अधिवक्ताओं ने मंत्री लुईस के आवास का किया घेराव

Updated at : 16 Jun 2017 4:15 AM (IST)
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अधिवक्ताओं ने मंत्री लुईस के आवास का किया घेराव

बंदोबस्त पदाधिकारी को हटाने की मांग पर प्रदर्शन दुमका : बंदोबस्त पदाधिकारी बिरसा उरांव और चार्ज अफसर प्रकाश बिरसा लकड़ा को हटाने की मांग को लेकर दुमका के कई अधिवक्ताओं ने समाज कल्याण मंत्री डॉ लोइस मरांडी के हथियापाथर स्थित आवास का घेराव किया. मंत्री से पहले भी अपनी समस्याओं से अवगत करा चुके अधिवक्ताओं […]

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बंदोबस्त पदाधिकारी को हटाने की मांग पर प्रदर्शन

दुमका : बंदोबस्त पदाधिकारी बिरसा उरांव और चार्ज अफसर प्रकाश बिरसा लकड़ा को हटाने की मांग को लेकर दुमका के कई अधिवक्ताओं ने समाज कल्याण मंत्री डॉ लोइस मरांडी के हथियापाथर स्थित आवास का घेराव किया. मंत्री से पहले भी अपनी समस्याओं से अवगत करा चुके अधिवक्ताओं ने कहा कि बंदोबस्त पदाधिकारी मनमानी कर रहे हैं और नये-नये नियम लागू कर न सिर्फ अधिवक्ता बल्कि रैयतों को परेशान कर रहे हैं. पर्चे के प्रतिलिपि शाखा को बंद कर दिया गया है.
अधिवक्ताओं ने मंत्री लुईस…
नकल नहीं मिलने की वजह से सरकार को राजस्व का भी भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है. अधिवक्ताओं ने परचा वितरण के नाम पर भी वसूली के मामले सामने आने की बातें रखी. कहा कि नकल नहीं मिल पाने से लोग अपने मुकदमे की पैरवी ठीक से नहीं कर पा रहे हैं. बार-बार नियम और तौर-तरीके बदले जाने से बंदोबस्त का काम पांच दशक बीतने पर भी पूरा नहीं हो पा रहा है. अधिवक्ताओं ने बंदोबस्त पदाधिकारी व चार्ज अफसर दोनों को हटवाने की मांग की. कहा कि इन्हें नहीं हटाया गया, तो वे अपने आंदोलन को तेज करेंगे. उल्लेखनीय है कि तकरीबन तीन महीने से बंदोबस्त न्यायालय का अधिवक्ता बहिष्कार कर रहे हैं.
सीबीआइ से करवायें जांच, तो पता चलेगा क्या-क्या तमाशा हुआ : प्रतिनिधिमंडल में शामिल झारखंड बार काउंसिल के सदस्य गोपेश्वर प्रसाद झा ने कहा कि बंदोबस्त में बड़े पैमाने पर अनियमितता हो रही है. इसकी जांच तो सीबीआइ से करायी जानी चाहिए, तब जाकर पता चलेगा कि कैसी-कैसी गड़बड़ी हुई है. एक एएसओ ने एक मामले में दो आदेश पारित कर दिया. उस पर प्राथमिकी दर्ज हुई है. जब पहला आदेश पारित कर दिया, तो उसमें नकल निकल गया.
दूसरे आदेश में भी नकल निकाल गया. एक में अपील स्वीकार हुई और दूसरे में खारिज. ऐसा ही एक और मामला हमलोगों के संज्ञान में आया है, लेकिन संबंधित पक्ष को धमका दिया गया है. ऐसे एक नहीं कई उदाहरण सामने आयेंगे. मंदिर की जमीन सेठ जी ने लिखवा ली. कितने ही आदिवासी की जमीन बरबाद हुआ है, जांच हो, तो पता चलेगा कि क्या-क्या तमाशा हुआ है. अधिवक्ताओं से घिरीं मंत्री डॉ लोइस मरांडी ने आश्वस्त किया कि इस दिशा में जल्द ही ठोस कार्रवाई होगी.
उन्होंने मौके पर ही कार्मिक सचिव निधि खरे से भी फोन पर बात की और शिकायतों को संज्ञान में लेकर तुरंत पहल करने को कहा. प्रतिनिधिमंडल में सरकारी अधिवक्ता अरुण कुमार सिन्हा, अब्बास अंसारी, सरोज गण, मनोज कुमार साह, सोमनाथ डे, रविशंकर झा, रविकांत झा, रंजन कुमार सिन्हा, सूर्यप्रकाश, समीर कुमार मेहता, अमर कुमार मंडल, लाला ज्ञान प्रकाश, दीपक कुमार, प्रियरंजन कुमार, हिमांशु शेखर पाठक आदि मौजूद थे.
बोले अधिवक्ता
जब तक ये सुधरते नहीं है, तब तक अराजकता बनी रहेगी. कार्य में कुछ गड़बड़ हो रहा है, तो कम से कम सुझाव तो ले लें. इन्होंने सरकारी अधिवक्ता से राय लेने की जरूरत नहीं समझी. आजतक बंदोबस्त पदाधिकारी या चार्ज आॅफिसर ने कोई सुझाव नहीं लिया कि किस तरह समस्याओं का निदान हो. इस समस्या का निदान बड़ी आसानी से हो जाता, अगर हमसे परामर्श ली गयी होती. विधि सम्मत इनके द्वारा कदम उठाया गया होता तो आज इतनी परेशानी पैदा नहीं होती. ये लोग भले ही कहलाते हैं लोक सेवक, लेकिन जमीनदारों की तरह काम कर रहे हैं. जबकि जमीनदारी 1951 में ही चली गयी है.
– अरुण कुमार सिन्हा, सरकारी अधिवक्ता
समय समय पर बंदोबस्त पदाधिकारी अपना-अपना नियम कानून लागू कर देते हैं. सरकार द्वारा बनाये गये नियम कानून से नहीं चलते. पहले गड़बड़ी होती थी, तो शिकायत के बाद उसे सुधार दिया जाता था. इस बार तो पूरा सेटलमेंट में नकल का काम बंद है. करोड़ों रुपये के सरकारी राजस्व की क्षति पहुंच रही है. ये लोग मनमाने ढंग से काम कर रहे हैं. अपना नियम बनाते हैं. पुराने सेटलमेंट अफसर के बनाये गये नियम को निरस्त कर देते हैं. कोर्ट में केस लेकर बैठ जाते हैं. अधिवक्ता नहीं पहुंचे या पक्षकार भी नहीं पहुंचे, फिर भी फैसले कर दिये जाते हैं.
– गोपेश्वर प्रसाद झा, सदस्य, झारखंड बार काउंसिल
15 दुमका 15, 16
15 दुमका-17: अरुण कुमार सिन्हा
15 दुमका-18: गोपेश्वर प्रसाद झा.
दुमका
बंदोबस्त में बड़े पैमाने पर हो रही अनियमितता
मामले की जांच सीबीआइ से कराने की मांग
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