खुले में शौच से मुक्त होगा डंडा

Published at :04 Oct 2016 6:21 AM (IST)
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खुले में शौच से मुक्त होगा डंडा

उपलब्धि. आज राज्यपाल द्रौपदी मुरमू कर सकती हैं घोषणा गढ़वा : गढ़वा जिले के डंडा प्रखंड को खुले में शौच मुक्त प्रखंड बनाये जाने की औपचारिक घोषणा मंगलवार को कर दी जायेगी़ यह गढ़वा जिला सहित पूरे झारखंड प्रदेश के लिए भी अच्छी खबर है़ रामगढ़ व हजारीबाग के बाद डंडा प्रखंड राज्य का तीसरा […]

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उपलब्धि. आज राज्यपाल द्रौपदी मुरमू कर सकती हैं घोषणा
गढ़वा : गढ़वा जिले के डंडा प्रखंड को खुले में शौच मुक्त प्रखंड बनाये जाने की औपचारिक घोषणा मंगलवार को कर दी जायेगी़ यह गढ़वा जिला सहित पूरे झारखंड प्रदेश के लिए भी अच्छी खबर है़
रामगढ़ व हजारीबाग के बाद डंडा प्रखंड राज्य का तीसरा ओडीएफ प्रखंड बननेवाला है़ राज्यपाल द्रौपदी मुरमू मंगलवार को गढ़वा पहुंच रही हैं, वे यहां पहुंचने के बाद इसकी औपचारिक घोषणा करेंगी और इसमें सहयोग करने व सक्रिय भूमिका निभानेवाले ग्रामीणों को सम्मानित करेंगी़ डंडा को ओडीएफ करने का प्रयास पिछले करीब डेढ़ साल से चल रहा था़
इसे 31 मार्च 2016 को ही ओडीएफ घोषित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, लेकिन तब तक लक्ष्य के विरुद्ध मात्र 10 प्रतिशत शौचालय का ही निर्माण होने के कारण यह संभव नहीं हो सका़ इसके बाद ओडीएफ घोषित करने की 30 जून एवं 15 अगस्त की तिथि भी विफल हो गयी है़ अब जाकर चार अक्तूबर को राज्यपाल के माध्यम से इसकी घोषणा की जायेगी़ डंडा प्रखंड के 3700 घरों में शौचालय निर्माण का कार्य किया गया है़ प्रशासनिक पदाधिकारियों का दावा है कि सोमवार (तीन अक्तूबर)तक शत-प्रतिशत घरों में शौचालय का निर्माण हो गया है़
मात्र तीन पंचायतवाले डंडा प्रखंड की आबादी 18 हजार है़, लेकिन इसको ओडीएफ घोषित करने में प्रशासन को पसीने छूट गये है़ं पूर्व के उपायुक्त की तुलना में वर्तमान उपायुक्त डॉ नेहा अरोड़ा ने कड़ी मेहनत कर इसे इस मुकाम तक पहुंचाया है कि वह ओडीएफ किया जा सके़ इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 3700 शौचालय बनाने में डेढ़ साल से ज्यादा का समय लग गया है़
उसमें से भी वित्तीय वर्ष 2017 की समाप्ति तक मात्र 10 प्रतिशत तक का ही काम हो सका था़ बाद के छह महीने में शेष शौचालय का निर्माण किया गया है़ यह अभियान सिर्फ प्रखंड में शौचालय निर्माण तक ही सीमित नहीं है, बल्कि प्रखंड के लोग शौचालय का नियमित उपयोग करें इसके लिए भी लगातार जागरूकता अभियान भी चलाये जा रहे है़
दीवार लेखन, रात्रि चौपाल, गोष्ठी, बैठक, कार्यशाला आदि से संबंधित दर्जनों कार्यक्रम इस प्रखंड के गावों में आयोजित किये गये है़ इसका परिणाम यह नजर आया कि जो ग्रामीण महिलाएं कल तक शौचालय आदि के बारे में चर्चा करने से भी संकोच करते थे, वे अब खुले तौर पर इसके फायदे गिनाते है़ं
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