प्राकृतिक आपदा से निबटने के लिए नहीं है ठोस योजना
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 30 Apr 2015 12:27 AM
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शहर में बन रहे अधिकतर मकानों के निर्माण में नहीं हो रहा भूकंपरोधी तकनीक का इस्तेमाल समस्तीपुर : प्राकृतिक आपदाओं के मद्देनजर नेपाल से करीब होने के कारण समस्तीपुर काफी संवेदनशील जिला माना जाता है. यह सेस्मिक जोन चार में आता है, जो भूकंप के लिहाज से काफी खतरनाक है़ जिले में तूफान के कारण […]
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शहर में बन रहे अधिकतर मकानों के निर्माण में नहीं हो रहा भूकंपरोधी तकनीक का इस्तेमाल
समस्तीपुर : प्राकृतिक आपदाओं के मद्देनजर नेपाल से करीब होने के कारण समस्तीपुर काफी संवेदनशील जिला माना जाता है.
यह सेस्मिक जोन चार में आता है, जो भूकंप के लिहाज से काफी खतरनाक है़ जिले में तूफान के कारण भी क्षति हुई है़ जिसका सही आकलन अबतक पूरा नहीं हो पाया है़ लेकिन आपदा से निबटने की पुख्ता तैयारी यहां अबतक नहीं हो पायी है़ वहीं शहर में बन रहे बहुमंजिला इमारतों में भी सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जा रही है.
लगातार आ रहे भूकंप के झटके के कारण कई मकानों में दरारें पर चुकी है़ तो कई के नींव हिल चुके हैं अधिकांश मकानों में भूकंप रोधी तकनीक का प्रयोग नहीं किया गया है़
वहीं कई बहुमंजिला इमारत नप के मानकों के विपरीत बनाया गया है़ ऐसे में भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदा के समय जानमाल की क्षति होने की संभावना काफी बढ़ जाती है़
शहर में बनने वाली इमारत नियम कानून को ताक पर रख कर बनायी जा रही है़ बिना नक्शा पास कराए और विशेषज्ञ इंजीनियर की सलाह लिए बड़ी बड़ी इमारतें हाल के दिनों में खड़ी की गयी है़ तंग सड़कों के किनारे बने इन इमारतों में रहने वाले लोगों को भूकंप जैसी आपदा के समय रेसक्यू करना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन भी साबित होगा़
वहीं शहर के सरकारी अस्पतालों में पहले से ही चिकित्सकों की कमी बनी हुयी है़ और अस्पतालों में संसाधनों का अभाव है़
ऐसी स्थिति में किसी बड़ी आपदा के समय लोगों की हिफाजत करना मुश्किल है़ आपदा आने के बाद प्रशासन की भूमिका अनुदान और मुआवजा देने भर तक की रह गयी है, लेकिन इसको लेकर पूर्व से किसी तरह की तैयारी अभी तक नहीं की जा सकी है़ धरती के अंदर तापमान के दबाव व हलचलों के कारण जहां लगातार भूकंप का खतरा बढ़ रहा है़
वहीं आपदा प्रबंधन के पास जिले के 381 पंचायतों के लिए आपदा से निपटने की अलग से कोई योजना ही नहीं है, जबकि आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 के सेक्शन 31 के तहत हर जिले की आपदा से निपटने के लिए अलग से योजना बनायी जानी चाहिए़
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