छह साल पहले शुरू योजना अधर में

Updated at : 23 Dec 2015 6:04 AM (IST)
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छह साल पहले शुरू योजना अधर में

बहुग्रामीण जलापूर्ति योजना के तहत गंगा का पानी साफ कर इन चारों प्रखंडों को आर्सेनिक मुक्त पानी देने के लिए लगभग छह साल पहले यह योजना शुरू हुई. दो साल के भीतर यह काम पूरा हो जाना था. 2009 में कार्य शुरू हुआ और 2011 के अंत तक इसे पूरा कर लेने का लक्ष्य था. […]

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बहुग्रामीण जलापूर्ति योजना के तहत गंगा का पानी साफ कर इन चारों प्रखंडों को आर्सेनिक मुक्त पानी देने के लिए लगभग छह साल पहले यह योजना शुरू हुई. दो साल के भीतर यह काम पूरा हो जाना था. 2009 में कार्य शुरू हुआ और 2011 के अंत तक इसे पूरा कर लेने का लक्ष्य था. योजना की कार्य प्रगति बता रही है कि अगले दो साल में भी यह शायद ही पूरा हो.

प्रदूषित पानी के कारण लोग डायरिया, टॉयफायड एवं कृमि के अलावा कलरा, डिसेंट्री, जॉन्डिस जैसे खतरनाक रोग के शिकार हो रहे हैं. स्वच्छता की दुहाई देने वाला शासन-प्रशासन जब लोगों को पीने का शुद्ध पानी तक उपलब्ध कराने में असमर्थ है, तो स्वच्छ समाज और स्वस्थ समाज का मिशन कहां तक और कैसे पूरा होगा.

हाजीपुर : जिले की एक बड़ी आबादी आज भी शुद्ध पेयजल के लिए तरस रही है. आर्सेनिक युक्त पानी पीने की लाचारी हजारों लोगों को बीमार बना रही है. प्रदूषित पानी के कारण लोग डायरिया, टॉयफायड एवं कृमि के अलावा कलरा, डिसेंट्री, जॉन्डिस जैसे खतरनाक रोग के शिकार हो रहे हैं. स्वच्छता की दुहाई देने वाला शासन-प्रशासन जब लोगों को पीने का शुद्ध पानी तक उपलब्ध कराने में असमर्थ है तो स्वच्छ समाज और स्वस्थ समाज का मिशन कहां तक और कैसे पूरा होगा.
अधर में लटकी है बहुग्रामीण जलापूर्ति योजना : जिले के चार प्रखंडों हाजीपुर, बिदुपुर, देसरी एवं सहदेई बुजुर्ग की जनता को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए वाटर ट्रीटमेंट प्लान की शुरुआत की गयी थी. बहुग्रामीण जलापूर्ति योजना के तहत गंगा का पानी साफ कर इन चारों प्रखंडों को आर्सेनिक मुक्त पानी देने के लिए लगभग छह साल पहले यह योजना शुरू हुई. दो साल के भीतर पूरा हो जाना था. 2009 में कार्य शुरू हुआ और 2011 के अंत तक इसे पूरा कर लेने का लक्ष्य था. लेकिन कार्य प्रगति बता रही है कि अगले दो साल में भी यह शायद ही पूरा हो.
आर्सेनिक प्रभावित हैं जिले के 80 गांव : जिले के ये चारों प्रखंड आर्सेनिक प्रभावित माने जाते हैं. बहुग्रामीण जलापूर्ति योजना के पूरी हो जाने पर इन प्रखंडों के लगभग 80 गांवों को आर्सेनिक युक्त पानी से मुक्ति मिल सकती है, लेकिन यह मुक्ति कब मिलेगी, कहना मुश्किल है. 136 करोड़ 50 लाख की लागत से पूरी होने वाली इस योजना में 96 किलोमीटर में मेन पाइप तथा 400 किलोमीटर में ब्रांच पाइप बिछाये जाने हैं.
आर्सेनिक युक्त पानी का परिणाम घातक : आर्सेनिक पानी पीने का परिणाम प्रभावित क्षेत्रों के कई लोगों को भुगतान पड़ रहा है. विशेषज्ञ बताते हैं कि जिले में आर्सेनिकोसिस से ग्रस्त मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हुआ है. विशेषज्ञों का कहना है कि पानी के इस्तेमाल से शरीर में आर्सेनिक जमा होने के कारण शरीर पर सफेद या काले धब्बे उभर आते हैं. शरीर की त्वचा पर कड़े और खुरदरे चकत्ते बनना, हथेली एवं तलवे की चमड़ी का मोटा होना और उस पर गांठें पड़ना, सांस लेने में परेशानी एवं खांसी, कमजोरी, अंगुलियों एवं अंगूठे का सड़ जाना आर्सेनिकोसस के लक्षण हैं. इससे त्वचा, फेफड़े और मूत्राशय का कैंसर भी होता है.
क्या कहते हैं अधिकारी
शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए विभाग द्वारा कई स्तरों पर कार्य योजना बनायी गयी है. बहुग्रामीण जलापूर्ति योजना का कार्य प्रगति पर है. इसके शीघ्र पूरी हो जाने की उम्मीद है.
इ रामचंद्र प्रसाद, कार्यपालक अभियंता पीएचइडी
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