नक्सली हिंसा में मारे गये 6 ग्रामीणों के आश्रितों को नहीं मिला मुआवजा

Updated at : 17 Feb 2017 4:57 AM (IST)
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नक्सली हिंसा में मारे गये 6 ग्रामीणों के आश्रितों को नहीं मिला मुआवजा

चाकुलिया : श्यामसुंदरपुर थानांतर्गत जामुआ निवासी सीरियल किलर कोर्ट हाजत से फरार नक्सली फोगड़ा मुंडा ने 15 फरवरी को सरेंडर कर दिया. वहीं जमुआ गांव में नक्सली हिंसा में मारे गये आठ में से छह के आश्रितों को अबतक मुआवजा नहीं मिला है. सिर्फ दो आश्रितों को मुआवजा के रूप में एक-एक लाख रुपये मिले […]

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चाकुलिया : श्यामसुंदरपुर थानांतर्गत जामुआ निवासी सीरियल किलर कोर्ट हाजत से फरार नक्सली फोगड़ा मुंडा ने 15 फरवरी को सरेंडर कर दिया. वहीं जमुआ गांव में नक्सली हिंसा में मारे गये आठ में से छह के आश्रितों को अबतक मुआवजा नहीं मिला है. सिर्फ दो आश्रितों को मुआवजा के रूप में एक-एक लाख रुपये मिले हैं. इन सभी हत्याओं में फोगड़ा मुंडा नामजद अभियुक्त है. फोगड़ा के सरेंडर के बाद यहां के मृतकों के आश्रितों ने सवाल खड़ा किया कि आखिर यह कैसा न्याय है. हत्या करने वाले को इनाम और जिनकी हत्या हुई, उनके आश्रितों की उपेक्षा. कई मृतकों के आश्रितों ने कहा कि फोगड़ा मुंडा को कड़ी से कड़ी सजा मिले.

मुकुल मुंडा : जमुआ के मुकुल मुंडा की हत्या 14 अगस्त 2008 को हुई थी. फोगड़ा मुंडा नामजद अभियुक्त था. मुकुल मुंडा के आश्रितों को भी मुआवजा नहीं मिला है. उसके वृद्ध पिता कुनु मुंडा और मां गुरुवारी मुंडा ने बताया कि कड़ी मुश्किल से जिंदगी बीत रही है. घर टूट रहा है. पुत्रवधू रासमनी मुंडा बहरागोड़ा में रह कर बच्चों को पढ़ा रही है. पुत्रवधू बीमार है. काफी मुश्किल से इलाज हो रहा है.
ग्रामीणों ने कहा – यह कैसा न्याय, हत्या करने वाले को इनाम और जिनकी हत्या हुई उनके आश्रितों की उपेक्षा
लखन मुर्मू : जमुआ के ग्राम प्रधान की लखन मुर्मू की हत्या 13 मई 2008 को हुई थी. इसमें फोगड़ा मुंडा को नामजद अभियुक्त बनाया गया था. स्व लखन मुर्मू की पत्नी गुलापी मुर्मू ने बताया कि आज तक उसे किसी प्रकार का मुआवजा नहीं मिला है.
भरत कर्मकार: माचाडीहा के भरत कर्मकार की हत्या 14 जुलाई 2008 को हुई थी. इस मामले में फोगड़ा मुंडा नामजद अभियुक्त था. स्व भरत कर्मकार के आश्रितों को मुआवजा नहीं मिला. उसकी पहली पत्नी पागल हो गयी. दूसरी मायके चली गयी. उसके दोनों पुत्र न जाने कहां गये, किसी को पता नहीं है. उसके घर के अवशेष ही बचे हैं.
लखींद्र मुंडा : 21 अगस्त 2009 को जमुआ के लखींद्र मुंडा की हत्या हुई. फोगड़ा को नामजद अभियुक्त बनाया गया. स्व लखींद्र मुंडा की पत्नी जलनी मुंडा ने बताया कि उसे मुआवजा नहीं मिला. वह लकड़ी बेच कर अपनी तीन संतानों का पालन पोषण कर रही है.
मुखी मुंडा: नौ अक्तूबर 2009 को जमुआ के स्व लखींद्र मुंडा की मां मुखी मुंडा की हत्या हुई. मुखी मुंडा के पति को एक लाख रुपये का मुआवजा मिला.
शिशिर मुंडा: जमुआ के शिशिर मुंडा की हत्या 25 मई 2010 को हुई. फोगड़ा मुंडा नामजद अभियुक्त बना. स्व शिशिर मुंडा की पत्नी मुनु मुंडा ने बताया कि उसे मुआवजा नहीं मिला है. मजदूरी से परिवार चल रहा है.
हुका मुंडा: हुका मुंडा की हत्या 7-8 जून 2010 की रात की गयी. स्व हुका मुंडा की पत्नी श्रीमती ने बताया कि उसे मुआवजा के तौर पर सिर्फ एक लाख रुपये मिले हैं.
तुलसी मुंडा: जमुआ के तुलसी मुंडा की हत्या चार फरवरी 2015 को की गयी. फोगड़ा मुंडा को नामजद अभियुक्त बनाया गया. स्व तुलसी मुंडा की पत्नी पुनसिया मुंडा ने बताया कि आज तक मुआवजा नहीं मिला है. किसी तरह परिवार चल रहा है.
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