गुड न्यूज: गृह आपदा विभाग ने फिर शुरू की कवायद, धनबाद में खुलेगा खनिज आपदा प्रबंधन संस्थान

By Prabhat Khabar Digital Desk
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धनबाद: धनबाद जिले के निरसा अंचल में खनिज आपदा प्रबंधन संस्थान खोलने की कवायद एक बार फिर शुरू हो गयी है. पिछले तीन वर्षों से ठंडे बस्ते में पड़ी इस योजना को धरातल पर उतारने के लिए गृह आपदा विभाग ने कोल कंपनियों से मदद व सुझाव मांगे हैं.
क्या है योजना : जिले में बीसीसीएल, इसीएल एवं इस्को जैसी तीन बड़ी सरकारी कोल कंपनियों की खदानें हैं. इसके अलावा टाटा की भी खदानें हैं. कई आउटसोर्सिंग कंपनियां भी यहां काम करती हैं. कोयला खनन क्षेत्र होने के कारण यहां अक्सर खनिज जनित दुर्घटनाएं होती रहती हैं. झरिया सहित जिले के कई इलाकों में भूमिगत आग व धंसान से भी बड़ी आबादी पर खतरा मंडरा रहा है. कोई बड़ी घटना होने पर बचाव के लिए नेशनल डिस्सेटर रिस्पोंस फोर्स (एनडीआरएफ) की मदद लेनी पड़ती है. इन स्थितियों को देखते हुए वर्ष 2013 में ही राज्य के तत्कालीन आपदा प्रबंधन मंत्री मो. मन्नान मल्लिक की अध्यक्षता में हुई बैठक में धनबाद में आपदा प्रबंधन संस्थान खोलने का निर्णय लिया गया था. वर्ष 2014 में राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकार (एसडीएमए) ने भी धनबाद में आपदा प्रबंधन संस्थान खोलने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी. लेकिन, बाद में प्रस्ताव ठंडे बस्ते में डाल दिया गया.
निरसा में जमीन चिह्नित
आपदा प्रबंधन संस्थान के लिए निरसा अंचल के गोपालगंज में जमीन चिह्नित की जा चुकी है. यहां 66.74 एकड़ भूमि को राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकार (एनडीएमए) के विशेषज्ञ आरके दवे ने भी आपदा प्रबंधन संस्थान के लिए उपयुक्त करार दिया है. गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग के अपर सचिव जटाशंकर चौधरी ने बीसीसीएल, सीसीएल एवं एनएलसी चेन्नई के सीएमडी को पत्र लिख कर धनबाद में आपदा प्रबंधन संस्थान खोलने के लिए सहयोग करने को कहा है. पत्र में इन कंपनियों से सुझाव भी मांगा गया है. पत्र की प्रतिलिपि धनबाद के उपायुक्त को भी भेजी गयी है. उनसे इस योजना के क्रियान्वयन में तेजी लाने को कहा गया है.
क्या होगा लाभ
आपदा प्रबंधन संस्थान में लोगों को खान दुर्घटनाओं से निबटने की ट्रेनिंग दी जायेगी. एनडीआरएफ के विशेषज्ञ यहां आकर ट्रेनिंग देंगे. खनिज जनित दुर्घटनाओं पर फोकस होगा. लेकिन, दूसरे तरह की दुर्घटनाओं की स्थिति के लिए भी लोगों को प्रशिक्षण दिया जायेगा.
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