सदर अस्पताल में करोड़ों के भवन का नहीं हो रहा उपयोग, विभाग मौन
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :22 Nov 2017 8:03 AM (IST)
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सासाराम कार्यालय : स्वास्थ्य विभाग में विकास की बयार बह रही है. कुछ भवन वर्षों से बन कर तैयार हैं. उनमें झाड़ियां उगने लगी हैं. तो कुछ निर्माणाधीन हैं. सदर अस्पताल परिसर के अवलोकन पर लोग यह कहते नहीं थक रहे की यहां विकास की बयार बह रही है. लेकिन, इन भवनों के पीछे की […]
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सासाराम कार्यालय : स्वास्थ्य विभाग में विकास की बयार बह रही है. कुछ भवन वर्षों से बन कर तैयार हैं. उनमें झाड़ियां उगने लगी हैं. तो कुछ निर्माणाधीन हैं. सदर अस्पताल परिसर के अवलोकन पर लोग यह कहते नहीं थक रहे की यहां विकास की बयार बह रही है. लेकिन, इन भवनों के पीछे की कहानी जानने पर लगता है कि जब इन भवनों का उपयोग करने का समय आयेगा, तो उस समय फिर लाखों रुपये की मरम्मत की जरूरत पड़ेगी.
क्योंकि उपयोग नहीं होने के कारण अधिकांश भवनों में झाड़ियां उगने लगी हैं. भूत बंगला बने भवनों में असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगने लगा है. जिनसे सदर अस्पताल में भर्ती मरीजों व उनके परिजनों को खतरा महसूस होते रहता है. सरकार की कौन सी नीति है कि करोड़ों के भवन तैयार तो कर दिये. लेकिन, उसके उपयोग की दिशा में कोई पहल नहीं कर रही है.
52 क्वार्टर वर्षों से कर रहे कर्मचारियों का इंतजार: करीब 4 करोड़ रुपये की लागत से 52 क्वार्टरों का निर्माण सदर अस्पताल परिसर में हुआ है. इनके निर्माण के करीब चार वर्ष भवन का कार्य अधूरा है. लोहे की ग्रिल लगाये गये हैं. लेकिन, अधिकांश में खिड़कियां नहीं है.
विभागीय सूत्र बताते हैं कि संवेदक व भवन निर्माण विभाग के बीच विवाद के कारण खिड़कियां व दरवाजे नहीं लग सके हैं. इन भवनों में अब झाड़ियां उगने लगी हैं. अगर कर्मचारियों को रहने के लिए क्वार्टर दे दिया जाता, तो खिड़की लगाना कोई बड़ी बात नहीं थी. लेकिन, भवन निर्माण विभाग द्वारा उसका हस्तांतरण भी नहीं किया गया है. जो मामले को उलझाए हुये है.
भवन चकाचक, पर रहनेवाला कोई नहीं
सदर अस्पताल के ओपीडी के सामने जीएनएम स्कूल सह छात्रावास का भव्य भवन करीब दो वर्ष से बन कर तैयार है. खाली भवन में असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगने लगा है. कई जगह नया भवन में शीशे की खिड़कियां टूटने लगी हैं, तो परिसर में झाड़-झंखाड़ उग आये हैं. ऐसे में भवन डरावना लगने लगा है. इधर सरकार का हाल है कि अबतक इसमें पढ़ाई शुरू करने के लिए कोई कवायद नहीं शुरू की है. करोड़ों का भवन अपने उपयोगकर्त्ता का इंतजार कर रहे हैं. सरकार बदलने पर लोगों को उम्मीद जगी थी कि इसमें छात्र रहने आयेंगे. लेकिन, अबतक ऐसा नहीं हो सका है.
उपस्कर का अभाव, काम नहीं कर रहा मर्चरी
शहर के समीप से गुजरे फोरलेन सड़क एनएच टू पर होने वाली दुर्घटनाओं के मद्देनजर सरकार ने सासाराम के सदर अस्पताल में शवों को रखने के लिए मरच्यूरी का निर्माण कराया था. मरच्यूरी बने करीब चार वर्ष हो गये हैं. लेकिन, मरच्यूरी आज भी उपस्कर यथा एसी, जनरेटर, मशीनों के अभाव में उपयोग के लायक नहीं है. लोगों का कहना है कि मरच्यूरी का भवन बनाने से क्या फायदा, जब इसका लाभ ही लोगों को नहीं मिलेगा, तो भवन का निर्माण क्यों कराया था? सरकार को इन भवनों के प्रति सजग होना चाहिए. ताकि आम जनता को इसका लाभ मिल सके.
कहते हैं अधिकारी
कर्मचारियों के क्वार्टर का अभी तक भवन निर्माण विभाग ने हस्तांतरण नहीं किया है. जीएनएम स्कूल सह छात्रावास के लिए सरकार स्तर से कार्रवाई होनी है. हां, इतना जरूर है कि मरच्यूरी के उपस्कर के लिए मेरे पूर्वती और मैं कई बार विभाग को पत्र लिख चुके हैं. देखिए कब शुरू होता है.
डॉ. नवल किशोर प्रसाद सिन्हा, सिविल सर्जन
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