रमकंडा : वर्ष 2017 के फरवरी माह में मनरेगा आयुक्त सिद्धार्थ त्रिपाठी द्वारा रमकंडा पहुंचकर आधा दर्जन योजनाओं की स्थलीय जांच व निर्देश के बाद कई महीनों तक लोकपाल मुरारी झा द्वारा प्रखंड की चिन्हित 116 योजनाओं की जांच ने रमकंडा प्रखंड की तस्वीर बदल दी. स्थिति अब ऐसी हो गयी है मानो इस जांच ने कोई जादू कर दिया हो. आयुक्त की जांच के बाद योजनाओं से फर्जी निकासी की गयी राशि की जब वसूली होने लगी, तो स्थानीय जनप्रतिनिधि से लेकर प्रखंड स्तरीय अधिकारी व बिचौलिये भी सकते में आ गये.
इस जांच से जहां योजनाओं में मशीनों का इस्तेमाल समाप्त हो गया़ वहीं अब मजदूरों को काम भी मिलने लगा है. वर्तमान स्थिति ऐसी बदल गयी है कि वर्ष 2017 से पहले जहां प्रखंड कार्यालय बिचौलियों से भरी रहती थी़ वहीं अब यह परिपाटी समाप्त हो गया है़
जांच से निर्माण कार्य की गति हुई धीमी, तो राशि खर्च पर पड़ा असर : एक तरफ जहां आयुक्त द्वारा वित्तीय वर्ष 2016-17 की करीब 116 योजनाओं की जांच के निर्देश के बाद योजनाओं में मशीन द्वारा निर्माण कार्य पर प्रतिबंध लग गया है और मजदूरों द्वारा कार्य कराया जाने लगा है. वहीं दूसरी तरफ़ इस जांच के बाद योजनाओं के निर्माण कार्य की गति पर रोक लग गयी है़
पहले की अपेक्षा खर्च की राशि में बड़ा अंतर दिखने लगा है़ जानकारी के अनुसार वर्ष 2016-17 में मजदूरी मद में करीब 7.86 करोड़ व सामग्री मद में 1.8 करोड़ खर्च किया गया था. इसमें बलिगढ़ पंचायत में मजदूरी मद में 95.33 लाख व मेटेरियल मद में 13.57 लाख, बिराजपुर पंचायत में मजदूरी मद में 57.64 लाख व मेटेरियल मद में 14.91 लाख, हरहे पंचायत में मजदूरी मद में 85.78 लाख व मेटेरियल मद में 8.34 लाख, चेटे पंचायत में मजदूरी मद में 99.64 लाख व मेटेरियल मद में 13.59 लाख, रकसी पंचायत में मजदूरी मद में 1.37 करोड़ व मेटेरियल मद में 17.37 लाख, रमकंडा पंचायत में मजदूरी मद में 1.63 करोड़, मेटेरियल मद में 12.8 लाख, व उदयपुर पंचायत में मजदूरी 1.47 करोड़ व मेटेरियल मद में 28.6 लाख खर्च किया गया. जबकी वित्तीय वर्ष 2017-18 में बीते वर्ष की अपेक्षा कुल मजदूरी मद में महज 2.46 करोड़ व मेटेरियल मद में 6.83 लाख ही खर्च किया जा सका है. इसमें बलिगढ़ पंचायत में मजदूरी मद में 40.25 लाख, बिराजपुर पंचायत में मजदूरी मदके 17.63 लाख, चेटे पंचायत में मजदूरी मद में 19.23 लाख व मेटेरियल मद में 1.15 लाख, हरहे पंचायत में मजदूरी मद में 46.8 लाख व मेटेरियल मद में 1.07 लाख, रकसी पंचायत में मजदूरी मद में 26.3 लाख व मेटेरियल मद में 3.31 लाख, रमकंडा पंचायत में मजदूरी मद में 62.34 लाख व उदयपुर पंचायत में मजदूरी मद में 33.75 लाख व मेटेरियल मद में 1.31 लाख खर्च शामिल है.
धीरे धीरे खर्च की स्थिति और भी दयनीय होने लगी और वित्तीय वर्ष 2018-19 में अभी तक मजदूरी मद में महज 19.41 लाख व मेटेरियल मद में महज 11. 28 ही खर्च हो सका है. जिसमें बलिगढ़ पंचायत में मजदूरी मद में 2.14 लाख, रकसी पंचायत में मजदूरी मद में 0.78 लाख, उदयपुर पंचायत में मजदूरी मद में 1.65 लाख, बिराजपुर पंचायत में मजदूरी मद में 4.93 लाख व मेटेरियल मद 1.96 लाख, चेटे पंचायत में मजदूरी मद में 3.8 लाख व मेटेरियल मद में 3.48 लाख, हरहे पंचायत में मजदूरी मद में 1.69 लाख व मेटेरियल मद में 0.24 लाख व रमकंडा पंचायत में मजदूरी मद में 4.42 लाख व मेटेरियल मद में 5.59 लाख खर्च हो सका है.
जागरूकता का असर दिखने लगा
मनरेगा व 14वें वित्त से खर्च किये गये राशि का जब स्थल पर पंचायतवार सोशल ऑडिट हुआ, तो इसमें फर्जी तरीके से राशि निकासी सहित कई तरह के मामले सामने आये. जन सुनवाई के दौरान टीम द्वारा मजदूरों को उनके हक और अधिकार के बारे में जागरूक किया गया, जिसका असर दिखने लगा है. मजदूर भी अब जागरूक हो रहे हैं. जिसका नतीजा है कि बिचौलिये धीरे धीरे मनरेगा जैसी योजनाओं में दिलचस्पी नहीं रख रहे हैं और योजनाओं की स्वीकृति कम होने लगी है.
योजना में मशीन पूरी तरह से प्रतिबंधित: बीडीओ
इस संबंध में पूछे जाने बीडीओ रामजी वर्मा ने कहा कि मनरेगा योजना में मशीन पूरी तरह से प्रतिबंधित है. इसे लेकर मनरेगा कर्मी, जनप्रतिनिधि को सख्त निर्देशित किया गया है. गड़बड़ी होने पर संबंधित लोगों पर सीधे कार्रवाई की जायेगी. उन्होंने कहा कि मनरेगा एक्ट को पूरी तरह से लागू किया जायेगा, ताकि मजदूरों को उनका हक मिल सके.