं बना है

मृतका के पुत्र पुलकर कोरवा ने कहा कि हमलोग जंगल व पहाड़ में रहते हैं. इसलिए यहां सुविधा नहीं है. मेरा परिवार गरीबी में जी रहा है. सरकार की तरफ से बिरसा आवास नहीं मिला है और न ही राशन कार्ड बना है. जबकि राशन कार्ड के लिए कई बार आवेदन दिया. परंतु प्रशासन ने राशन कार्ड बनवाने की पहल नहीं की. हमलोग जंगल पर आश्रित हैं.

ललिता की मौत से उठे सवाल

कोरवा आदिम जनजाति है. सरकार की नजर में यह विलुप्त प्राय जनजाति है. इसलिए सरकार इस जनजाति के संरक्षण के लिए कई योजनाएं चला रही है. इसमें सबसे महत्वपूर्ण योजना में बिरसा आवास व डाकिया योजना है. परंतु दुर्भाग्य है. इन दोनों योजनाओं का लाभ इस परिवार को नहीं मिला. खुद परिवार के लोगों ने फोन पर बताया कि सरकार से हमें बिरसा आवास व राशन कार्ड का लाभ नहीं मिला है.

मृतका के पति ने कहा

मृतका के पति वीरेंद्र कोरवा ने बताया कि मेरी पत्नी रात्रि 11 बजे के आसपास खून की उल्टी करते-करते प्राण त्याग दी. मेरी पत्नी पिछले डेढ़ माह से बीमार चल रही थी. वह खांसी और बुखार से पीड़ित थी. पत्नी को अस्पताल ले जाने के लिए कोई व्यवस्था नहीं थी. इसलिए अस्पताल नहीं ले जा सका और उसकी जान चली गयी.

पंचायत के अधिकारी पर उठते सवाल

सरकार का सिस्टम राजधानी से लेकर शहर व शहर से लेकर गांव तक एक्टिव है. परंतु, ललिता कोरवा की मौत से कई सवाल खड़े हो गये. ललिता डेढ़ माह से बीमार है. पूरे गांव को पता है. परंतु, पंचायत स्तर पर काम करने वाले अधिकारी इस परिवार की समस्या से अनभिज्ञ रहे. जबकि, आदिम जनजाति के एक-एक परिवार का सर्वे रिपोर्ट कल्याण विभाग के पास होना चाहिए. क्या सुविधा मिल रही है. इसकी भी जानकारी होनी चाहिए. परंतु, जिला, प्रखंड व पंचायत के अधिकारी सिर्फ वाह-वाही लूटने में लगे हैं. प्रशासन को अब चाहिए कि कोई दूसरी ललिता की इलाज के अभाव में मौत न हो.

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