आधुनिक सुविधाओं से युक्त मॉडल जैसे दिखेंगे स्कूल

Updated at : 18 Apr 2024 10:26 PM (IST)
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आधुनिक सुविधाओं से युक्त मॉडल जैसे दिखेंगे स्कूल

समस्तीपुर : अब शहरी क्षेत्र के मिडिल व उच्च विद्यालय भी निजी विद्यालयों की तरह आधुनिक सुविधाओं से युक्त मॉडल दिखेंगे.

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समस्तीपुर : अब शहरी क्षेत्र के मिडिल व उच्च विद्यालय भी निजी विद्यालयों की तरह आधुनिक सुविधाओं से युक्त मॉडल दिखेंगे. सरकारी विद्यालयों में गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा के लिए बीपीएससी से ट्रेंड शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति के बाद शिक्षा विभाग अब पहले चरण में शहर के सभी मिडिल व उच्च विद्यालयों को भी मॉडल बनाने में जुटा है. ताकि समाज में एक स्वस्थ संदेश दिया जा सके. जिला शिक्षा कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव केके पाठक के साथ जिला शिक्षा पदाधिकारी की वीसी के माध्यम से हुई बैठक में इस संदर्भ में दिये गये निर्देश के बाद कार्य आरंभ कर दिया गया है. जिला स्तरीय अधिकारी स्वयं सारे कार्यों की मॉनिटरिंग कर रहे हैं. बताया जा रहा कि शहर के मध्य व उच्च विद्यालयों को निजी विद्यालय की तरह मॉडल बनाने का मुख्य उद्देश्य समाज को यह संदेश देना है कि पढ़ाई समेत किसी भी मामले में अब सरकारी विद्यालय भी निजी विद्यालय से पीछे नहीं है. साथ ही अभिभावकों को अपने बच्चों का नामांकन सरकारी विद्यालयों में कराने के प्रति प्रेरित करना भी है. बहरहाल, इसके तहत शहर के कई स्कूलों को मॉडल बनाने का कार्य तेजी से चल रहा है. इस संदर्भ में विभागीय स्तर पर मिले निर्देश के अनुसार, शहर स्थित सरकारी उच्च व मध्य विद्यालयों में छात्र-छात्राओं के पढ़ने वाले वर्ग कक्ष में पंखे लगाए जा रहे हैं. स्मार्ट क्लास व कम्प्यूटर क्लास को अत्याधुनिक किया जा रहा है. इसके साथ ही विद्यालयों के वर्ग कक्ष में टाइल्स लगाये जा रहे हैं. शौचालय, साफ-सफाई व पेयजल की व्यवस्था को दुरुस्त करते के साथ वर्ग कक्ष के चौखट-दरवाजे को दुरुस्त कर भवन समेत खिड़की दरवाजे की रंगाई-पुताई की जा रही है. पेयजल की व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए सभी विद्यालयों में समरसेबल लगाया जा रहा है. शहर के मिडिल व उच्च विद्यालयों को निजी विद्यालय की तरह मॉडल व अत्याधुनिक बनाने के क्रम में शहर के संबंधित विद्यालयों में साइन बोर्ड लगाये जा रहे हैं, जहां रात में विद्यालयों का नाम रौशनी में दिखेगा. विद्यालयों में आवश्यकतानुसार, बैट्री, इन्वर्टर व जेनरेटर लगाये जायेंगे. डीईओ कामेश्वर प्रसाद गुप्ता ने बताया कि मिडिल व उच्च विद्यालयों में 2020 के बाद डिप्टेशन पर रहे शिक्षकों की जगह अब बीपीएससी के माध्यम से अध्यापक भर्ती परीक्षा के पहले व दूसरे चरण में योग्य शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति कर दी गई है. शिक्षकों की कमी अब नहीं है, पंचायत के विद्यालयों में ही नौवीं क्लास में नामांकन लेना है. विशेष परिस्थिति में या पंचायत के हाई स्कूल की दूरी हो व दूसरे पंचायत का विद्यालय अधिक नजदीक हो तो बीईओ से अनुशंसा कराकर डीईओ को भेजेंगे, ताकि विशेष स्थिति को ध्यान में रखते हुए नामांकन की अनुमति दी जाये.

दस विद्यालयों का निरीक्षण कर वाट्सएप पर करना होगा अपलोड

जिले के सरकारी विद्यालयों का निरीक्षण करने वाले निरीक्षणकर्ताओं को अब प्रखंड या अनुमंडल मुख्यालय में अपना आवास रखना होगा. प्रखंडों में पदस्थापित पदाधिकारी एवं कर्मी को निर्देश दिया गया है कि अपने प्रखंड या अनुमंडल मुख्यालय में अपना आवास 48 घंटे के अंदर लेना सुनिश्चित करें. आवासन की पूरी व्यवस्था रखेंगे और इसकी रिपोर्ट जिला शिक्षा पदाधिकारी भेजेंगे. शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव के निर्देश पर जिला शिक्षा पदाधिकारी ने संबंधित सभी पदाधिकारियों और कर्मियों को पत्र लिखा है. जिला में विद्यालयों के लिए निरीक्षणकर्ताओं की संख्या निर्धारित है. निरीक्षणकर्ताओं को प्रत्येक कार्य दिवस को कम से कम 10 विद्यालयों का निरीक्षण करना और उसकी फोटो लेकर व्हाटसएप ग्रुप पर भेजना है. मौजूदा व्यवस्था के तहत ऐसा नहीं हो पा रहा है. सभी निरीक्षणकर्ता द्वारा दस विद्यालयों के निरीक्षण करने का कार्य पूरा नहीं हो पा रहा है. विभाग को सूचना मिली है कि प्रखंड में पदस्थापित अधिकतर पदाधिकारी एवं कर्मी जिला मुख्यालय में आवास करते हैं. इस वजह से तय समय सीमा के अंदर निरीक्षण नहीं कर पाते हैं. जिला शिक्षा पदाधिकारी ने बताया कि सभी संबंधित पदाधिकारी और कर्मियों को पत्र लिखकर सूचना दे दी गई है.

पंचायतों के दो स्कूलों में होगी लाइब्रेरी

जिले की सभी पंचायतों के एक-एक उच्च विद्यालय और एक-एक मध्य विद्यालय में छात्रों की सुविधा के लिए लाइब्रेरी का निर्माण किया जायेगा. इसमें कोर्स की किताबों के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षाओं, साइंस और जनरल नॉलेज की पुस्तकें और मैग्जीन भी उपलब्ध रहेंगी. सत्र 2024-25 से स्कूलों में बढ़ने वाली छात्रों की संख्या को ध्यान में रखते हुए शिक्षा विभाग की ओर से यह निर्णय लिया गया है. पुस्तकालय का निर्माण सघन बस्ती वाले स्कूलों किया जायेगा.

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