सौंधी महक बिखेर रहा गया का बना तिलकुट

Published at :02 Jan 2017 5:21 AM (IST)
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सौंधी महक बिखेर रहा गया का बना तिलकुट

मकर संक्रांति को लेकर शहर में बाजार गुलजार 25 वर्ष से स्वाद चख रहे जिले के लोग प्रति वर्ष 12 सौ क्विंटल का होती है तिलकुट की खपत गया, नवादा और बिहारशरीफ से पहुंचे हैं कारीगर सीतामढ़ी : गया का मशहूर तिलकुट शहर में सौंधी महक बिखेर रहा है. मकर संक्राति को भले हीं अभी […]

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मकर संक्रांति को लेकर शहर में बाजार गुलजार

25 वर्ष से स्वाद चख रहे जिले के लोग
प्रति वर्ष 12 सौ क्विंटल का होती है तिलकुट की खपत
गया, नवादा और बिहारशरीफ से पहुंचे हैं कारीगर
सीतामढ़ी : गया का मशहूर तिलकुट शहर में सौंधी महक बिखेर रहा है. मकर संक्राति को भले हीं अभी कुछ दिन बाकीं है, लेकिन दिसंबर माह के चढ़ने के साथ ही शहर में तिलकुट का बाजार गुलजार है. अगर आप इधर सामान्य दिनों में शहर के महंथ साह चौक से गुजरे तो तिलकुट की सौंधी महक आपको जरूर रूकने पर मजबूर कर सकती है.
उक्त चौक पर हीं तिलकुट की आधा दर्जन से अधिक दुकानें सजी हैं. पिछले 25 वर्षों से तिलकुट का कारोबार कर रहे गया निवासी राजेश्वर प्रसाद उर्फ मास्टर जी कहते हैं कि सीतामढ़ी जिले में गया का मशहूर तिलकुट अब नयी चीज नहीं रह गयी है. जब वह पहली बार अपना कारोबार लेकर यहां आये थे तो हर चीज उनके लिए नयी थी.
मां जानकी की जन्म स्थली पर कारोबार उनके लिए चुनौती बनी थी, तब तिलकुट का दाम 25 रुपये प्रति किलोग्राम था. दिन ब दिन बढ़ती मांग से गया का विख्यात सौगात यहां के लिए अब बहुत पुरानी हो चुकी है. युं तो मकर संक्रांति में तिलकुट की मांग बढ़ जाती है, लेकिन छठ पर्व के समापन के बाद से हीं जब शीत का मौसम अंगराईंया लेने लगती है, तब गया के कारीगर और कारोबारी शहर में दस्तक देना शुरू कर देते हैं. एक अनुमान के तौर पर जिले में तिलकुट की खपत 12 सौ क्विंटल से अधिक का है. इसके लिए एक दो कारोबारी वृहद् तौर पर तिलकुट निर्माण का कारखाना चलाते हैं, जिसमें प्रतिदिन कारीगर विभिन्न प्रकार के तिलकुट तैयार करते हैं.
नोटबंदी डाल रहा कारोबार पर असर:नोटबंदी भी तिलकुट कारोबार पर असर डाल रहा है. कारोबारी मास्टर जी कहते हैं कि नोटबंदी से कारोबार वर्तमान में प्रभावित हो रहा है. खुदरा तौर पर कुछ बिक्री हो जा रही है, लेकिन थोक में व्यापारियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. यहां बताते चले कि जिले के लगभग सभी प्रखंड मुख्यालयों के बाजार में शहर से तिलकुट की आपूर्ति की जाती है.
20 रुपये प्रति किलोग्राम तक बढ़ा तिल: तिलकुट के शौकीनों से लिए राहत की बात यह है कि इस बार इसके दाम में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है. हालांकि तिल के दाम में 15 से 20 रुपये तक की बढ़ोतरी हो चुकी है. मास्टर जी कहते हैं कि खास तौर से कानपुरी तिल का इस्तेमाल वह तिलकुट बनाने में करते हैं. कानपुरी तिल को स्वास्थ्य और स्वाद के दृष्टिकोण से उत्तम माना जाता है. कम चीनी व गुड़ युक्त तिलकुट के डिमांड को देखते हुए वह इसका खास ख्याल रखते हैं ताकि डायबीटिज के मरीज भी इसका आनंद ले सकते हैं.
विदेशों में भी है तिलकुट के दिवाने
गया का मशहूर तिलकुट के विदेश में भी लोग दिवाने हैं. सीतामढ़ी शहर से इसकी मांग नेपाल की राजधानी काठमांडू से लेकर सात समंदर पार लंदन तक होती है. लंदन और काठमांडू के अलावा विदेश में रहनेवाले लोग सीतामढ़ी में मौजूद अपने रिश्तेदारों के माध्यम से तिलकुट का स्वाद चखते हैं. कारोबारी राहुल राज कहते हैं कि प्राय: प्रति वर्ष खास तौर पर डिब्बाबंद तिलकुट का डिमांड रहता है. विदेश तथा दूसरे प्रदेश में रहनेवाले लोग अपने रिश्तेदारों अथवा मित्रों के माध्यम से मंगवाते है. वहां जानेवाले तिलकुट को विशेष पैकिंग कर दिया जाता है.
तिलकुट का वर्तमान मूल्य
(प्रति किलोग्राम)
गुड़ का तिलकुट 280
चीनी से बना तिलकुट 260
खोआ का तिलकुट 380
रेवड़ी 150
गुड़ तिलछड़ी 300
चीनी तिलछड़ी 275
स्पेशल गुड़ तिलकुट 300
स्पेशल चीनी तिलकुट 280
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