रजिस्टर में नामांकन 40 पर, उपस्थिति नगण्य

Published at :16 Oct 2016 4:31 AM (IST)
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रजिस्टर में नामांकन 40 पर, उपस्थिति नगण्य

गड़बड़झाला. ठीक-ठाक नहीं है आंगनबाड़ी केंद्रों का हाल बिना दरी बिछाये नीचे बैठ कर पढ़ रहे बच्चे मानक के अनुसार पोषाहार नहीं मिलने की भी मिल रही शिकायत डेहरी कार्यालय : शहरी क्षेत्र के आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों की उपस्थिति को देख केंद्रों के औचित्य पर सवाल उठने लगा है़ जिस आंगनबाड़ी केंद्र में 40 […]

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गड़बड़झाला. ठीक-ठाक नहीं है आंगनबाड़ी केंद्रों का हाल

बिना दरी बिछाये नीचे बैठ कर पढ़ रहे बच्चे
मानक के अनुसार पोषाहार नहीं मिलने की भी मिल रही शिकायत
डेहरी कार्यालय : शहरी क्षेत्र के आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों की उपस्थिति को देख केंद्रों के औचित्य पर सवाल उठने लगा है़ जिस आंगनबाड़ी केंद्र में 40 बच्चों का नामांकन है वहां आधे से कम बच्चे उपस्थित दिख रहे हैं. नामांकन को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब देने के लिए कोई आगे नहीं अा रहा है़ हालांकि, कुछ लाेगों का कहना है कि अगर गहराई से जांच करायी जाये तो एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आयेगा. नामांकित बच्चों में अधिकतर इस गांव में नहीं मिलेंगे. केवल कागज पर ही उनका नाम अंकित हैं.
जितने का नाम अंकित है वे कभी केंद्र पर नहीं आते. रजिस्टर में हाजिरी बना कर केंद्र के नामांकित बच्चों को दिये जाने वाले लाभ को हजम कर लिया जाता है़ केंद्रों पर बच्चों को बैठने के लिए दरी की व्यवस्था है पर उन्हें जमीन पर बैठाया जाता है या घर से लेकर आये बोरे पर. बच्चों को निर्धारित मानक के अनुरूप पोशाहार का नहीं दिये जाने का भी मामला सामने आते रहता है़ लोगों द्वारा लगाये जानेवाले आरोपों की सत्यता को जानने के लिए प्रभातखबर की टीम ने शनिवार को कुछ आंगनबाड़ी केंद्रों का जायजा लिया़
नगर पर्षद क्षेत्र में चल रहे 88 आंगनबाड़ी केंद्र
शहर के एक आंगनबाड़ी केंद्र में बैठे बच्चे.
जांच कर की जायेगी कार्रवाई
बीडीओ सह शहर के प्रभारी सीडीपीओ राम पुकार यादव ने कहा कि संबंधित आंगनबाड़ी केंद्रों का जांच कर कार्रवाई की जायेगी.
बच्चों की संख्या काफी कम
शनिवार को नगर पर्षद के आंगनबाड़ी के केंद्र संख्या 34 पर 40 में से सात बच्चे, केंद्र संख्या 58 पर 40 में से 11 व केंद्र संख्या 32 पर 40 में से 21 बच्चे उपस्थित मिले. इससे बाकी का अंदाजा लगाया जा सकता है़ इस दौरान कई आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों को बैठने के लिए सरकार द्वारा दरी उपलब्ध कराया जाता है. लेकिन दरी के अभाव में बच्चों को घर से बोरा लाना पड़ता है या जमीन पर बैठना पड़ता है.
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