संसाधन हैं, पर शिक्षक नहीं, 86 छात्रों को सता रही भविष्य की चिंता

Published at :27 May 2024 11:14 PM (IST)
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संसाधन हैं, पर शिक्षक नहीं, 86 छात्रों को सता रही भविष्य की चिंता

आधारभूत संरचना व संसाधन ही शिक्षण संस्थान नहीं हैं. गुणवत्तापूर्ण शिक्षण कार्य के लिए जहां शिक्षकों की जरूरत होती है, वहीं वातावरण निर्माण में शिक्षकेतर कर्मियों की भी अच्छी भूमिका होती है.

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सवाल. उच्च शिक्षा के लिए बाहर जाने में लाचार छात्रों के बीच उम्मीद की किरण था संस्थान

मॉडल डिग्री कॉलेज बिरनी :

नामांकन करवाने के बाद अब छात्र पछता रहे

बिरनी.

आधारभूत संरचना व संसाधन ही शिक्षण संस्थान नहीं हैं. गुणवत्तापूर्ण शिक्षण कार्य के लिए जहां शिक्षकों की जरूरत होती है, वहीं वातावरण निर्माण में शिक्षकेतर कर्मियों की भी अच्छी भूमिका होती है. बिरनी प्रखंड मुख्यालय से सटे मॉडल डिग्री कॉलेज का हाल भी यही है. सात वर्ष पूर्व बने इस संस्थान में नामांकित 86 विद्यार्थियों को अपने भविष्य की चिंता सता रही है.

घर में रहकर उच्च शिक्षा ग्रहण करने का दावा हुआ खोखला :

उच्च शिक्षा के लिए बाहर जाने से वंचित छात्रों के लिए जो संस्थान उम्मीद की किरण लेकर आया था, आज वही उन्हें कई अंदेशों से भर रहा है. उच्च शिक्षा के नाम पर यहां खानापूरी हो रही है. छात्र इस बात से ज्यादा चिंतित हैं कि इस संकट की ओर सरकार का ध्यान नहीं है. नतीजतन घर में रहकर उच्च शिक्षा हासिल करने का सपना अब सताने लगा है.

दस साल पूर्व रखी गयी थी नींव :

विदित हो कि वर्ष 2014 में साढ़े तीन करोड़ रु की लागत से बगोदर विधायक विनोद सिंह, कोडरमा के पूर्व सांसद रवींद्र राय के हाथों कॉलेज भवन का शिलान्यास किया गया था. इस दौरान सांसद, विधायक ने दावा किया था कि क्षेत्र के गरीब, किसान, मजदूरों के बच्चे भी गांव में रहकर उच्च शिक्षा हासिल कर सकेंगे. उच्च शिक्षा के इच्छुक बच्चों को भटकना नहीं पड़ेगा.

माननीयों की पहल से नामांकन की प्रक्रिया हुई थी शुरू

कॉलेज भवन बनने के बाद लगभग सात वर्षों तक भवन बनकर खड़ा रहा. अखबारों में लगातार खबर प्रकाशित होने के बाद स्थानीय विधायक विनोद सिंह व सांसद अन्नपूर्णा देवी ने मामले को संज्ञान में लेकर कुलपति से मुलाकात की. जैसे-तैसे बीसीए को लेकर विश्वविद्यालय के कुलपति से डिग्री कॉलेज का पोर्टल चालू कराते हुए 10 बच्चों का एडमिशन भी हुआ. कॉलेज में न फर्निचर की व्यवस्था थी और ना ही शिक्षक और न ही संसाधन की. इस कारण नामंकित बच्चे खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं.

संसाधन विहीनता की खबर छपने के बाद सदन में उठी आवाज :

नामांकन के बावजूद संसाधनहीनता के कारण पढ़ाई बाधित होने की खबर अखबार में प्रमुखता से प्रकाशित हुई. विधायक विनोद सिंह ने पुनः मामले को गंभीरता से लेते हुए विधानसभा में मामले को जोरदार तरीके से उठाया, तो साढ़े तीन करोड़ की लागत से डिग्री कॉलेज में सभी तरह की व्यवस्था करते हुए कॉलेज को दुरुस्त किया गया. सारी व्यवस्था रहने के बावजूद शिक्षक की बहाली नहीं हो पायी.

युवा वर्ग है चिंतित :

आइसा के राष्ट्रीय परिषद सदस्य रंजीत बैठा ने कहा कि मॉडल डिग्री कॉलेज जिस उद्देश्य से बना, सरकार को उसे पूरा करना चाहिए. अविलंब शिक्षकों की बहाली की जाए और प्रचार-प्रसार किया जाए ताकि अधिकाधिक नामांकन हो सके. छात्र मन्नू कुमार वर्मा ने कहा कि कॉलेज बनकर तैयार है, पर शिक्षक नहीं होने के कारण छात्र दर-दर ठोकर खा रहे हैं. राज्य सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए.

जून तक शिक्षकों की बहाली संभव : प्राचार्य

मॉडल डिग्री कॉलेज के प्रभारी प्राचार्य कन्हैया राय ने कहा कि कॉलेज में लगभग सारी व्यवस्था दुरुस्त हो गयी है, पर शिक्षक नहीं है. शिक्षक के नहीं रहने से शिक्षण प्रभावित हो रहा है. पुनः नामांकन सत्र चालू होने वाला है. उम्मीद है कि जून तक शिक्षकों की बहाली सरकार की ओर से हो जायेगी.

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