सरकार के फैसले से लोगों में हर्ष

Updated at : 06 Apr 2016 4:00 AM (IST)
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सरकार के फैसले से लोगों में हर्ष

जिले में फैली खुशी की लहर हाजीपुर : देशी और मसालेदार केबाद अब विदेशी शराब भी बंद. नीतीश सरकार ने मंगलवार को विदेशी शराब पर भी प्रतिबंध का फैसला लिया और इसी के साथ सूबे में पूर्ण शराबबंदी लागू हो गयी. सरकार द्वारा लिये गये इस अप्रत्याशित फैसले की जानकारी मिलते ही जिले में खुशी […]

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जिले में फैली खुशी की लहर

हाजीपुर : देशी और मसालेदार केबाद अब विदेशी शराब भी बंद. नीतीश सरकार ने मंगलवार को विदेशी शराब पर भी प्रतिबंध का फैसला लिया और इसी के साथ सूबे में पूर्ण शराबबंदी लागू हो गयी. सरकार द्वारा लिये गये इस अप्रत्याशित फैसले की जानकारी मिलते ही जिले में खुशी की लहर दौड़ गयी है. लोगों ने पूर्ण शराबबंदी के फैसले की दिल खोल कर सराहना की और इसके लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रति आभार जताया. गली-मुहल्ले से लकर चौक-चौराहों तक इसी बात की चर्चा होती रही. लोग बाग शराबबंदी के पक्ष में तरह-तरह के तर्क देते और सरकार की तारीफों के पुल बांधते दिखे.
खोली गयीं दुकानें कर दी गयीं सील : कैबिनेट के फैसले के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा जैसे ही विदेशी शराब पर प्रतिबंध को तत्काल प्रभाव से लागू करने की बात कही गयी कि नगर क्षेत्र में खोली गयी शराब की दुकानों पर ताला लटकना तय हो गया था. उत्पाद विभाग के अधिकारी दोपहर से ही दुकानों को बंद कराने की तैयारी में जुट गये थे. मुख्यालय से निर्देश प्राप्त होते ही मंगलवार की शाम विदेशी शराब की सभी दुकानों को सील कर दिया गया.
खुल चुकी थीं 21 में 11 दुकानें : बिहार स्टेट बिवरेज कॉरपोरेशन लिमिटेड ने मशक्कत करके नगर में विदेशी शराब की जो दुकानें खोली, वे दो दिन भी नहीं चल पायीं. बीएसवीसीएल द्वारा 2 से 4 अप्रैल के बीच नगर के विभिन्न स्थानों पर अंगरेजी शराब की 11 दुकानें खोली जा चुकी थीं. बाकी नगर की नौ और वैशाली की एक दुकान खोलने की तैयारी चल रही थी कि इसी बीच सरकार का अचानक निर्णय आ गया. मंगलवार को विदेशी शराब पर प्रतिबंध का समाचार मिलते ही कॉरपोरेशन के लोगों ने माथा पकड़ लिया. कई दुकानों पर बीएसवीसीएल के कर्मी इस बात से हताश दिखे कि उनकी सारी मेहनत पर पानी फिर गया. कइयों का कहना था कि जब सरकार को इतनी जल्दी विदेशी शराब पर भी प्रतिबंध लगाना ही था, तो अच्छा होता कि एक अप्रैल से ही इसे लागू कर दिया जाता. दुकानें खोजने, उन्हें व्यवस्थित करने और खोलने में पैसे और समय की बरबादी हुई.
गम में डूबे पीने वाले, झूम उठे परिजन : वाइन और बियर का नियमित सेवन करने वाले सरकार के फैसले से नाखुश है. अचानक विदेशी शराब पर पाबंदी के फैसले को वे अनुचित और अव्यवहारिक मानते हुए अपनी नाराजगी प्रकट करते हैं. गम को भुलाने का बहना लेकर शराब की लत की गिरफ्त में जा चुके नशेबाज अब इसके न मिलने के गम में डूबे जा रहे हैं. विदेशी शराब के अभ्यस्त नगर कई लोगों को हैरान, परेशान और असहज देखा गया. दूसरी ओर, ऐसे कई परिवार पूर्ण शराबबंदी के फैसले के बाद खुशियों से झूम उठे, जो इस नशे के कारण कलह-कोहराम के पयार्य बन चुके थे. देशी के साथ ही विदेशी शराब पर भी रोक लग जाने से हजारों महिलाओं और बच्चों के कलेजे को ठंडक पहुंची.
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