वैश्विक दौर में पेटेंट अवार्ड के लिए नहीं, विकास के लिए हो : पीके सिंह

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बौद्धिक संपदा के उपयोग व पेटेंट पर चर्चा के लिए डिगवाडीह सिंफर में आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला का समापन शुक्रवार को हुआ. इसमें 48 युवा वैज्ञानिक शामिल हुए. जोड़ापोखर : देश की बौद्धिक संपदा का उपयोग व पेटेंट करा कर युवा वैज्ञानिक राष्ट्र निर्माण में जुट जायें, तभी हम विकसित देशों की श्रेणी में खड़े […]

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बौद्धिक संपदा के उपयोग व पेटेंट पर चर्चा के लिए डिगवाडीह सिंफर में आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला का समापन शुक्रवार को हुआ. इसमें 48 युवा वैज्ञानिक शामिल हुए.

जोड़ापोखर : देश की बौद्धिक संपदा का उपयोग व पेटेंट करा कर युवा वैज्ञानिक राष्ट्र निर्माण में जुट जायें, तभी हम विकसित देशों की श्रेणी में खड़े हो पायेंगे. ये बातें सिंफर के निदेशक पीके सिंह ने शुक्रवार को कहीं. वह सिंफर डिगवाडीह के आदित्यनाथ लाहड़ी सभागार में बौद्धिक संपदा अधिकार (आइपीआर) व पेटेंट विषय पर आयाेजित दो दिवसीय कार्यशाला के समापन समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि वैश्विक दौर में पेटेंट के लिए जुनूनी होने की जरूरत है. यह अवार्ड के लिए नहीं, बल्कि देश के विकास के लिए होना चाहिए. पहले बाजार का पता लगायें, फिर पेटेंट करायें, तब उसकी रक्षा करें.
रिसर्च के लिए समय निर्धारित करें व गोपनीयता रखें. नहीं तो हम पिछड़ जायेंगे. घर व राष्ट्र को चुनना हो तो पहले राष्ट्र को चुनें. दिल्ली के वैज्ञानिक डॉ चेतन कुमार ने कहा कि पूरी दुनिया में 45 हजार 444 पेटेंट हुए हैं, जबकि भारत में यह मात्र 13 हजार 219 है. कहा कि हमारे देश में सबसे ज्यादा बौद्धिक संपदा मौजूद है. देश में जागरूकता की कमी है.
इस तरह की कार्यशाला से लोगों में जागरूकता बढ़ेगी. उन्होंने युवा वैज्ञानिकों को खोज करने, उसके पंजीकरण की विधि व लाभ के संदर्भ में जानकारी दी. हेड आइपी सेल (सीएसआइआर) उत्तराखंड के डॉ डीपी भट्ट ने कहा कि पेटेंट लैब का वाणिज्यीकरण देश में ही होना चाहिए. उन्होंने ईंधन व दवा के क्षेत्र में पायलट संयंत्र लगाने पर बल दिया. कार्यशाला में 48 युवा वैज्ञानिक शामिल हुए. उनमें इस्तियाक अहमद, डॉ आशीष मुखर्जी, एनके श्रीवास्तव, सुमन साहा ने अपने विचारों से अवगत कराया. धन्यवाद ज्ञापन डॉ टीबी दास ने किया.
बौद्धिक संपदा अधिकार व पेटेंट था विषय
युवा वैज्ञानिकों को दी गयी पेटेंट से जुड़ी जानकारी
देश में ही हो पेटेंट लैब का वाणिज्यीकरण
सीएसआइआर का था दो दिवसीय आयोजन
स्मारिका का विमोचन
डॉ पीके सिंह ने युवा वैज्ञानिकों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया. साथ ही स्मारिका का विमोचन किया. निदेशक श्री सिंह ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी व पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम की प्रशंसा की. कहा कि वर्ष 1998 में बुद्ध पूर्णिमा के मौके पर पोखरण में परमाणु विस्फोट कर गोपनीय तरीके से भारत दुनिया के छह शक्तिशाली देशों में शामिल हुआ था.
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