गेहूं की बुआई शुरू, 60 हजार हेक्टेयर में होगी खेती

Published at :07 Nov 2017 2:16 AM (IST)
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गेहूं की बुआई शुरू, 60 हजार हेक्टेयर में होगी खेती

समस्तीपुर : जिले में गेहूं की अगेती बुआई शुरू हो चुकी है. इस बार जिला कृषि विभाग समस्तीपुर ने रबी फसल अंतर्गत गेहूं की खेती के लिये 60 हजार हेक्टेयर में आच्छादन का लक्ष्य रखा है. इसे पूरा करने के निर्देश डीएओ चंद्रशेखर सिंह ने सभी बीएओ को दिये हैं. जानकारी के अनुसार, बाढ़ पीड़ित […]

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समस्तीपुर : जिले में गेहूं की अगेती बुआई शुरू हो चुकी है. इस बार जिला कृषि विभाग समस्तीपुर ने रबी फसल अंतर्गत गेहूं की खेती के लिये 60 हजार हेक्टेयर में आच्छादन का लक्ष्य रखा है. इसे पूरा करने के निर्देश डीएओ चंद्रशेखर सिंह ने सभी बीएओ को दिये हैं. जानकारी के अनुसार, बाढ़ पीड़ित इलाकों में किसानों ने अगेती खेती शुरू की है.

गेहूं की बुआई अभी डेढ़ महीने तक तीन चरणों में होगी. एक से 15 नवंबर तक बुआई का समय है, जबकि 15 से 30 नवंबर तक समय से बुआई एवं एक से 15 दिसंबर तक लेट बुआई गेहूं की इस बार होगी. सीमीट वैज्ञानिक डॉ पंकज कुमार ने बताया कि समय से बुआई के लिए एचडी 2967, 2733, 2824, पीडब्ल्यू 343, 502 बीज का इस्तेमाल बेहतर उत्पादन के लिये कर सकते हैं, जबकि लेट बुआई में एचआइ 1563, डीबीडब्ल्यू 16, एचडी 2985 बीज की बुआई कर सकते हैं.

अगेती व समय से बुआई के लिए बीज दर एक क्विंटल प्रति हेक्टेयर व लेट बुआई के लिए एक क्विंटल 25 किलो प्रति हेक्टेयर है. वहीं जो किसान अभी धान की खेती किये थे. खेत में लगे जंगल को खत्म करने के लिये राउंड अप का इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके दो दिनों के बाद खेत गेहूं की बुआई के सही होगी.

पूसा, जितवारपुर व कल्याणपुर प्रखंड के किसानों को राहत : तीन प्रखंडों पूसा, जितवारपुर व कल्याणपुर प्रखंड के किसानों को इस बार गेहूं की खेती करने में काफी सहूलियत होगी. उन्हें खेतों में पोटैशियम नहीं डालना पड़ेगा. सहगल फाउंडेशन की ओर से इन तीनों प्रखंडों के 19 गांवों के 41 किसानों के खेतों से ली गयी मिट्टी की जांच रिपोर्ट में यह बात सामने आयी है.
जांच रिपोर्ट में पोटैशियम की अधिक मात्रा मिली है. यह जांच ढोली के मृदा विज्ञान केंद्र में करायी गयी है. फाउंडेशन के कौशल कृषक परियोजना के कार्यक्रम समन्वयक शेषनारायण सिंह ने बताया कि मिट्टी जांच के बाद ही आवश्यकतानुसार ही खेतों में उर्वरक का प्रयोग करें. इससे फसल की पैदावार बढ़ने के साथ ही मिट्टी कर उर्वरा शक्ति भी बरकरार रहती है.
इस बार जीरो टीलेज गेहूं की खेती करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है. इसमें किसानों को खेत जोतने की जरूरत नहीं पड़ती. वहीं उत्पादन पर भी कोई असर नहीं पड़ता. इसके लिए व्यापक प्रचार-प्रसार किये जा रहे हैं.
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