बंजर भूमि पर लायी हरियाली

Updated at : 06 Feb 2017 1:39 AM (IST)
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बंजर भूमि पर लायी हरियाली

प्रेरणा. मेहनत के बल पर पोड़ैयाहाट के आदिवासियों ने बदली अपनी तकदीर मेहनत के बल पर सुंदरपहाड़ी के किसानों ने खुद अपनी तकदीर बनायी है. जहां पहाड़ों पर जंगल-झाड़ियां उगी रहती थी आज वहां फसल लहलहा रही है. इससे ना केवल उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार है बल्कि उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा है. गोड्डा : […]

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प्रेरणा. मेहनत के बल पर पोड़ैयाहाट के आदिवासियों ने बदली अपनी तकदीर

मेहनत के बल पर सुंदरपहाड़ी के किसानों ने खुद अपनी तकदीर बनायी है. जहां पहाड़ों पर जंगल-झाड़ियां उगी रहती थी आज वहां फसल लहलहा रही है. इससे ना केवल उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार है बल्कि उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा है.
गोड्डा : कुछ कर गुजरने का जज्बा यदि हो तो कोई भी काम असंभव नहीं है. परिश्रम और जुनून के बल पर पहाड़ व बंजर भूमि पर भी फसल उपजाया जा सकता है. इसी बात को चरितार्थ किया है पोड़ैयाट के पूर्वी क्षेत्र व सुंदरपहाड़ी से सटे सियारकटिया गांव के संताल आदिवासियों ने. इस गांव के किसानों ने अपने बारी में सब्जी तथा तेलहन, दलहन की खेती कर अपने परिवार को बेहतर तरीके से पाल रहे हैं. करीब 500 की आबादी वाले सियारकटिया गांव के लोगों को भले ही कुएं का पानी पीना पड़ रहा है मगर उस कुएं से सालों भर के खाने का अनाज जरूर मिल जा रहा है.
सिंचाई के लिए गांव में पांच कुएं
लाल मिर्च, टमाटर, सरसो तथा बैंगन की फसल उगा कर परिवार को बेहतर तरीके से पाल रहे दर्जनों परिवार
क्या है गांव की भौगोलिक स्थिति
सुदूर पहाड़ी इलाका तथा लाल बलुआयी मिट्टी, बंजर कहलाने वाली जमीन की प्रकृति ही यहां के आदिवासीयों ने बदल दी है. जमीन के प्रकृति के साथ लोगों की तकदीर भी बदल गयी है. जिस जमीन पर लोग कभी मडुआ व कुरथी जैसे अनाज लगाकर सालोंभर फांकाकसी की जिंदगी जीते थे आज उस जमीन में मिर्ची, टमाटर, बैंगन, लहसुन के साथ सरसों के पौधे लहलहा रहे हैं. गांव के दर्जनों परिवार को वरदान के रूप में करीब 25 वर्ष बना कुआं है. ग्राम प्रधान मंगल टूडू ने बताया कि 25 वर्ष पहले 50 से साठ हजार रुपये की लागत से बना 15 फीट घन मीटर के पांच कुआं आज पेयजल के साथ सिंचाई की सुविधा दे रहा है.
मंगल टूडू के खेत में मिर्ची व बैंगन लगा है. सरसों की भी अच्छी फसल से मंगल गदगद है. वहीं गांव के जिसु हेंब्रम, राम सोरेन, शिवचरण हेंब्रम ने बताया कि पहले उनके घरों में अनाज कुछ ही माह रह पाता था. मगर आज सालोंभर खाने की पूरी व्यवस्था के साथ तेल-मसाला के साथ घरेलु उपयोग की सामग्री व बच्चों की पढ़ाई भी हो जा रही है. अपने खेत में लगे हरी मिर्च को पूरी तरह से लाल मिर्ची बनाकर बाजार में बेचते हैं ताकि ज्यादा रुपया कमा सके.
किसानों के कुआं बना वरदान
कुएं के पानी से बुझती है प्यास, सभी चापानल महीनों से खराब
पांच सौ की अाबादी गांव की है. गांव के सभी 10 चापानल खराब है. इस कारण लोगों की कुएं के पानी से प्यास बुझानी पड़ रही है. कुएं में सालों भर करीब पांच फीट पानी रहता है.
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