गरमी में पेयजल की कमी बारिश में हो रहे ''पानी-पानी''

Published at :12 Jun 2017 2:54 AM (IST)
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गरमी में पेयजल की कमी बारिश में हो रहे ''पानी-पानी''

परेशानी. बारिश शुरू होते ही दिखने लगी जलजमाव की समस्या कई वर्षों से जस-की-तस है क्षेत्र की समस्या सासाराम कार्यालय : शहर में पेयजल की समस्या काफी पुरानी है. शायद शहर के बसने के समय से ही. क्योंकि पुराने लोग कहते हैं कि पीने का पानी के रूप में शेरशाह सूरी मकबरे के विशाल तालाब […]

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परेशानी. बारिश शुरू होते ही दिखने लगी जलजमाव की समस्या

कई वर्षों से जस-की-तस है क्षेत्र की समस्या
सासाराम कार्यालय : शहर में पेयजल की समस्या काफी पुरानी है. शायद शहर के बसने के समय से ही. क्योंकि पुराने लोग कहते हैं कि पीने का पानी के रूप में शेरशाह सूरी मकबरे के विशाल तालाब का पानी उपयोग होता था. जो आज स्नान के लायक भी नहीं. आजादी के बाद करीब 1954 में पेयजलापूर्ति योजना शहर में शुरू हुई थी. तब से अबतक इतनी पानी की आपूर्ति नहीं हो सकी कि शहर के सभी लोगों को पीने का पानी मिल सके. आलम यह रहा कि गरमी के दिनों में शहर में पानी के लिए हाहाकार मचता रहा है. गरमी के दिनों में बे-पानी होने वाले शहरवासी बारिश शुरू होते ही पानी-पानी होने लगते हैं. यानी शहर के लोगों को हमेशा पानी परेशान करते रही है.
बिना पानी के परेशान होते हैं कई वार्डों के लोग: शहर के उत्तरी इलाके के साथ सात वार्डों, पश्चिम के वार्ड 10 व 11 की करीब आधी आबादी, दक्षिणी क्षेत्र में शहर की सीमा सटे मुहल्लों के लोग गरमी के दिनों में बे पानी परेशान हो जाते हैं. उत्तरी क्षेत्र के वार्ड एक से सात, पश्चिमी क्षेत्र के वार्ड 10 व 11 की नयी बस्तियों में जलापूर्ति के लिए पाइप नहीं बिछ सका है. वहीं दक्षिणी क्षेत्र के सीमा पर बसे मुहल्लों तक जलापूर्ति का पानी पहुंच ही नहीं पाता है. जिसके कारण लोगों को गरमी में दूर से पानी की व्यवस्था करनी पड़ती है.
घरों में घुस जाता है नाली का पानी: पानी के लिए तरसनेवाले वार्ड एक से सात के लोगों के घरों में पीने का पानी रहे या नहीं रहे, लेकिन गरमी के दिनों में भी उनके मुहल्लों की गलियों में पानी जमा रहता है.
यही जमा पानी बारिश के दिनों में उनके घरों तक में आ जमता है. आलम यह है कि बारिश का आनंद उठाने के बीच लोग उससे चिंतित भी हो जाते हैं. इसके अलावे पूर्वी व मध्य क्षेत्र के कई इलाकों में जलजमाव होने लगता है, जिस कारण बारिश का मौसम आते ही लोगों के चेहरों पर खुशी व चिंता की लकीरें उभर आती हैं.
मॉनसून से पहले समस्या के समाधान के लिए नगर पर्षद की ओर देख रहे स्थानीय लोग
कहते हैं अधिकारी
हमारी पूरी कोशिश रहेगी कि इस वर्ष किसी इलाके में जलजमाव नहीं हो. नालियों की सफाई लगातार करायी जा रही है. ड्रेनेज का काम भी इस वर्ष शुरू होने की संभावना है. मनीष कुमार, नगर पर्षद कार्यपालक पदाधिकारी
जल निकासी की योजना फाइलों में
करीब तीन दशक से शहर में जलजमाव की समस्या है. हाल के वर्षों में मकानों की संख्या बढ़ने के साथ जलजमाव की समस्या का दायरा भी बढ़ता जा रहा है. ऐसा नहीं है कि इसकी चिंता किसी को नहीं है. चिंता प्रशासन के अधिकारी, जनप्रतिनिधि और लोग सभी करते हैं, लेकिन समस्या का समाधान निकालने में लोग सफल नहीं हो पा रहे हैं. हाल के दिनों में ड्रेनेज सिस्टम की योजना बनी है, जो अबतक फाइल में ही है. अधिकारी की मानें, तो योजना टेंडर की प्रक्रिया में है. इसके अलावा वैकल्पिक व्यवस्था की योजना पर कोई काम नहीं हो रहा है.
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