चेतावनी . कार्रवाई हुई, तो तमाम क्लिनिक व नर्सिंग होम में लग जायेंगे ताले
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 18 Feb 2016 5:03 AM
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जांच से चिकित्सक सकते में फर्जी व अवैध चिकित्सकों तक ही रखा जाये जांच का दायरा : आइएमए सीतामढ़ी : शहर व डुमरा के चिकित्सकों के प्रमाण पत्रों की जांच चल रही है. अब तक कई चिकित्सक के क्लिनिक सील किये जा चुके हैं तो कई को जांच टीम द्वारा नोटिस भेजी गयी है. नोटिस […]
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जांच से चिकित्सक सकते में
फर्जी व अवैध चिकित्सकों तक ही रखा जाये जांच का दायरा : आइएमए
सीतामढ़ी : शहर व डुमरा के चिकित्सकों के प्रमाण पत्रों की जांच चल रही है. अब तक कई चिकित्सक के क्लिनिक सील किये जा चुके हैं तो कई को जांच टीम द्वारा नोटिस भेजी गयी है.
नोटिस के माध्यम से उन प्रमाण पत्रों के संबंध में जानकारी मांगी गयी है, जिसके आधार पर क्लिनिक व नर्सिंग होम का संचालन किया जाना है. जांच की इस कार्रवाई से बड़े-बड़े चिकित्सक भी परेशान होने लगे हैं.
जनता का करते हैं शोषण : जांच की कार्रवाई शुरू होने पर गत सात फरवरी को आइएमए की डुमरा शाखा की एक बैठक अध्यक्ष डाॅ आरएस शर्मा की अध्यक्षता में संपन्न हुई, जिसमें एलोपैथी चिकित्सा के नाम पर मरीजों का शोषण करने वालों के खिलाफ कार्रवाई पर सहमति जतायी गयी. हालांकि जांच टीम से यह आग्रह किया गया है कि जांच की यह कार्रवाई फर्जी चिकित्सकों तक ही सीमित रखा जाये.
हाईकोर्ट में लंबित है मामला : बैठक में लिये गये निर्णय व जांच के मामले पर किये गये विचार-विमर्श से जांच टीम के संयोजक सह सदर एसडीओ को अवगत कराया गया है. आइएमए की ओर से कहा गया है कि क्लिनिकल एक्ट के तहत निबंधन के मामले पर राष्ट्रीय स्तर पर पुनर्विचार किया जा रहा है. साथ हीं इससे संबंधित एक मामला हाई कोर्ट में लंबित है.
योग्यता की जांच पर आपत्ति नहीं
आइएमए अध्यक्ष डाॅ शर्मा ने एसडीओ को बताया है कि भारतीय चिकित्सा संघ द्वारा सदस्यों को राय दी गयी है कि अंतिम निर्णय तक वे प्रतीक्षा करें. एसडीओ को जानकारी दी गयी है कि निबंधन अथवा शैक्षणिक योग्यता प्रमाण पत्र की जांच पर संघ को कोई आपत्ति नहीं है.
यह भी बताया गया है कि एक्ट का शत-प्रतिशत पालन कराये जाने पर अधिकांश क्लिनिक बंद हो जायेंगे.
चिकित्सक की छवि पर असर : आइएमए ने एसडीओ को बताया है कि वर्तमान में चल रही जांच प्रक्रिया से ऐसा प्रतीत होता है कि किसी गैर कानूनी काम के लिए छापामारी की जा रही है. इससे प्रतिष्ठित व योग्य चिकित्सकों की प्रतिष्ठा पर आंच आ जाती है और आम लोगों में तरह-तरह का भ्रम पैदा हो जाता है.
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