विशेष प्रशिक्षण के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति हुई

Updated at :16 Jul 2013 1:56 PM
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विशेष प्रशिक्षण के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति हुई

* प्रयोजन के लिए मुहैया कराये गये थे 1. 80 करोड़ रुपये.* 10217 बच्चों को देना था विशेष प्रशिक्षण.* 702 केंद्रों पर दिया जाना था प्रशिक्षण.* कहीं-कहीं तो राशि भी निकाल ली गयी, पर नहीं दिया गया प्रशिक्षण.* कई केंदों की राशि यथावत ही पड़ी रही.।। देवदत्त चौबे ।। गढ़वा : सर्व शिक्षा अभियान के […]

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* प्रयोजन के लिए मुहैया कराये गये थे 1. 80 करोड़ रुपये.
* 10217 बच्चों को देना था विशेष प्रशिक्षण.
* 702 केंद्रों पर दिया जाना था प्रशिक्षण.
* कहीं-कहीं तो राशि भी निकाल ली गयी, पर नहीं दिया गया प्रशिक्षण.
* कई केंदों की राशि यथावत ही पड़ी रही.
।। देवदत्त चौबे ।।
गढ़वा : सर्व शिक्षा अभियान के तहत विद्यालय के शैक्षणिक रूप से कमजोर बच्चों को विशेष प्रशिक्षण अभियान चला कर उन्हें मेधावी बनाने के लिए 1. 80 करोड़ रुपये उपलब्ध कराये गये थे. पिछले वित्तीय वर्ष में इस प्रयोजन के लिए 702 केंद्रों को चिह्न्ति किये गये. 10217 बच्चों को आवश्यकता अनुसार तीन, छह, नौ एवं 12 महीने का विशेष प्रशिक्षण देना था. लेकिन जिले में यह कार्य नहीं हो सका.

प्रशिक्षण के नाम पर कहीं-कहीं तो राशि की निकासी कर ली गयी, लेकिन प्रशिक्षण नहीं हुआ. जबकि बहुत सारे केंद्रों पर राशि यथावत पड़ी रही. इस प्रकार की अनियमितता की शिकायत मिलने के बाद जांच टीम का गठन किया गया. एडीपीओ अंबुज्या पांडेय, एपीओ आनंद प्रभात कुल्लू, जिला साधन सेवी सुरेंद्र चौधरी एवं रविंद्रनाथ चौबे की टीम ने जिले के सैकड़ों प्रशिक्षण केंद्रों की मौके पर जाकर जांच की.

जांच में इस बात का खुलासा हुआ कि कहीं भी बच्चों को विशेष प्रशिक्षण नहीं दिया गया. राशि या तो यथावत पड़ी है या उसे निकाल लिया गया है. बच्चों की संख्या के आधार पर एक लाख रुपये तक केंद्रोंको दिये गये थे. जिला कार्यालय द्वारा यह राशि जुलाई 2012 में ही केंद्रों को भेज दी गयी थी.

जांच रिपोर्ट मिलने के बाद जिला शिक्षा अधीक्षक जय गोविंद सिंह ने संबंधित केद्रों से तत्काल राशि वापस करने का निर्देश दिया. इस संबंध में उन्होंने सभी बीइइओ को पत्र जारी किया है. विशेष प्रशिक्षण अभियान नहीं चलाये जाने से कमजोर बच्चों को मेधावी बनाने की सरकार की योजना पर पानी फिर गया.

ये वैसे बच्चे हैं, जो पहले विद्यालय से बाहर थे. लेकिन उन्हें विद्यालय के विशेष प्रशिक्षण अभियान से जोड़ कर मजबूत बनाना था. समायोजन को ध्यान में रखते हुए राशि तो वापस करायी जा रही है, लेकिन कमजोर बच्चों के लिए लायी गयी इस योजना का लाभ उन तक नहीं पहुंचा.

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