ठेकेदार नहीं लगाते जीपीएस
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :09 Oct 2016 4:43 AM (IST)
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लापरवाही. अनाज कालाबाजारी को ले प्रशासन नहीं है गंभीर मनमानी डोर स्टेप डिलेवरी के संवेदक नहीं अपनी डोर ढीला कर दिये हैं जिला प्रबंधक सीतामढ़ी : सरकारी खाद्यान्न की कालाबाजारी व गरीबों की हकमारी रोकने के लिए राज्य सरकार की स्तर से अब तक न जाने कितने ठोस कदम उठाये गये है, पर वह धरातल […]
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लापरवाही. अनाज कालाबाजारी को ले प्रशासन नहीं है गंभीर
मनमानी
डोर स्टेप डिलेवरी के संवेदक नहीं
अपनी डोर ढीला कर दिये हैं जिला प्रबंधक
सीतामढ़ी : सरकारी खाद्यान्न की कालाबाजारी व गरीबों की हकमारी रोकने के लिए राज्य सरकार की स्तर से अब तक न जाने कितने ठोस कदम उठाये गये है, पर वह धरातल पर लागू नहीं हो पा रहा है.
वहीं, खाद्यान्न के गोरख धंधे में शामिल माफिया सरकार व प्रशासन की कार्रवाई से बचने के लिए कोई न कोई पेंच निकाल लेते है. इसमें प्रशासन के भी कारिंदे उनकी मदद करते है.
यहीं कारण हैं कि न कल खाद्यान्न का अवैध कारोबार रूका था और न आज रूका हुआ है.
जानकारों की माने तो पहले की अपेक्षा अब और अधिक खाद्यान्न कालाबाजार में जा रहा है. धंधे में संबंधित लोग कैसे सफल हो जा रहे हैं, इसके कई कारण है. एक यह भी है कि डोर स्टेप डिलेवरी के ठेकेदारों को खाद्यान्न ढुलाई वाले अपने सभी वाहनों में जीपीएस सिस्टम लगाना है, लेकिन यह सिस्टम किस हद तक काम कर रहा है
, इससे नीचे से उपर तक के तमाम अधिकारी अवगत है. बावजूद डोर स्टेप के ठेकेदारों पर शिकंजा नहीं कसा जा रहा है. सूत्रों ने बताया कि एसएफसी के जिला प्रबंधक के स्तर से अपनी डोर ढिली कर दी गयी है. इसका भरपूर लाभ डोर स्टेप के संवेदक उठा रहे है.
नहीं होती है ठोस कार्रवाई : डोर स्टेप के वाहनों में जीपीएस सिस्टम नहीं लगाये जाने से संबंधित अब तक कई मामले सामने आ चुके है. फिर भी ठोस कार्रवाई नहीं की जा चुकी है. परसौनी प्रखंड के मदनपुर में खाद्यान्न लदा दो ट्रैक्टर जब्त किया गया था. दोनों में जीपीएस सिस्टम नहीं था. एक और ट्रैक्टर को पकड़ा गया था.
हालांकि कतिपय कराणों से थाना पर लाने के बाद परसौनी पुलिस ने उसे छोड़ दिया था. इस बाबत एएसपी डी अमरकेश ने संबंधित पुलिस अधिकारी से स्पष्टीकरण भी पूछा था. बता दें कि अगर टैक्टर में जीपीएस सिस्टम होता तो शायद ही संबंधित लोग खाद्यान्न की कालाबाजारी करने की हिम्मत करते. डोर ढिला रखने के कारण ही एक ओर जहां संवेदक बिना जीपीएस सिस्टम वाले वाहनों से खाद्यान्न की ढुलाई करते है तो दूसरी ओर खाद्यान्नको इधर-उधर करने में उन्हें सहूलियत होती है.
गत माह सोनबरसा प्रखंड के पकड़िया गांव में एसएसपी का खाद्यान्न लदे दो पिकअप को जब्त किया गया था. दोनों पिकअप डोर स्टेप के संवेदक लालबाबू साह का था. उक्त दोनों वाहनों में भी जीपीएस सिस्टम नहीं था. अगर यह सिस्टम लगा होता तो एसएफसी कार्यालय से ही यह जान लिया जाता कि एसएफसी गोदाम से निकला पिकअप किस रास्ते में और कहां पर है. मदनपुर मामले में ठोस कार्रवाई नहीं किये जाने से लालबाबू का हौसला बुलंद रहा और खाद्यान्न का अवैध कारोबार करता रहा. गनीमत रही कि प्रशासन को गुप्त सूचना मिल गयी और लालबाबू समेत कई लोग बेनकाब हो गये.
क्या है सरकार का आदेश
एसएफसी के प्रबंध निदेशक, जिला प्रबंधक को पत्र भेज खाद्यान्नढुलाई में प्रयुक्त वाहनों में जीपीएस एवं लोड शेड अनिवार्य रूप से लगवाने का निर्देश दे चुके है. बराबर जीपीएस ऑन रखने का आदेश है. बिना जीपीएस वाले वाहन से खाद्यान्न की ढुलाई करने पर रोक है. अगर संवेदक खाद्यान्न ढुलाई के दौरान वाहन का मार्ग बदलना चाहता है तो उसकी स्वीकृति डीएम से लेनी है.
प्रबंध निदेशक ने जारी पत्र में जिला प्रबंधक को कहा था कि खाद्यान्नयुक्त वाहनों के परिचालन के दौरान उक्त बिंदुओं में से कोई एक भी गड़बड़ी पायी जाये तो 24 घंटे के अंदर अपने मंतव्य के साथ जांच प्रतिवेदन मुख्यालय को भेंजे. ऐसा नहीं करने पर गड़बड़ी में संबंधित अधिकारी व कर्मियों की भी संलिप्तता मान कार्रवाई की जायेगी.
साथ हीं निगम को हुई क्षति को बाजार दर पर मूल्य निर्धारित कर परिवहन अभिकर्ता से सौ प्रतिशत एवं संबंधित अधिकारी व कर्मी के मानदेय से 10 प्रतिशत राशि वसूल करने के साथ ही एकरारनामा के प्रावधानों के आलोक में अलग से कार्रवाई की जायेगी.
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