झारखंड में नहीं रहना चाहती रूंझी गांव की बिटिया

Published at :03 Nov 2015 6:47 AM (IST)
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झारखंड में नहीं रहना चाहती रूंझी गांव की बिटिया

गोड्डा : बेबी कुमारी को दिल्ली पसंद है. वह झारखंड में रहना नहीं चाहती है. जबकि गोड्डा जिला के ठाकुरगंगटी प्रखंड क्षेत्र के रूंझी गांव में बेबी का पुश्तैनी घर है. बेबी ने बताया कि वे गांव में रहना नहीं चाहती है. उसे दिल्ली पसंद है. पिता सीताराम साह व मां अरुणा देवी दिल्ली से […]

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गोड्डा : बेबी कुमारी को दिल्ली पसंद है. वह झारखंड में रहना नहीं चाहती है. जबकि गोड्डा जिला के ठाकुरगंगटी प्रखंड क्षेत्र के रूंझी गांव में बेबी का पुश्तैनी घर है. बेबी ने बताया कि वे गांव में रहना नहीं चाहती है. उसे दिल्ली पसंद है. पिता सीताराम साह व मां अरुणा देवी दिल्ली से लगे नोएडा सेक्टर नौ में रहते हैं. बेबी की उम्र लगभग 14 से 15 वर्ष है.

बेबी लगातार दिल्ली जाने की रट लगा रही है. चाइल्ड वेलफेयर समिति के जिम्मे बेबी कुमारी की देखभाल है. बेबी के जिद से विभाग उहापोह की स्थिति में है.

भागलपुर समिति ने बेबी को गोड्डा समिति को किया है सुपुर्द : जानकारी के अनुसार बेबी को भागलपुर चाइल्ड वेलफेयर समिति द्वारा गोड्डा चाइल्ड वेलफेयर समिति को 27 अक्तूबर को सुपुर्द किया गया है. उससे पहले दिल्ली की निर्मल संस्था की ओर से बच्ची को भागलपुर के चाइलड वेलफेयर समिति के पास भेजा गया था.
गोड्डा में समिति सदस्यों ने बेबी की अच्छी तरीके से काउंसलिंग करने के बाद पता लगाया गया कि बेबी ठाकुरगंगटी के रूंझी गांव की रहने वाली है. लेकिन उसके माता-पिता दिल्ली में रहते हैं.
समिति ने रिश्तेदारों के यहां बेबी को रखने का किया प्रयास : चाइल्ड ऑफिसर रितेश कुमार ने बताया कि रूंझी गांव में बेबी के बड़े पापा, चाचा आदि रिश्तेदार के पास बेबी को रखने का प्रयास किया गया. लेकिन रिश्तेदारों ने उसे दिल्ली जाने की जिद पर समिति को ही बेबी को सौंपा दिया है.
समझा कर थक गये पदाधिकारी, आश्रम संचालिका व समिति सदस्य : सोमवार को बेबी दिल्ली जाने की जिद पर कोहराम मचाने लगी. इस पर आइसीडीएस ऑफिसर एस पांडेय, आश्रम संचालिका वंदना दुबे, समिति सदस्य प्रदीप कुमार व रितेश कुमार ने उसे काफी समझाने का प्रयास किया. सभी समझा-समझा कर थक गये. लेकिन बेबी नहीं मानी. वह एक ही रट लगायी बैठी है कि उसे दिल्ली जाना है.
चार दिन के बाद दिल्ली भेजे जाने के आश्वासन पर मानी बेबी : जब बेबी नहीं मानी तो पदाधिकारी व समिति सदस्यों ने चार दिन बाद उसे दिल्ली भेजने का आश्वासन दिया. तब जाकर बेबी शांत हुई. समिति द्वारा फिलहाल बेबी को वंदना की देखरेख में आश्रम में रखा गया है.
आखिर निर्मल संस्था ने क्यों नहीं भेजा बच्ची को नोएडा : बच्ची के अनुसार उसके माता-पिता दिल्ली से लगे नोएडा के सेक्टर नौ में रहते हैं. ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर निर्मल संस्था की ओर से बच्ची को क्यों दिल्ली से भागलपुर भेज दिया गया. जबकि बच्ची अपने माता-पिता का पता नोएडा बता रही है. आखिर क्यों उसे रिश्तेदारों के यहां भेजा गया. और रिश्तेदारों ने भी क्यों बच्ची से मुंह मोड़ लिया. कहीं ऐसा तो नहीं कि बच्ची गुम हो गयी हो. एेसे कई सवालों के जवाब चाइल्ड संस्था को ढूंढना चाहिए.
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