गुरुकुल में बढ़ने लगी है प्रशिक्षणार्थियों की संख्या

Published at :03 Nov 2016 7:44 AM (IST)
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गुरुकुल में बढ़ने लगी है प्रशिक्षणार्थियों की संख्या

गुमला : जिला प्रशासन गुमला और पैन आइआइटी एलुमनी रीच फोर इंडिया के संयुक्त प्रयास से जिस उद्देश्य से गुमला से पांच किमी दूर स्थित सिलम में कंस्ट्रक्शन गुरुकुल का शुभारंभ किया गया था, वह उद्देश्य गुरुकुल बखूबी पूरा कर रहा है. ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले युवक जो गांव-घर तक ही सीमित थे, आज […]

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गुमला : जिला प्रशासन गुमला और पैन आइआइटी एलुमनी रीच फोर इंडिया के संयुक्त प्रयास से जिस उद्देश्य से गुमला से पांच किमी दूर स्थित सिलम में कंस्ट्रक्शन गुरुकुल का शुभारंभ किया गया था, वह उद्देश्य गुरुकुल बखूबी पूरा कर रहा है.

ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले युवक जो गांव-घर तक ही सीमित थे, आज मुख्य धारा से जुड़ कर अपने और अपने घर-परिवार को सुखी व समृद्ध करने में लगे हैं. 24 नवंबर 2011 को गुरुकुल की शुरुआत की गयी थी. उस समय महज 30 प्रशिक्षणाथियों के लिए प्रशिक्षण, आवास व भोजन की सुविधा थी.

धीरे-धीरे यहां प्रशिक्षणार्थियों की संख्या बढ़ने लगी. यहां मैट्रिक तक के 18 से 32 वर्ष के युवकों को सेटरिंग, सरिया फीटर और मेशन का 45 दिनों का प्रशिक्षण दिया जाने लगा. प्रशिक्षण में निपुण होने के बाद सापुरजी पालोनजी कंपनी द्वारा प्रशिक्षणार्थियों को प्लेसमेंट की सुविधा मिली और बड़े-बड़े कंपनियों में गुमला जिला के युवक काम करने लगे. गांव-घर के युवक को अच्छा-खासा काम करते देख गांव के अन्य युवक भी प्रेरित हुए और गुरुकुल में नामांकन लेकर प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए पहुंचने लगे.

लेकिन गुरुकुल में आवास और भोजन की सीमित सुविधा होने के कारण कई प्रशिक्षणार्थियों को बैरंग लौटना पड़ रहा है. वर्तमान में गुरुकुल में 60-65 युवकों के लिए सुविधा है. अभी भी सीटें कम पड़ रही है. गुरुकुल के प्राचार्य दयाशंकर सिंह ने बताया कि एक बैच में 60-65 युवकों को ही प्रशिक्षण देने और रखने की सुविधा है. हर बैच में प्रशिक्षणार्थियों की संख्या बढ़ रही है. एक बैच को प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जो पांच दिसंबर तक चलेगा.

वहीं पांच दिसंबर से अगले सत्र के प्रशिक्षण के लिए अब तक 58 प्रशिक्षणार्थियों का नामांकन हो चुका है. नामांकन के लिए अभी और भी आ रहे हैं, लेकिन सुविधा सीमित होने के कारण लौटाना पड़ रहा है. गुरुकुल में अब तक लगभग 2000 युवकों को प्रशिक्षण दिया गया है, जो बड़ी-बड़ी कंपनियों में सेटरिंग, सरिया फीटर और मेशन का काम कर रहे हैं.

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