सारवां : धुएं तक सिमट गयी सारवां के लौह कारीगरों की जिंदगी

सारवां : प्रशासनिक उपेक्षा व सुविधाओं के अभाव में सारवां के महतोडीह मडैया टोला के लौह कारीगर बदहाल जिंदगी जीने को मजबूर हैं. परिवार का पेट पालने व अपने बच्चों का भविष्य संवारने के लिए दिन भर आग की भट्ठी में लोहे के साथ अपना शरीर तपाना इनकी जिंदगी का हिस्सा बन गया है. कांटी […]
सारवां : प्रशासनिक उपेक्षा व सुविधाओं के अभाव में सारवां के महतोडीह मडैया टोला के लौह कारीगर बदहाल जिंदगी जीने को मजबूर हैं. परिवार का पेट पालने व अपने बच्चों का भविष्य संवारने के लिए दिन भर आग की भट्ठी में लोहे के साथ अपना शरीर तपाना इनकी जिंदगी का हिस्सा बन गया है.
कांटी से लेकर लोहे के सभी सामान बनाने वाले इन कारीगरों की जिंदगी काले धुएं तक ही सिमट कर रह गयी है, जहां अंधेरे के सिवाय कुछ भी नहीं है. इन लौह कारीगरों को अबतक सुविधाएं नहीं मिल पायाी है. लोहे को अलग-अलग रूपों में ढालने के बाद भी लोहे के सामानों की सही कीमत नहीं मिल पा रही है.
दिन ब दिन लोहे की कीमत बढ़ती गयी पर इनकी आय सीमित ही रह गयी है. एक साल पहले की तुलना में कच्चा लोहे की कीमत बढ़ गयी. लेकिन, जब उसका सामान बनाकर बाजार में बेचने जाते हैं, तो उसमें लगी मजदूरी के साथ कोयला आदि पर खर्च जोड़ने पर दिन भर की मजदूरी भी नहीं निकल पाती है.
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