गंभीर बच्ची को लेकर डेढ़ घंटे भटकते रहे परिजन

Updated at :26 Aug 2017 12:30 PM
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गंभीर बच्ची को लेकर डेढ़ घंटे भटकते रहे परिजन

प्रसूता को ले 12 बजे रात जाना पड़ा प्राइवेट अस्पताल 208 बेड का अस्पताल बना 108 बेड का गिरिडीह सदर अस्पताल कभी 208 बेड का अस्पताल हुआ करता था. जिले भर के मरीज यहां पहुंचते थे. यहां मरीजों की अच्छी-खासी भीड़ हुआ करती थी. इसे देखते हुए तत्कालीन बिहार सरकार ने 208 बेड का अस्पताल […]

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प्रसूता को ले 12 बजे रात जाना पड़ा प्राइवेट अस्पताल

208 बेड का अस्पताल बना 108 बेड का

गिरिडीह सदर अस्पताल कभी 208 बेड का अस्पताल हुआ करता था. जिले भर के मरीज यहां पहुंचते थे. यहां मरीजों की अच्छी-खासी भीड़ हुआ करती थी.

इसे देखते हुए तत्कालीन बिहार सरकार ने 208 बेड का अस्पताल यहां बनाया था, लेकिन जैसे-जैसे जिले की आबादी बढ़ती वैसे-वैसे अस्पताल में बेडों की संख्या घटती गयी. अस्पताल के वार्ड को कार्यालय में परिणत किया जाता रहा. आज सदर अस्पताल मात्र 108 बेड का अस्पताल बनकर रह गया है, इससे मरीजों को बेड भी नहीं मिल पा रहा है. पहले से बेड पर मौजूद मरीज को जबतक वहां से छुट्टी नहीं दे दी जाती है,तबतक दूसरे मरीज को इंतजार करना पड़ता है.

क्या कहते हैं अस्पताल उपाधीक्षक

अस्पताल उपाधीक्षक डाॅ बीएन झा ने कहा कि एक महिला चिकित्सक के छुट्टी पर चले जाने से अस्पताल में महिला मरीजों को थोड़ी परेशानी हो रही है. पचंबा से एक महिला चिकित्सक को बुलाया जा रहा है. इन दिनों गर्भवती महिला मरीजों की संख्या काफी बढ़ गयी है. किसी भी मरीज को परेशानी नहीं होने दी जाएगी. अगर ऐसा होता है तो सूचना दें.

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