लीड ::6::: नहीं मिल रहे ठेकेदार

Updated at :05 Nov 2015 6:14 PM
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लीड ::6::: नहीं मिल रहे ठेकेदार 25 करोड़ की सड़कों के लिए : आरइओ ने निकाला था टेंडर: पांच से छह बार टेंडर निकालने के बाद भी ठेकेदार भाग नहीं लिएदुर्जय पासवान, गुमलाजिले में पीएमजीएसवाइ के तहत 12 सड़कों को बनाने के लिए ठेकेदार नहीं मिल रहे हैं. इन 12 सड़कों की लागत लगभग 25 […]

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लीड ::6::: नहीं मिल रहे ठेकेदार 25 करोड़ की सड़कों के लिए : आरइओ ने निकाला था टेंडर: पांच से छह बार टेंडर निकालने के बाद भी ठेकेदार भाग नहीं लिएदुर्जय पासवान, गुमलाजिले में पीएमजीएसवाइ के तहत 12 सड़कों को बनाने के लिए ठेकेदार नहीं मिल रहे हैं. इन 12 सड़कों की लागत लगभग 25 करोड़ रुपये है. जबिक आरइओ ने कई बार टेंडर निकाला है. लेकिन ठेकेदार टेंडर में भाग नहीं लिये. ठेकेदार क्यों टेंडर में भाग नहीं ले रहे हैं, इसका स्पष्ट कारण नहीं पता चल रहा है. ऐसे विभाग की मानें तो उग्रवादी भय से कोई ठेकेदार काम करने को तैयार नहीं है. ठेकेदार भी उग्रवादी दखल बताते हैं. जिन 12 सड़कों का काम रुका है़ यह सभी सड़कें घोर नक्सल गांवों में बननी है. गुमला में कई सड़कों काम पहले से उग्रवादी बंद कराये हुए हैं. इधर सड़क के लिए ठेकेदार नहीं मिलने से जिला प्रशासन से लेकर राज्य व केंद्र सरकार भी परेशान हैं. गृह मंत्रालय चाहती है कि ये सड़कें जल्द बने. इसके लिए गृह मंत्रालय के एडिशन सेकेट्री ने गुमला के डीसी व एसपी से वीडियो कांफ्रेंसिंग में बात कर सड़कों की स्थिति के बारे में जानकारी प्राप्त की. साथ ही सड़क कैसे बने, इसके लिए प्रोपोजल मांगा है.48 सड़कों का काम ठपआरइओ विभाग के 48 सड़कों का काम बंद हो गया है. इन 48 सड़कों की लागत लगभग 50 करोड़ रुपये है. ठेकेदारों ने काम को स्वत: बंद कर दिया है. काम क्यों बंद किया है, इसकी जानकारी विभाग को नहीं है. ऐसे कुछ अधिकारियों का कहना है कि उग्रवादी भय से काम बंद किया गया है. वहीं पुलिस विभाग का कहना है कि कोई उग्रवादी भय नहीं है. ठेकेदार जानबूझ कर काम बंद कर दिये हैं. 133 में मात्र 27 सड़क ही बनीएनपीसीसी द्वारा गुमला जिले में सबसे अधिक 133 सड़क बनायी जा रही है. इसमें मात्र 27 सड़क ही पूरा हुआ है. एनपीसीसी द्वारा 158.23 करोड़ रुपये की लागत से सड़क बनायी जा रही है. वहीं शेष 106 सड़कों पर काम शुरू भी नहीं हुई है. अगर कहीं शुरू हुई है तो वह पूरी नहीं हुई है. काम भी घटिया हुआ है. कई सड़क बनने के बाद उखड़ गया है. गुमला में एनपीसीसी के खिलाफ केस भी हुआ है. इसके बाद भी सड़क निर्माण में कोई सुधार नहीं हो रहा है. जिला प्रशासन भी एनपीसीसी के कार्यो से नाखुश है.इनके लिए ठेकेदार नहीं मिल रहेचैनपुर के बीपीडीपी रोड से कठोरिया कोना तक पांच किमी सड़क लागत 3.8 करोड़, चैनपुर प्रखंड के नवागाई से हर्राडीपा तक 7.4 किमी सड़क लागत 3.8 करोड़ रुपये़, मारासिल्ला डीपा से कुजाम तक 13.5 किमी सड़क लागत 3.50 करोड़ रुपये़, पालकोट प्रखंड के पंडरापानी गांव में 5.5 किमी सड़क की लागत 2.96 करोड़़, रोकेडेगा गांव से भउलाटोली तक 7 किमी सड़क की लागत 2. 96 करोड़ रुपये, बनईडेगा से फुलझर तक 10.3 किमी सड़क की लागत 2.39 लाख रुपये, घाघरा प्रखंड में मलगो से घोड़टांगर तक 8 किमी सड़क 1.85 करोड़ रुपये, पालकोट से बिलिंगबीरा गांव तक 6.35 किमी सड़क 1.51 करोड़ रुपये, बिशुनपुर प्रखंड के मारासिल्ला से ऊपरडीपा कुजाम तक 6.65 किमी सड़क की लागत 1.71 करोड़ रुपये है.एनपीसीसी द्वारा गुमला में ठीक ढंग से काम नहीं किया जा रहा है. कभी पुलिस विभाग से सुरक्षा नहीं मांगी गयी है. तीन दिन पहले कुछ सड़कों की जांच के लिए सुरक्षा मांगी गयी थी, तो हमने सुरक्षा दी. काम नहीं करनेवाले उग्रवादी का बहाना बना रहे हैं.भीमसेन टुटी, एसपी, गुमला

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