बरसात के दिनों में कमरों में फैल जाता है कीचड़

Updated at : 21 Jul 2017 9:03 AM (IST)
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बरसात के दिनों में कमरों में फैल जाता है कीचड़

उदासीनता . भवन व कमरों के अभाव में अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा स्कूल फर्श पर बैठ कर स्कूल के बच्चों को करनी पड़ती है पढ़ाई लालगंज नगर : लालगंज प्रखंड क्षेत्र के बसंता जहानाबाद स्थित राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय बलुआ बसंता स्कूल अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है.विद्यालय में भवन की कमी […]

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उदासीनता . भवन व कमरों के अभाव में अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा स्कूल

फर्श पर बैठ कर स्कूल के बच्चों को करनी पड़ती है पढ़ाई
लालगंज नगर : लालगंज प्रखंड क्षेत्र के बसंता जहानाबाद स्थित राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय बलुआ बसंता स्कूल अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है.विद्यालय में भवन की कमी महसूस की जा रही है. पुराने कर्कटनुमा व खपरापोष भवन में विद्यालय का संचालन होता है. पुराने भवन के अलावे नवनिर्मित भवन है जिसमें अष्टम वर्ग तक की कक्षाओं का संचालन होता है. नये भवन को छोड़कर पुराने दो कमरों में बरसात के दिनों में स्कूल के पुराने वाले भवन कमरों के बीच से पानी झरने की तरह गिरता रहता है. जिससे बच्चे बरसात के मौसम में स्कूल नहीं जाते है. विद्यालय के कमरों में कीचड़ जैसी स्थित बन जाती है.
और बच्चे के अनुपात में न डेस्क है न बेंच ही है. संसाधनों की घोर समस्या है. जिससे छात्र छात्राओं को मजबूरन नवनिर्मित भवन के फर्श पर बैठने को मजबूर हो जाते है. स्कूल के प्रधानाध्यापक ने इस संबंध में पूछे जानेपर उन्होंने बताया की स्कूल में संसाधन की कमी तो है ही, साथ में चहारदीवारी, चापाकल,और शौचालय,साफ सफाई का भी अभाव है.
स्कूल परिसर में आंगनबाड़ी केंद्र का होता है संचालन: स्कूल में कुल 258 बच्चे नामांकित हैं. कुल शिक्षक- शिक्षिकाएं स्कूल में 10 है. स्कूल में कुल कार्यरत शिक्षक-शिक्षिकाओं की संख्या आठ ही है. शिक्षक का कोई भी पद रिक्त नहीं है. स्कूल परिसर की कुल भूमि 20 डिसमिल है.
स्कूल परिसर में ही पूर्व से 6.30 डिसमिल में आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हो रहा है. जिसके कारण स्कूल के बच्चों के लिए पर्याप्त भूमि उपलब्ध नहीं है. 258 बच्चों के लिए स्कूल में कुल चार कमरे ही है. जब कमरों का अभाव महसूस किया जाता है तो बरामदे में बैठा कर बच्चों को पढ़ाया जाता है.
सरकारी निर्देशानुसार नहीं है कमरों की व्यवस्था :सरकार के निर्देशों के अनुसार प्रत्येक 30 बच्चों पर एक कमरा होना चाहिए. लेकिन मात्र दो कमरों में ही कक्षाओं का संचालन होता है. जिससे ज्यादा बच्चे स्कूल में संसाधन के अभाव में नहीं आते है. सबसे बड़ी बात तो यह है कि प्रधानाध्यापक कक्ष ही नहीं है. तो कभी बकरी , भैंस आदि बांधकर खलिहान बना देते है. इस संबंध में प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी को कई बार अवगत कराया गया, पर कोई कार्रवाई नहीं की गयी है.
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