गरीबी + अशिक्षा + योजना ठप + बेरोजगारी = पलायन

Updated at : 21 May 2019 2:15 AM (IST)
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गरीबी + अशिक्षा + योजना ठप + बेरोजगारी = पलायन

गुमला : गरीबी+अशिक्षा+अंधविश्वास + सरकारी योजना ठप + बेरोजगारी = पलायन. यह कहानी गुमला प्रखंड के करौंदा गांव की है. यह कोई अनजान गांव नहीं है. इसी करौंदा लिटाटोली गांव में छोटानागपुर के काला हीरा स्वर्गीय कार्तिक उरांव का जन्म हुआ था. लेकिन आज इस गांव की जो दुर्दशा है, जो सरकारी योजनाओं की पोल […]

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गुमला : गरीबी+अशिक्षा+अंधविश्वास + सरकारी योजना ठप + बेरोजगारी = पलायन. यह कहानी गुमला प्रखंड के करौंदा गांव की है. यह कोई अनजान गांव नहीं है. इसी करौंदा लिटाटोली गांव में छोटानागपुर के काला हीरा स्वर्गीय कार्तिक उरांव का जन्म हुआ था. लेकिन आज इस गांव की जो दुर्दशा है, जो सरकारी योजनाओं की पोल खोलने के लिए काफी है. कभी इस गांव में सरकारी बाबू पैदल घूमेंगे, तो उन्हें गरीबी व गांव की बदहाली का एहसास होगा.

किस प्रकार यहां के लोग बदलाव की उम्मीद में जी रहे हैं. गांव के विकास की तड़प यहां के लोगों के चेहरे पर साफ दिखायी देती है. इस गांव में 250 परिवार है. अगर प्रशासन की इच्छा शक्ति मजबूत होती, तो कब के इस गांव का कायाकल्प हो जाता. कारण, इस गांव ने देश को स्वर्गीय कार्तिक उरांव जैसे महान सपूत को जन्म दिया.
लेकिन इस गांव के विकास की ओर किसी का ध्यान नहीं है. गांव के लोग कहते हैं : सरकार को हम खोज रहे हैं. कहां सरकार है. क्या हमारे गांव की दुर्दशा सरकार को नजर नहीं आ रही है. हालांकि प्रभात खबर के गांव के दौरे के क्रम में गांव की महिलाओं में कुछ करने का जज्बा दिखा है. महिलाओं ने कहा है : कुछ करने की जिद है.
सरकारी बाबू मदद करें, तो हम पैरों पर खड़ा होकर बतायेंगे. गांव की महिलाओं ने समस्याएं भी गिनायी. कहा : डाड़ी कुआं का पानी पीते हैं. एक टोला में डीप बोरिंग है, जिसका पानी कुछ लोग पीते हैं. गांव में सात चापानल है, सभी खराब है. चापानल मरम्मत के लिए मुखिया को आवेदन दिये थे, लेकिन मरम्मत नहीं हुई.
गांव का आंगनबाड़ी केंद्र अधूरा है. सेविका पुनिया मिंज व सहायिका सुकरी देवी ने कहा कि भवन 20 वर्षों से अधूरा है. अधूरे भवन में हर रोज 30 बच्चों को पढ़ाते हैं. सिया टंगरा से भरदा स्कूल तक चार किमी सड़क पर बोल्डर निकला हुआ है. यह सड़क बन जाये, तो लोगों को आवागमन में सुविधा होगी. सिंचाई की सुविधा नहीं है. बरसात में ही सिर्फ खेती करते हैं. अन्य मौसम में खेत वीरान रहता है. गांव के आधा से अधिक परिवार के घर में शौचालय नहीं है, जिनके घरों में शौचालय बना है, तो वह घटिया है.
मशरूम उत्पादन व मुर्गीपालन करना चाहती हैं महिलाएं : गांव की समस्या को लेकर आंगनबाड़ी केंद्र में बैठक हुई. बैठक में मिशन बदलाव के भूषण भगत व जीतेश मिंज शामिल हुए. ठेठ नागपुरी कलाकार रामेश्वर मिंज, जो कि करौंदा गांव का निवासी हैं, वह भी बैठक में उपस्थित रहे. गांव की महिलाओं ने कहा कि हमें गांव में रोजगार चाहिए. मशरूम उत्पादन व मुर्गीपालन करने की इच्छा महिलाओं ने जाहिर की. महिलाओं ने बताया कि गांव के अधिकतर पुरुष व युवक-युवती पलायन कर गये हैं. महिलाएं गांव में रहती हैं. कई परिवार पैसा कमाने के लिए हड़िया व शराब बेचती है.
अगर कोई अच्छा काम मिलेगा, तो हड़िया व शराब बेचना छोड़ देंगे. भूषण व जीतेश ने कहा कि गांव की समस्याओं से डीसी को अवगत करायेंगे. साथ ही स्वरोजगार के लिए गांव की महिलाओं को प्रशिक्षण देने की मांग प्रशासन से की जायेगी. बैठक में ललिता देवी, जीवन कच्छप, उरांव, शांति देवी, बसंती देवी, जिकनी देवी, सीतामुनी देवी, बुधमनी उरांव, अनमू उरांव, सुखमनिया देवी, दुगिया देवी, सीता देवी, काले देवी, सुमित्रा देवी, एतवारी देवी, कमला देवी, सुकरी देवी, तुनिया मिंज व ज्योति कुमारी सहित कई लोग थे.
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