झारखंड के गुमला में हर दिन सड़क हादसे में जाती है 13 लोगों की जानें
Author : Prabhat Khabar Digital Desk Published by : Prabhat Khabar Updated At : 27 Sep 2020 4:55 PM
झारखंड के उग्रवाद प्रभावित जिला गुमला में हर महीने कम से कम 13 लोगों की सड़क हादसे में मौत हो जाती है. वर्ष 2020 के आठ महीने में 105 लोगों की जानें जा चुकी हैं. लॉकडाउन में घर से नहीं निकलना था, लेकिन काफी संख्या में लोगों ने इसका पालन नहीं किया. फलस्वरूप कई लोगों की सड़क हादसे में जान चली गयी. कई लोग घायल हो गये.
गुमला (दुर्जय पासवान) : झारखंड के उग्रवाद प्रभावित जिला गुमला में हर महीने कम से कम 13 लोगों की सड़क हादसे में मौत हो जाती है. वर्ष 2020 के आठ महीने में 105 लोगों की जानें जा चुकी हैं. लॉकडाउन में घर से नहीं निकलना था, लेकिन काफी संख्या में लोगों ने इसका पालन नहीं किया. फलस्वरूप कई लोगों की सड़क हादसे में जान चली गयी. कई लोग घायल हो गये.
कोरोना से बचने के लिए सरकार ने लॉकडाउन लगाया था. बावजूद इसके गुमला जिला में कई सड़क हादसे हुए. लॉकडाउन में हादसे से गुमला की सुनसान और काली सड़कें खून से लाल होती रही है. हर सप्ताह दो तीन ऐसी घटनाएं हुईं हैं. परिवहन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, वर्ष 2020 के जनवरी से अगस्त महीने तक 113 सड़क हादसे हुए हैं.
इसमें 105 लोगों की जान चली गयी और 51 घायल हुए हैं. घायलों के इलाज के बाद स्थिति सुधरी. इन 113 हादसों में लॉकडाउन अवधि में करीब 70 हादसे हुए हैं. इसमें भी काफी संख्या में लोगों की जानें गयी हैं. हालांकि वर्ष 2017, 2018 एवं 2019 की रिपोर्ट व आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2020 में सड़क हादसे कम हुए हैं.
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परिवहन विभाग व पुलिस के अनुसार, अधिकतर मामलों में देखा गया है कि लोग शराब का सेवन कर गाड़ी चला रहे थे, जिसकी वजह से सड़क दुर्घटना से लोगों की मौत हुई. दूसरा कारण यह है कि लोगों ने हेलमेट का प्रयोग नहीं किया, जिसकी वजह से सड़क हादसे में लोगों की जान गयी.
कई मामलों में तेज गति व लापरवाही से गाड़ी चलाने के कारण लोगों की सड़क हादसे में मौत हुई है. हालांकि, परिवहन विभाग के द्वारा सड़क हादसे रोकने के लिए सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है. विभाग द्वारा सड़क सुरक्षा सेल का गठन कर ब्रेथ एनालाइजर (शराब टेस्ट मशीन) द्वारा शराब पीकर गाड़ी चलाने वालों की जांच की जा रही है.
समय-समय पर पुलिस द्वारा चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है. इसके अलावा डेंजर जोन में साइन बोर्ड लगाकर लोगों को जागरूक किया जा रहा है. इसके बावजूद वाहन चालकों की लापरवाही से मौत हो रही है.
गुमला जिले में सबसे अधिक मोटर साइकिल दुर्घटनाएं हो रही हैं. 70 से 75 प्रतिशत हादसे बाइक से होती हैं. इसमें वैसे ही लोगों की जान जा रही है, जो हेलमेट नहीं पहन रहे हैं या तेज रफ्तार में चलते हैं. गुमला में कई ऐसे युवक हैं, जो करतब दिखाने के चक्कर में जान गंवा रहे हैं. कहना गलत नहीं होगा कि ये लोग जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं.
लगातार हादसे के बाद भी युवक नहीं सुधर रहे हैं. पुलिस शहर के एक छोर पर जांच करती है, तो युवक दूसरे छोर से निकलकर भाग जाते हैं. गाड़ी की रफ्तार दिखाना अब युवकों का शौक बनता जा रहा है, जो उनकी मौत का कारण बन रहा है. अगर युवा नहीं सुधरे, तो न दुर्घटनाएं रुकेंगी, न ही दुर्घटना से होने वाली मौतें.
कम उम्र के बच्चे बाइक चलाने से बाज नहीं आ रहे हैं. कम उम्र के बच्चों को किसी भी स्थिति में गाड़ी नहीं चलाना है, लेकिन गुमला में नियम कानून को ताक पर रखकर बच्चे भी तेज गति से बाइक व स्कूटी चला रहे हैं. परिवहन विभाग के आइटी मैनेजर गौतम कुमार कहते हैं कि अधिकतर सड़क हादसे शराब पीकर गाड़ी चलाने से हुई है. विभाग द्वारा लगातार अभियान चलाकर लोगों को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक किया जा रहा है. इस अभियान में लोगों की भागीदारी जरूरी है. इसके बाद ही सड़क हादसे में कमी आयेगी.
Posted By : Mithilesh Jha
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