पुत्र व पुत्रवधुओं ने वृद्ध माता-पिता को घर से निकाला
Author Prabhat khabar digital desk
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सोनवर्षा (सहरसा) : हाल ही में सूबे की सरकार ने एलान किया था जो अपने माता-पिता के साथ गलत व्यवहार करेगा, उसकी जगह को जेल में होगी. साथ ही उसे इस अपराध के लिए जुर्माना भी देना होगा. सरकार की इस घोषणा से पीड़ित माता-पिता को संबल मिलने लगा और वे पुत्र प्रताड़ना के विरोध […]
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सोनवर्षा (सहरसा) : हाल ही में सूबे की सरकार ने एलान किया था जो अपने माता-पिता के साथ गलत व्यवहार करेगा, उसकी जगह को जेल में होगी. साथ ही उसे इस अपराध के लिए जुर्माना भी देना होगा. सरकार की इस घोषणा से पीड़ित माता-पिता को संबल मिलने लगा और वे पुत्र प्रताड़ना के विरोध में मुखर होने लगे. जिले के सोनवर्षा प्रखंड के शाहपुर गांव में ऐसे ही माता-पिता सामने आये हैं.
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जिन्हें उनके दो-दो पुत्रों ने उन्हें घर से निकाल बाहर कर दिया है. अपना घर रहते उन्हें पड़ोस में रहकर जीवन गुजर-बसर करना पड़ रहा है. उन्होंने थानाध्यक्ष को आवेदन देकर पुत्र व पुत्रवधुओं पर मारपीट व प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है.
24 घंटे में कार्रवाई की कही गयी थी बात: शाहपुर के हरेकृष्ण सिंह ने पुलिस को आवेदन देकर बताया है कि उनका पुत्र भवेश कुमार एवं मनोज कुमार उर्फ अंजेश कुमार उनके साथ मारपीट करता रहता है. जबकि पुत्रों की इस हरकत पर ग्रामीण स्तर से कई बार पंचायत भी हुआ. लेकिन दोनों में कोई भी पुत्र पंचायत के फैसले को मानने को तैयार नहीं हैं. पंचायत के लोगों के कहने पर नौ जून को थाने में आवेदन दिया. लेकिन थानाध्यक्ष ने कोई कार्रवाई नहीं की.
14 जून को थानाध्यक्ष को दोबारा आवेदन देकर बताया कि दोनों पुत्र एवं पतोहू उनके साथ बराबर मारपीट करते हैं और सबों ने मिल घर से भी बेदखल कर दिया है. तबसे हम अपने पड़ोसी पप्पू सिंह के यहां रहकर दोनों पति पत्नी किसी तरह गुजारा कर रहे हैं. पीड़ित आवेदक ने कहा कि थानाध्यक्ष ने आवेदन देने के बाद कार्रवाई करने की बजाय उन्हें अपने घर नहीं जाने की सलाह दी और पड़ोसी के यहां ही रहकर गुजर बसर करने की बात कही.
एक तरफ सरकार ने बूढ़े मां बाप की सेवा नहीं करने वाले पुत्र को उनका नैतिक कर्तव्य सिखाने के लिए अनिवार्य व कठोर कानून बनाये. साथ ही 24 घंटे में आवेदन पर कार्रवाई करने का एलान किया. लेकिन सोनवर्षा थानाध्यक्ष ने पीड़ित बूढे मां-बाप के द्वारा दो-दो बार आवेदन देने के बावजूद भी मामला दर्ज नहीं किया गया.
बच्चों को जन्म देने और पाल पोस कर काबिल बनाने के बाद बुढ़ापे में यह दिन देखना होगा, हरेकृष्ण सिंह ने सोचा भी न था. जब सरकार ने घोषणा कर उम्मीद की किरण दिखाई तो सरकार के ही पहरुए ही बाधक बन रहे हैं. अब ये बुजुर्ग दंपती जाएं, तो कहां जाएं. इस बाबत थानाध्यक्ष शिव कुमार ने बताया कि आवेदन मिला है. जांच कर कार्रवाई की जायेगी.
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