पहले जुमे पर मसजिदों में उमड़े नमाजी

Published at :03 Jun 2017 8:32 AM (IST)
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पहले जुमे पर मसजिदों में उमड़े नमाजी

लोगों ने की खुदा की इबादत सीतामढ़ी : माह-ए-रमजान के पहले जुमे पर शुक्रवार को मसजिदों में रोजेदारों की भीड़ उमड़ पड़ी. बड़ी संख्या में मुसलिम समुदाय के लोगों ने मसजिदों में खुदा की इबादत की. वहीं, अल्लाह-ताला से रहमत मांगी. पहले जुमे पर नमाज को लेकर नमाजियों में उत्साह का माहौल दिखा. वहीं, मसजिदों […]

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लोगों ने की खुदा की इबादत
सीतामढ़ी : माह-ए-रमजान के पहले जुमे पर शुक्रवार को मसजिदों में रोजेदारों की भीड़ उमड़ पड़ी. बड़ी संख्या में मुसलिम समुदाय के लोगों ने मसजिदों में खुदा की इबादत की. वहीं, अल्लाह-ताला से रहमत मांगी.
पहले जुमे पर नमाज को लेकर नमाजियों में उत्साह का माहौल दिखा. वहीं, मसजिदों के आस-पास रौनकता रहीं. शहर के मेहसौल स्थित जामा मसजिद, राजोपट्टी, हुसैना, बड़ी मस्जिद, मोहनपुर, डुमरा के भीसा, बसतपुर, तलखापुर, मधुबन, मुरलिया चक व कपरौल समेत विभिन्न इलाकों में स्थित मसजिदों में लोगों ने नमाज अता कर खुदा की इबादत की.
बताते चलें कि रमजान का महीना मुसलिम समुदाय के लोगों के लिए पवित्र माना जाता हैं, यह इस्लामिक कैलेंडर के नौवें महीने में आता हैं. मुसलिम धर्म में चांद का अत्यधिक महत्व होता हैं, जो कि 30 या 29 दिन होता है. इस पाक महीने में एक रात शब-ए-कदर की रात आती है. मान्यता यह हैं कि इसी शब में अल्लाह ने “कुरान शरीफ” नवाज़ा था.
इसलिए इस महीने को पवित्र माना जाता हैं और अल्लाह के लिए रोजा अदा किया जाता है, जिसे मुसलिम परिवार का छोटे से बड़ा सदस्य पूरी शिद्दत से निभाता हैं. रमजान में रोजा रखा जाता है. जिसे अल्लाह की इबादत कहते हैं. रोज़ा करने के नियम होते हैं. सहरी के तहत सुबह सूरज निकलने के देढ़ घंटे पहले उठना होता हैं और कुछ खाने के बाद ही रोजा शुरू होता हैं. इसके बाद पूरा दिन कुछ नहीं खया या पिया जाता है. सूरज डूबने के बाद कुछ समय का अंतराल रखते हुए रोजा खोला जाता हैं. जिसका समय निश्चित होता है.
नमाज के बाद तरावीह की नमाज बीस रीकात अदा की जाती हैं, साथ ही मसजिदों में कंठष्य हाफिज द्वारा कुरान पढ़ी जाती हैं. ऐसा पूरे रमजान के दौरान होता हैं. चांद के अनुसार 29 या 30 दिन बाद ईद का जश्न मनाया जाता हैं. परिहार के हाफिज सफीउल्लाह नूरी के अनुसार रमजान का महिना बरकतों का महिना है. पूरे महीने खुदा की रहमत बरसती रहती है.
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