भोरना में मैट्रिक पास एक भी नहीं

Published at :22 Mar 2016 7:23 AM (IST)
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भोरना में मैट्रिक पास एक भी नहीं

अनदेखी. लोगों को पता ही नहीं विकास क्या होता है नोनहर पंचायत के अंतिम छोर पर भोरना टोले का विकास नहीं हुआ है. यहां के लोगों को इसको लेकर काफी मलाल है. हालात यह है कि यहां का एक भी व्यक्ति मैट्रिक पास नहीं है. बिक्रमगंज (रोहतास) : दिनारा पथ से दो किलोमीटर पर स्थित […]

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अनदेखी. लोगों को पता ही नहीं विकास क्या होता है
नोनहर पंचायत के अंतिम छोर पर भोरना टोले का विकास नहीं हुआ है. यहां के लोगों को इसको लेकर काफी मलाल है. हालात यह है कि यहां का एक भी व्यक्ति मैट्रिक पास नहीं है.
बिक्रमगंज (रोहतास) : दिनारा पथ से दो किलोमीटर पर स्थित बहुआरा गांव का मठिया टोला व नोनहर पंचायत के अंतिम छोर पर स्थित भोरना टोला का विकास नहीं हुआ है.
विकास के नाम पर मठिया गांव में 50 फुट नाली व बिजली का एक ट्रांसफाॅर्मर मुहैया हुआ है.भोरना टोला जिसकी आबादी बहुत कम है. यहां के लोगों के लिए डिजिटल इंडिया व विकासशील भारत जैसे नारे का कोई मतलब नहीं है. इस टोले में एक भी व्यक्त मैट्रिक पास नहीं है. कभी 350 बीघा के रकबा में स्थित इस टोले की रौनक काफी रुआब वाली थी. पर, यहां के बाशिंदे गांव छोड़ गये और धीरे-धीरे अपनी जमीन भी बेच दी. टोला निवासी मंटू चौधरी, उमेश चौधरी ने बताया की नोनहर पंचायत से वर्ष 2000 में इस टोला को जोड़ा गया.
इससे पहले कुसुम्हारा पंचायत में था. 15 वर्ष पहले जब नोनहर पंचायत से जोड़ा गया था, तब काफी उम्मीदें थी कि शायद इस टोला का विकास होगा. पर, आज तक कोई सरकारी लाभ नहीं मिला. अच्छा होता कि इसे बगल के सटे बहुआरा के साथ जोड़ कर खैरा भूधर पंचायत में शामिल कर लिया जाता.
न नाली, न ही सड़क
बहुआरा मठिया गांव में 45 घरों की आबादी है. यहां अब तक 50 फुट ही नाली का निर्माण हो पाया है. गांव की गलिया नालियों का पानी जमा होने के कारण हर समय महकती रहती है.
गांव तक पहुंचने के लिए पगडंडी ही सहारा है. अवकाश प्राप्त शिक्षक जनार्दन गिरि कहते हैं कि जो हाल आजादी के पहले था वहीं हालात आज भी कायम है. पता नहीं गांव में पंचायत की विकास की राशि का क्या सदूपयोग होता है.
पैसा पास, फिर भी नहीं बनी सड़क
बहुआरा निवासी विनोद सिंह कहते हैं कि नटवार रोड से एक किलोमीटर दूरी पर बसा बहुआरा गांव को पक्की सड़क से जोड़ने के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तरह राशि मंजूर करायी गयी है.
इसमें कुछ ग्रामीण निहित स्वार्थ की वजह से सड़क को सीधे नटवार रोड से नहीं जोड़ कर मैधरा गांव के सड़क से जोड़ा गया. उस रस्ते पर कुछ अनुसूचित जाति के लोगों का घर बना है और उस मार्ग से सड़क निकलना प्रशासन के लिए टेढ़ी खीर है. उसी पेच की वजह से आज तक सड़क निर्माण नहीं हो पायी. वहीं एसडीओ राजेश कुमार ने कहा कि पंचायत चुनाव के बाद इस तरह के मामलो पर कार्यवाई होगी. चुनाव तक लोगों को इंतजार करना चाहिए.
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