किशनपुर (सुपौल) से जीवछ प्रसाद की रिपोर्ट.
Supaul News: रवि फसल के बेहतर उत्पादन और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से किशनपुर प्रखंड मुख्यालय स्थित ई-किसान भवन में एक दिवसीय कार्यशाला सह प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में कृषि, पशुपालन और सहकारिता विभाग के अधिकारियों ने किसानों को आधुनिक खेती, जैविक कृषि, उन्नत बीज और सरकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी. विशेषज्ञों ने किसानों से बदलते मौसम के अनुरूप खेती की तकनीक अपनाने की अपील की.
उन्नत खेती से बढ़ेगा उत्पादन
कार्यक्रम का उद्घाटन प्रखंड प्रमुख सुनीता कुमारी ने किया. इस दौरान अधिकारियों ने किसानों को बताया कि बेहतर उत्पादन के लिए आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक सलाह के अनुसार खेती करना जरूरी है.
अनुमंडल कृषि पदाधिकारी रामकुमार ने कहा कि क्षेत्र में धान, गेहूं, पाट और मूंग प्रमुख फसलें हैं. किसानों को मौसम और भूमि की स्थिति के अनुसार फसल का चयन करना चाहिए, जिससे उत्पादन और मुनाफा दोनों बढ़ सकें.
पुआल न जलाएं, पशुओं के चारे के रूप में करें उपयोग
प्रखंड पशुपालन पदाधिकारी डॉ. दिलीप कुमार ने किसानों से फसल अवशेष और पुआल नहीं जलाने की अपील की. उन्होंने कहा कि पुआल पशुओं के लिए उपयोगी चारा है और इससे किसानों को अतिरिक्त लाभ मिल सकता है.
उन्होंने बताया कि पशुओं से प्राप्त गोबर खेतों की उर्वरा शक्ति बढ़ाने में सहायक होता है. गोबर से तैयार कंपोस्ट खाद मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने के साथ-साथ उत्पादन बढ़ाने में भी मदद करती है.
बार-बार एक ही बीज का उपयोग नुकसानदायक
प्रखंड सहकारिता पदाधिकारी कमलेश कुमार राय ने किसानों को सरकार द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे उन्नत किस्म के बीजों का उपयोग करने की सलाह दी.
उन्होंने कहा कि लगातार एक ही किस्म के बीज का इस्तेमाल करने से उत्पादन क्षमता प्रभावित हो सकती है. इसलिए समय-समय पर बीज की किस्म बदलना आवश्यक है. उन्होंने किसानों को बिचौलियों के झांसे में नहीं आने और प्रमाणित स्रोतों से ही बीज खरीदने की सलाह दी.
जैविक खेती को बढ़ावा देने पर जोर
प्रखंड विकास पदाधिकारी पिंकी कुमारी ने कहा कि रासायनिक खादों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता लगातार प्रभावित हो रही है. इसके साथ ही स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी बढ़ रही हैं.
उन्होंने किसानों से जैविक खेती को अपनाने और जैविक खाद के उपयोग को प्राथमिकता देने की अपील की. प्रखंड कृषि पदाधिकारी प्रवीण कुमार ने भी कहा कि रासायनिक उर्वरकों का सीमित उपयोग करते हुए जैविक खाद का अधिक प्रयोग करना चाहिए. इससे भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है और टिकाऊ खेती को बढ़ावा मिलता है.
किसानों ने सीखी नई तकनीकें
कार्यशाला में कृषि समन्वयक धनंजय कुमार झा, किसान सलाहकारों और बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया. प्रशिक्षण के दौरान किसानों को नई कृषि तकनीकों, बेहतर फसल प्रबंधन और विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी दी गई.
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम किसानों को आधुनिक खेती की ओर प्रेरित करते हैं और कृषि क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.
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