बदलेगा जॉब कार्ड, हर पखवारे होगा सत्यापन

Published at :23 May 2018 4:57 AM (IST)
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बदलेगा जॉब कार्ड, हर पखवारे होगा सत्यापन

समस्तीपुर : मनरेगा योजनांतर्गत अकुशल शारीरिक श्रम के लिए इच्छुक परिवारों को एक सौ दिन का रोजगार प्राप्त करना कार्डधारी का अधिकार होता है. लेकिन प्रशासनिक विफलता के कारण यह धरातल पर लागू नहीं हो पाता. मजदूरों का जॉब कार्ड पंचायत प्रतिनिधि व रोजगार सेवक अपने पास रखकर मजदूरी दिये जाने की कागजी खानापूरी करते […]

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समस्तीपुर : मनरेगा योजनांतर्गत अकुशल शारीरिक श्रम के लिए इच्छुक परिवारों को एक सौ दिन का रोजगार प्राप्त करना कार्डधारी का अधिकार होता है. लेकिन प्रशासनिक विफलता के कारण यह धरातल पर लागू नहीं हो पाता. मजदूरों का जॉब कार्ड पंचायत प्रतिनिधि व रोजगार सेवक अपने पास रखकर मजदूरी दिये जाने की कागजी खानापूरी करते हैं. अब यह व्यवस्था पूरी तरह समाप्त हो जायेगी. सरकार ने वर्ष 2013-14 में बने जॉब कार्ड को निरस्त कर मजदूरों के लिए एक समान नया जॉब कार्ड निर्गत करने का निर्णय लिया है. इसके आलोक में तैयारी प्रारंभ हो गयी है. मजदूरों को नियमित कामकाज उपलब्ध कराने, काम के प्रति

मजदूरों की घट रही सूची व काम नहीं मिलने के कारणों को जानने के लिए विभाग ने हर महीने दो बार जॉब कार्ड के सत्यापन की योजना बनायी है. पंचायत रोजगार सेवक माह में दो बार (पाक्षिक) कार्यरत मजदूरों के जॉब कार्ड को अद्यतन करेंगे. प्रखंड स्तर पर कार्यक्रम पदाधिकारी एक अनुश्रवण टीम का गठन कर नियत अवधि पर पंचायतों में जाकर जॉब कार्ड के अद्यतीकरण की स्थिति की जांच करेगा. जांच कर मासिक प्रतिवेदन कार्यक्रम पदाधिकारी को समर्पित करेंगे.
कार्यक्रम पदाधिकारी प्रत्येक माह पंचायतवार निरीक्षण किये गये जॉब कार्ड की संख्या का प्रतिवेदन उप विकास आयुक्त को समर्पित करेंगे. मनरेगा रोजगार दिवस निरीक्षण के दौरान वरीय उप समाहर्ता अथवा जिलास्तरीय किसी अन्य पदाधिकारी जॉब कार्ड की अवस्था एवं उसके अद्यतीकरण की स्थिति की जांच करेंगे. उप विकास आयुक्त इसका निरंतर अनुश्रवण करेंगे.
सूची से हटेगा अयोग्य परिवारों का नाम
आवास योजना के नाम पर पानी की तरह पैसा बहाये जाने के बाद भी बड़ी संख्या में गरीब लोग आवास की सुविधा से वंचित हैं. हर वर्ष करोड़ों खर्च होने के बाद भी लाभुकों की सूची में अनवरत इजाफा होता जा रहा है. इस समस्या के समाधान के लिए ग्रामीण विकास विभाग ने ठोस कदम उठाया है. विभाग के सचिव ने जिला पदाधिकारी को पत्र भेजकर प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण की स्थायी सूची की जांच कराकर अयोग्य परिवारों का नाम विलोपित करने का निर्देश दिया है.
विभाग का मानना है कि स्थायी सूची में अयोग्य परिवारों का नाम शामिल रहने के कारण पात्र लाभुकों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही है. इससे लक्ष्य के आलोक में आवास स्वीकृति प्रदान करने में कठिनाई आ रही है. इसके कारण भारत सरकार ग्रामीण विकास मंत्रालय ने स्थायी प्रतीक्षा से अयोग्य परिवारों का नाम विलोपित करने का निर्णय लिया है. ग्रामीण विकास विभाग ने बीडीओ को 13 बिंदुओं पर जांच कर विलोपन के लिए अनुशंसा भेजने का निर्देश दिया गया है.
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