ओपीसी गेट पर बैठक कर ठेका मजदूरों ने कहा

Published at :11 Jan 2017 2:22 AM (IST)
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ओपीसी गेट पर बैठक कर ठेका मजदूरों ने कहा

प्रबंधन से सात सूत्री मांग पर अड़े हैं ठेका मजदूर खनन कार्य में सुरक्षा की मांग रहे पूरी गारंटी ओपीसी गेट के सामने बैठक करते ठेका मजदूर. इंटक को खदान दुर्घटना के बाद बैठक में बुलाया जाना दुर्भाग्यपूर्ण :सांसद प्रतिनिधि गोड्डा : इसीएल में हुए खान दुर्घटना को लेकर सांसद निशिकांत दुबे गंभीर थे. उन्होंने […]

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प्रबंधन से सात सूत्री मांग पर अड़े हैं ठेका मजदूर

खनन कार्य में सुरक्षा की मांग रहे पूरी गारंटी
ओपीसी गेट के सामने बैठक करते ठेका मजदूर.
इंटक को खदान दुर्घटना के बाद बैठक में बुलाया जाना दुर्भाग्यपूर्ण :सांसद प्रतिनिधि
गोड्डा : इसीएल में हुए खान दुर्घटना को लेकर सांसद निशिकांत दुबे गंभीर थे. उन्होंने पल-पल की रिपोर्ट कोयला मंत्रालय को दी. सांसद प्रतिनिधि नरेंद्र चौबे ने कहा कि अफसोस की बात यह है कि इसीएल अब तक हो चुके दुर्घटना पर न तो गंभीर है और न ही सकारात्मक है. इंटक यूनियन के किसी भी गुट को किसी भी स्तर पर प्रतिनिधित्व के लिए नहीं बुलाये जाने का अल्टीमेटम कोयला मंत्रालय के द्वारा पूर्व में ही इसीएल को दिया गया है और कोर्ट ने भी इस मामले में साफ-सुथरा निर्देश दिया है
तो किसके दबाब में इंटक के प्रतिनिधियों को बैठक में बात करने के लिए बुलाया गया. बताया कि इंटक यूनियन का विवाद एनटीपीसी के आंतरिक विवाद दिल्ली उच्च न्यायालय मे लंबित है तो न तो सिर्फ इंटक के प्रतिनिधियों को वार्ता के लिए आमंत्रित कर केंद्र सरकार के श्रम मंत्रालय के आदेश को इसीएल ने ठेंगा दिखाने का काम किया है बल्कि हाइकोर्ट के अवमाननना भी राजमहल परियोजना के महाप्रबंधक संजय सिंह ने उत्पादन, विषय व डिस्पैच आदि विषयों पर वार्ता के लिए इंटक के नेताओ को आमंत्रित कर किया है. बताया कि इससे प्रतीत होता है कि राजमहल परियोजना के महाप्रबंधक को न तो कानून का भय है और न ही सरकार का. बताया कि राजमहल परियोजना में घटी घटना इसी का परिणाम है. बताया कि सांसद निशिकांत दुबे के पहल पर हाईपावर कमेटी इस मामले की जांच करने जायेगी. जिसमें दूध का दूध और पानी का पानी हो जायेगा. इस कमेटी में सांसद निशिकांत दुबे को भी रखा गया है.
इसीएल अब तक हो चुके दुर्घटना पर न तो गंभीर है और न ही सकारात्मक
इंटक के प्रतिनिधियों को बैठक में बुलाये जाने पर सवाल खड़े किये
केंद्र सरकार के श्रम मंत्रालय के आदेश को इसीएल ने किया नजरअंदाज
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