अब सदर अस्पताल में मिलेगी एक्सरे व अल्ट्रासाउंड की सुविधा

Updated at : 01 Mar 2019 8:05 AM (IST)
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अब सदर अस्पताल में मिलेगी एक्सरे व अल्ट्रासाउंड की सुविधा

सहरसा : सदर अस्पताल में प्रकाशित सदर अस्पताल: तीन टेक्नीशियन, एक्सरे मशीन के बावजूद वैकल्पिक व्यवस्था के तहत हो रहा एक्सरे शीर्षक से खबर प्रकाशित होने के बाद विभाग ने संज्ञान लेकर कार्रवाई शुरू कर दी है. सिविल सर्जन डॉ शैलेंद्र कुमार गुप्ता ने कहा कि सदर अस्पताल में बंद पड़े एक्सरे व अल्ट्रासाउंड मशीन […]

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सहरसा : सदर अस्पताल में प्रकाशित सदर अस्पताल: तीन टेक्नीशियन, एक्सरे मशीन के बावजूद वैकल्पिक व्यवस्था के तहत हो रहा एक्सरे शीर्षक से खबर प्रकाशित होने के बाद विभाग ने संज्ञान लेकर कार्रवाई शुरू कर दी है. सिविल सर्जन डॉ शैलेंद्र कुमार गुप्ता ने कहा कि सदर अस्पताल में बंद पड़े एक्सरे व अल्ट्रासाउंड मशीन को इन्स्टॉल करा दिया गया है.
दोनों में उपयोग होने वाले सामान की व्यवस्था जिला स्वास्थ्य समिति को उपलब्ध कराने का निर्देश दे दिया गया है. उन्होंने कहा कि अल्ट्रासाउंड मशीन को चलाने के लिए राज्य समिति को टेक्नीशियन को प्रतिनियुक्त करने की मांग की गयी है. टेक्नीशियन की प्रतिनियुक्ति होते ही अल्ट्रासाउंड चालू कर दिया जायेगा. वहीं एक्सरे के लिए तीन टेक्नीशियन पदस्थापित हैं.
पुर्जा काट रहे थे एक्सरे टेक्नीशियन : सदर अस्पताल में पूर्व से लगे एक्सरे मशीन जहां जंग खा रहा था. वहीं उसके लिए पदस्थापित तीन टेक्नीशियन से कभी इमरजेंसी का कार्य तो डाटा ऑपरेटर की हड़ताल में पुर्जा कटवाने का कार्य लिया जा रहा था.
लोगों को सुविधा देने की बात पर वैकल्पिक व्यवस्था के तहत निजी एक्सरे संचालक को अस्पताल द्वारा प्रतिमाह हजारों की भुगतान की जा रही है. विभागीय उदासीनता के कारण अस्पताल रेफरल अस्पताल बन कर रह गया है. इलाज के नाम पर सीमित संसाधन व चिकित्सक एवं कर्मियों की कमी जिले वासियों के लिए अभिशाप बन गया है. स्थिति यह है कि आर्थिक तंगी के मरीज को अक्सर मौत को ही गले लगाना पड़ता है. सुविधा के अभाव में अस्पताल दिनों दिन बीमार पड़ता ही चला जा रहा है.
बंद कर दिया गया था सरकारी एक्सरे : सदर अस्पताल में कुछ वर्ष पूर्व विभागीय निर्देश पर आइजीइएमएस संस्था द्वारा एक्सरे की शुकुआत की गयी थी. निजी संस्था द्वारा एक्सरे की शुरूआत होने के कुछ दिन बाद ही सरकारी एक्सरे को बंद कर दिया गया.
जिसके कुछ दिन बाद तत्कालीन टेक्नीशियन जयप्रकाश रजक सेवानिवृत्त हो गये और एक्सरे कक्ष में पूर्णरूपेण ताला लटका दिया गया. इसी दौरान सरकार के निर्देश पर आइजीइएमएस संस्था द्वारा किये जा रहे एक्सरे की सुविधा को बंद कर निजी स्तर पर एक्सरे की सुविधा बहाल की गयी.
कुछ दिन पूर्व सदर अस्पताल में तीन एक्सरे टेक्नीशियन कुमोद कुमार मिश्रा, अमरनाथ मंडल व यशवंत कुमार को पदस्थापित किया गया. जानकारी के अनुसार इनलोगों को योगदान दिये कई माह हो गये. लेकिन एक्सरे कक्ष का ताला खुलने के बजाय मरीजों के प्रतीक्षालय में आयुष्मान भारत योजना का कार्यालय खोल दिया गया. वही टेक्नीशियनों से आपातकालीन कक्ष व अन्य का कार्य लिया जाने लगा.
डाटा इंट्री ऑपरेटर के हड़ताल में जाने पर उनसे ओपीडी में पुर्जा कटवाने का कार्य लिया जा रहा है. वैकल्पिक व्यवस्था के तहत हो रहे एक्सरे के विरुद्ध संचालक को बड़ा प्लेट का सौ रुपये व छोटा प्लेट का 70 रुपये की दर से भुगतान हो रहा है. जानकारी के अनुसार प्रतिदिन औसतन 15 से बीस लोगों का एक्सरे होता है. जिसका भुगतान अस्पताल प्रशासन द्वारा किया जाता है. जानकारी के अनुसार प्रतिमाह लगभग 30 से 35 हजार का भुगतान होता है.
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