मेरौनी : जनगणना त्रुटि के मामले की जांच की गयी
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :18 May 2017 8:23 AM (IST)
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गढ़वा : केतार प्रखंड के मेरौनी गांव में वर्ष 2001 में हुए जनगणना गड़बड़ी से संबंधित मामले की जिला सांख्यिकी पदाधिकारी सह जिला जनसंपर्क पदाधिकारी अनिल कुमार ने जांच की़ मेरौनी गांव निवासी कस्तूरी तिवारी ने सूचना के अधिकार कानून के तहत प्रधानमंत्री कार्यालय से इस संबंध में जानकारी मांगी थी़ इसके पश्चात उन्होंने इसकी […]
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गढ़वा : केतार प्रखंड के मेरौनी गांव में वर्ष 2001 में हुए जनगणना गड़बड़ी से संबंधित मामले की जिला सांख्यिकी पदाधिकारी सह जिला जनसंपर्क पदाधिकारी अनिल कुमार ने जांच की़ मेरौनी गांव निवासी कस्तूरी तिवारी ने सूचना के अधिकार कानून के तहत प्रधानमंत्री कार्यालय से इस संबंध में जानकारी मांगी थी़
इसके पश्चात उन्होंने इसकी शिकायत की थी़ इसमें उन्होंने कहा था कि मेरौनी छेरहट गांव की आबादी वर्ष 1991 में 1435 दिखायी गयी थी़ जबकि वर्ष 2001 की जनगणना में इसकी जनसंख्या मात्र 1440 दिखायी गयी़ 10 साल के भीतर मात्र पांच जनसंख्या की वृद्धि को देखकर ग्रामीण हैरान थे़
श्री तिवारी ने राज्य जनगणना आयोग के साथ पीएमओ को भी इस संबंध में दावा किया था कि 10 साल में मात्र पांच जनसंख्या की वृद्धि कहीं से भी तार्किक नहीं है़ जबकि इस बीच गांव से न तो बड़े पैमाने पर पलायन हुआ है और न ही कोई महामारी़ इतना ही नहीं, वर्ष 2011 की जनगणना में मेरौनी छेरहट को 2100 से अधिक आबादी दिखा दी गयी है़ यह भी पूरी तरह से तार्किक नहीं है़ श्री तिवारी ने गांव की ओर से पीएमओ को शिकायत की थी कि यह बहुत बड़ा जनसंख्या घोटाला है़ साथ ही उन्होंने इसके पीछे राजनीतिक साजिश होने से भी इनकार नहीं किया था़
गौरतलब है कि वर्ष 2001 की जनगणना में मेरौनी छेरहट की आबादी मात्र पांच वृद्धि दिखाये जाने के कारण उसके बगल का आबादी में शुरू से छोटा रहा गांव लोहरगड़ा की आबादी मेरौनी से अधिक हो गयी़ इसका परिणाम हुआ कि वर्ष 2010 में हुए पंचायत चुनाव में मेरौनी के बजाय लोहरगड़ा पंचायत मुख्यालय बन गया़ इस बात को लेकर ग्रामीणों में रोष था़
इस शिकायत के आलोक में पीएमओ कार्यालय द्वारा अपर समाहर्ता को इसकी जांच के निर्देश दिये गये थे़ अपर समाहर्ता ने जिला सांख्यिकी पदाधिकारी को इसकी जांच करने के लिये निर्देशित किया था़ जांच के लिए मेरौनी गांव पहुंचे सांख्यिकी पदाधिकारी अनिल कुमार ने कई ग्रामीणों से बात की और इस मामले की सच्चाई जानने का प्रयास किया़
प्रभात खबर ने प्रमुखता से छापी थी
विदित हो कि प्रभात खबर ने इस खबर को प्रमुखता से छापा था़ मेरौनी निवासी कस्तूरी तिवारी के अनुसार शुरू में उनकी शिकायत पर न ही राज्य जनगणना आयोग और न ही पीएमओ कार्यालय ने गंभीरता से लिया़ लेकिन जब प्रभात खबर में प्रकाशित खबर के साथ दुबारा शिकायत पत्र पीएमओ को भेजा गया, तो वहां से स्थानीय अधिकारियों को जांच के निर्देश मिले़
जनगणना कार्यालय गढ़वा में नहीं होने से हो रही है परेशानी
इस संबंध में जिला सांख्यिकी पदाधिकारी ने बताया कि गढ़वा जिले में 2010 में जिला सांख्यिकी विभाग शुरू हुआ है़इससे पहले के जनगणना से संबंधित प्रपत्र आदि कागजात यहां उपलब्ध नहीं है. इसके खोजबीन का प्रयास किया जा रहा है़ निर्देश के आलोक में उन्होंने ग्रामीणों से बात की है़ लेकिन दस्तावेज नहीं रहने से वे किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाये हैं.जल्द ही वे अपनी रिपोर्ट पीएमओ कार्यालय को भेजेंगे़
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