प्राइवेट स्कूलों में मनमाने शुल्क पर नहीं लग पा रही रोक

Updated at : 03 Apr 2019 4:22 AM (IST)
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प्राइवेट स्कूलों में मनमाने शुल्क पर नहीं लग पा रही रोक

शुल्क नियंत्रण को ले राज्य में सात जनवरी से नया अधिनियम लागू गिरिडीह में इसका पालन नहीं होने से परेशान हैं अभिभावक गिरिडीह : जिले के प्राइवेट स्कूलों में शुल्क बढ़ोतरी के नाम पर मनमानी जारी है. झारखंड शिक्षा न्यायाधीकरण अधिनियम के लागू होने के बाद भी मनमाना शुल्क वसूली पर लगाम नहीं लग रही […]

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शुल्क नियंत्रण को ले राज्य में सात जनवरी से नया अधिनियम लागू

गिरिडीह में इसका पालन नहीं होने से परेशान हैं अभिभावक

गिरिडीह : जिले के प्राइवेट स्कूलों में शुल्क बढ़ोतरी के नाम पर मनमानी जारी है. झारखंड शिक्षा न्यायाधीकरण अधिनियम के लागू होने के बाद भी मनमाना शुल्क वसूली पर लगाम नहीं लग रही है. शुल्क वसूली के लिए झारखंड शिक्षा न्यायाधीकरण अधिनियम 2017 के नाम से बनाये गये कानून की अधिसूचना जारी होने के बाद राज्य सरकार ने इसे सात जनवरी 2019 को राज्य भर में लागू कर दिया है, पर गिरिडीह जिले में न ही शिक्षा विभाग और न ही जिला प्रशासन ने इस अधिनियम के अनुपालन के लिए कोई कदम उठाया है. स्थिति यह है कि जिले के प्राइवेट स्कूलों के संचालक शुल्क वसूली में मनमानी कर रहे हैं.

यह आरोप है कि झारखंड अभिभावक संघ की गिरिडीह जिला इकाई का. संघ का कहना है कि एलकेजी से लेकर आठवीं कक्षा तक की रिजल्ट जारी होने के बाद अगले कक्षा के लिए छात्र-छात्राओं को प्रोन्नत कर दिया गया है और नये सत्र के लिए नामांकन लिया जा रहा है. कई स्कूलों में 10 15 प्रतिशत शुल्क में बढ़ोतरी की गयी है.

इधर, इस संबंध में स्कूल संचालकों का तर्क है कि निर्धारित प्रावधानों के अनुसार ही शिक्षण शुल्क में बढ़ोतरी की गयी है. वहीं अभिभावकों का कहना है कि नये सत्र में प्रोन्नति और दाखिला के समय में शुल्क नियंत्रण को लेकर हो-हंगामा होता है, लेकिन संबंधित अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे रहते हैं.

अधिकारियों की ओर से दावा किया जाता है कि प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर रोक लगेगी, लेकिन गिरिडीह जिले में शुल्क बढ़ोतरी पर रोक लगाने के लिए अब तक कोई कदम नहीं उठाया गया है. इस वर्ष भी अधिकांश स्कूलों में फीस वसूली की प्रक्रिया लगभग पूरी होने के कगार पर है और प्रशासन ने अब तक शुल्क वृद्धि पर अंकुश लगाने के लिए कोई पहल नहीं की है.

क्या है शुल्क नियंत्रण अधिनियम

: प्राइवेट स्कूलों द्वारा शिक्षण शुल्क में मनमानी को देखते हुए झारखंड शिक्षा न्यायाधीकरण (संशोधित) अधिनियम 2017 के नाम से कानून बनाया गया. इस अधिनियम को विधि विभाग ने 26 अक्तूबर 2018 को अधिसूचित कर दिया एवं झारखंड सरकार द्वारा गजट में भी सात जनवरी 2019 को प्रकाशित कर दिया गया अर्थात राज्य भर में सात जनवरी 2019 से यह अधिनियम लागू कर दिया गया. इस अधिनियम में शुल्क नियंत्रण के लिए प्रावधान निर्धारित किये गये हैं. अधिनियम की कंडिका 7 के अनुसार प्रत्येक विद्यालय को एक फीस समिति का गठन करना है. यह समिति शुल्क निर्धारण की प्रक्रिया शुरू करेगी. इसी कंडिका के अनुसार जिला स्तर पर भी एक जिला फीस समिति का गठन किये जाने का प्रावधान है. स्कूल शुल्क निर्धारण समिति द्वारा प्रस्तावित शुल्क की संपुष्टि जिला फीस समिति द्वारा किये जाने के बाद ही शुल्क लागू किये जाने का प्रावधान है.

अब तक नहीं बनी है फीस समिति : झारखंड शिक्षा न्यायाधीकरण अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार अब तक जिला स्तर पर जिला फीस समिति का गठन नहीं किया गया है और न ही शुल्क नियंत्रण के लिए विभागीय या प्रशासनिक स्तर पर अब तक कोई कदम उठाये गये हैं. प्राइवेट स्कूलों का कहना है कि इस संबंध में अब तक उन्हें किसी भी तरह का दिशा निर्देश प्राप्त नहीं हुआ है. वहीं अभिभावकों का कहना है कि इस वर्ष भी अधिनियम को लागू करने के मामले में अधिकारी टाल-मटोल कर रहे हैं.

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