जगह-जगह बांध जजर्र, विभाग मौन
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पुपरी : बरसात के समय नेपाल की ओर से आने वाले पानी से क्षेत्र में हमेशा बाढ़ आता रहता है. बाढ़ से फसलों की बरबादी एवं जान-माल की हानी होती रहती है, पर इससे बचाव के लिए अब तक कोई कारगर पहल नहीं हो पायी है. नदियों के बांधों की हालत काफी दयनीय हो चुकी […]
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पुपरी : बरसात के समय नेपाल की ओर से आने वाले पानी से क्षेत्र में हमेशा बाढ़ आता रहता है. बाढ़ से फसलों की बरबादी एवं जान-माल की हानी होती रहती है, पर इससे बचाव के लिए अब तक कोई कारगर पहल नहीं हो पायी है. नदियों के बांधों की हालत काफी दयनीय हो चुकी चुकी है. नदी में जल उफान आते हीं तटबंध पर दबाव बनना एवं बाढ़ आना तय माना जा रहा है.
तबाही का पर्याय बनी नदी
स्थानीय लोग बताते हैं कि अनुमंडल क्षेत्र से गुजरने वाली बुढ़नद, अधवारा, रातो व मरहा नदी तबाही का पर्याय बनी हुई है. जजर्र बाध की मरम्मत नहीं होने से लोग काफी चिंतित है, पर समय से पूर्व इस ओर न प्रशासन का ध्यान जा रहा है और न किसी जनप्रतिनिधियों का.
यहां बता दें कि पूर्व में बुढ़नद नदी में उफान आने से कई बार आवापुर, पचासी, रामखेतारी गांव के समीप बांध टूटने से कई बात लोगों को भारी तबाही का सामना करना पड़ चुका है. उन जगहों पर बांध के मरम्मत के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति कर छोड़ दिया गया है.
अनुमान लगाया जा रहा है कि पुन: बाढ़ आने पर उन स्थलों से फिर पानी अंदर घुसेगा और लोगों को तबाही का सामना करना पड़ेगा. इधर, अधवारा नदी का बांध परसौनी गांव के समीप जजर्र हो चुकी है. मरहा नदी का बांध थलही व भकुरहर गांव के समीप काफी कमजोर हो चुका है, अगर इन स्थलों पर ठीक ढ़ंग से बांध का मरम्मत नहीं कराया गया तो भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है.
दृश्य याद कर सहम जाते हैं लोग
धरमपुर निवासी सुरेश चौधरी, जितेंद्र चौधरी, रणधीर चौधरी, भोगेंद्र चौधरी समेत अन्य ने बताया कि समय रहते किसी का ध्यान नहीं जाता है. परेशानी आम जनता को होती है.
पूर्व में आये बाढ़ के दृश्य को याद कर लोग सहम जाते हैं, पर इस दिशा में न कोई जनप्रतिनिधि गंभीर है और न हीं विभाग.
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