सत्संग से विवेक प्राप्त कर सदुपयोग करें : मोरारी बापू

सीतामढ़ी : सत्संग से विवेक प्राप्त कर उसका सदुपयोग करें, परिस्थिति को कभी भी बदला नहीं जा सकता है. जैसे रात को दिन में और दिन को रात में नहीं बदला जा सकता. इसलिए विवेक का सदुपयोग करना सीख लें. लेकिन, विवेक मिलेगा सत्संग से. सत्संग का मतलब कथा सुनने से ही नहीं है, बल्कि […]
सीतामढ़ी : सत्संग से विवेक प्राप्त कर उसका सदुपयोग करें, परिस्थिति को कभी भी बदला नहीं जा सकता है. जैसे रात को दिन में और दिन को रात में नहीं बदला जा सकता. इसलिए विवेक का सदुपयोग करना सीख लें. लेकिन, विवेक मिलेगा सत्संग से. सत्संग का मतलब कथा सुनने से ही नहीं है, बल्कि सत्य का संग करने से है. रामकथा परम सत्य है. आज कल के कुछ लेखकों ने हमारे शास्त्रों पर अभद्र टिप्पणियां की हैं. उपन्यास लिखना अच्छी बात है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि शास्त्रों पर टिप्पणियां की जाये. जिनके आदर्श पर हम जीना सीख रहे हैं, उसी पर कुठाराघात सिर्फ पैसे कमाने और अवार्ड पाने के लिये किया जाये. उक्त बातें स्थानीय मिथिला धाम में आयोजित रामकथा के पांचवें दिन विश्व प्रसिद्ध कथावाचक मोरारी बापू ने कही.
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