आयुर्वेद से कोरोना का इलाज, दवा विकसित करने के लिये केंद्र ने बनाया टास्क फ़ोर्स

Author : Pritish Sahay Published by : Prabhat Khabar Updated At : 13 Apr 2020 6:50 AM

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नयी दिल्ली : भारत सहित कई देश कोरोना संक्रमण का सामना कर रहे है. पूरी दुनिया में एक लाख से अधिक लोगों की मौत हो चूकी है. इस वायरस के ख़तरे से निबटने के लिये कई देशों में वैक्सीन को लेकर शोध जारी है. भारत भी इस काम में लगा हुआ है. भारत सरकार ने […]

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नयी दिल्ली : भारत सहित कई देश कोरोना संक्रमण का सामना कर रहे है. पूरी दुनिया में एक लाख से अधिक लोगों की मौत हो चूकी है. इस वायरस के ख़तरे से निबटने के लिये कई देशों में वैक्सीन को लेकर शोध जारी है. भारत भी इस काम में लगा हुआ है. भारत सरकार ने वैक्सीन के लिये पुणे की एक स्टार्ट अप को आर्थिक मदद दिया है, वहीं इसके इलाज के लिये दूसरे उपायों पर भी काम किया जा रहा है. इसी कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आयुष मंत्रालय के तहत एक टास्क फोर्स का गठन किया है. यह टास्क फ़ोर्स भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के साथ मिलकर कोरोना वायरस के संक्रमण से लड़ने के लिए आयुर्वेद की दवा विकसित करेगा.

आयुर्वेद की वैज्ञानिक मान्यता के लिए इस टास्क फोर्स का गठन किया है. यह आयुर्वेद और पारंपरिक दवाइयों के मेडिकल फॉर्मूले को कोरोना के खिलाफ वैज्ञानिक तरीके से प्रयोग करने की दिशा में काम करेगा. इसकी जानकारी देते हुए केंद्रीय आयुष मंत्री श्रीपाद यसो नाइक ने कहा कि एलोपैथिक दवा कोरोना के इलाज में नाकाम साबित हो रही है और उम्मीद है कि आयुर्वेद और होम्योपैथिक दवाएं कोरोना वायरस जैसी खतनाक बीमारी के उपचार में कारगर सिद्ध होगी.

अभी तक इससे जूड़े लगभग दो हज़ार प्रस्ताव मिले हैं और कई प्रस्तावों की साइंटिफ़िक वैधता की जांच के लिये रिसर्च संस्थाओ को भेजा जायेगा. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत जल्द ही आयुर्वेदिक पद्धति से कोरोना वायरस के रोगियों का इलाज करेगा. वैज्ञानिक प्रामाणिकता नहीं मिलने के कारण इस प्राचीन चिकित्सा पद्धति का सही प्रयोग नहीं हो पा रहा है. ध्यान देने वाली बात है कि हाल में एक आयुर्वेद डॉक्टर ने चेन्नई हाई कोर्ट में याचिका दाख़िल कर सरकार से अपने द्वारा बनायी गयी दवा को कोरोना इलाज के लिये मंज़ूरी देने की मांग की थी.

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By Pritish Sahay

प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.

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