कई बांग्लादेशी बने फर्जी वोटर
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :16 Jan 2016 12:29 AM (IST)
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खुलासा. विभिन्न इलाकों में हैं सैकड़ों बांग्लादेशी, फेरी लगा बेचते हैं सामान बांग्लादेशी अपराधियों की गिरफ्तारी से प्रशासन सजग बाल के बदले देते हैं सोनपापड़ी छपरा (सारण) : चोरी-डकैती के मामलों में बांग्लादेशी अपराधियों की गिरफ्तारी ने पुलिस प्रशासन के कान खड़े कर दिये हैं. जिले के विभिन्न क्षेत्रों में किराये के मकान में सैकड़ों […]
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खुलासा. विभिन्न इलाकों में हैं सैकड़ों बांग्लादेशी, फेरी लगा बेचते हैं सामान
बांग्लादेशी अपराधियों की गिरफ्तारी से प्रशासन सजग
बाल के बदले देते हैं सोनपापड़ी
छपरा (सारण) : चोरी-डकैती के मामलों में बांग्लादेशी अपराधियों की गिरफ्तारी ने पुलिस प्रशासन के कान खड़े कर दिये हैं. जिले के विभिन्न क्षेत्रों में किराये के मकान में सैकड़ों की संख्या में बांग्लादेशी रह रहे हैं और फेरी लगा कर सामान बेचने का कार्य कर रहे हैं. फेरी लगा कर सामान बेचने की आड़ में बांग्लादेशियों द्वारा अपराधकर्म की घटनाओं को अंजाम देने का मामला पहली बार सामने आया है.
तीन दिनों पहले सीवान में पांच बांग्लादेशियों समेत 12 अपराधियों को पकड़ा गया. पकड़े गये अपराधियों ने पुलिस के समक्ष स्वीकार किया कि सारण, सीवान, गोपालगंज तथा वैशाली जिलों में वे चोरी-डकैती की घटनाओं को अंजाम देते थे. पकड़े गये पांचों अपराधी सीवान शहर के सराय मुहल्ले में किराये के मकान में रहते थे.
पुनरीक्षण में हुआ खुलासा : किराये के मकान में रहकर फेरी लगाकर सामान बेचनेवाले कई बांग्लादेशी मतदाता भी बन चुके हैं. इसका खुलासा मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान हुआ.
रसूलपुर पंचायत में दर्जनों बांग्लादेशी लोगों का नाम जोड़ा पाया गया है. वह भी बेघर बार लोगों का नाम. मजे की बात यह है कि जिस मकान में वह किरायेदार हैं, उसमें नाम नहीं जुड़ा है, दूसरे मकानों में रहनेवाले बता कर नाम जोड़ा गया है.
इस तरह हुआ खुलासा : बूथ लेवल ऑफिसर ने जब मतदाता सूची पुनरीक्षण के दौरान घर-घर जाकर सत्यापन किया, तो इसका खुलासा हुआ. वैसे इसमें सरकारी कर्मचारियों-पदाधिकारियों की भूमिका पर भी संदेह व्यक्त किया जा रहा है.
रसूलपुर में रहते हैं 100 से अधिक बांग्लादेशी
जिले के रसूलपुर थाना क्षेत्र के रसूलपुर बाजार पर किराये के मकानों में 100 से अधिक बंगलादेशी तीन-चार वर्षों से रहते हैं और ग्रामीण इलाकों में फेरी लगा कर सोनपापड़ी के बदले केश लेते हैं. महिलाओं द्वारा संवारते समय टूटे हुए बाल लेते हैं और बच्चों को बदले में सोनपापड़ी देते हैं.
संवारते समय टूटे हुए बाल को महिलाएं जमा कर रखती हैं और बांग्लादेशी फेरीवाले साइकिल से डुगडुगी बजाते हुए जैसे ही पहुंचते हैं, बच्चे केश लेकर उन तक आते हैं. टूटा हुआ बाल देकर सोनपापड़ी लेते हैं. रसूलपुर के अलावा दरियापुर, मकेर, तरैया, परसा समेत अन्य स्थानों पर भी दर्जनों की संख्या में बंगलादेशी रह रहे हैं, जो यही काम करते हैं. इस घटना के बाद अब इन पर इसकी आड़ को अापराधिक घटनाओं को अंजाम देने की आशंका व्यक्त की जा रही है.
क्या कहते हैं बीडीओ
इसकी जांच करायी जायेगी और वैसे लोगों का नाम सूची से हटाया जायेगा जो गलत ढंग से जोड़ा गया है. जांच के बाद ही सही बात सामने आयेगी और नियमानुसार कार्रवाई की जायेगी.
अखिलेश कुमार
प्रखंड विकास पदाधिकारी, एकमा, सारण
क्या कहते हैं थानाध्यक्ष
रसूलपुर में बाहरी लोगों के रहने की पहले से कोई सूचना नहीं है, लेकिन मकान मालिकों को किरायेदारों के चरित्र का सत्यापन कराने का निर्देश दिया गया है. किरायेदारों के गलत कार्य में पकड़े जाने पर मकान मालिकों के खिलाफ भी कार्रवाई की जायेगी.
मनोज कुमार प्रसाद, थानाध्यक्ष, रसूलपुर
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