शिक्षा विभाग के इस कदम से बिहार के 1500 प्राध्यापकों का अटक गया प्रोमोशन, जानिये क्या है पूरा मामला

Updated at : 30 Dec 2021 5:13 PM (IST)
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शिक्षा विभाग के इस कदम से बिहार के 1500 प्राध्यापकों का अटक गया प्रोमोशन, जानिये क्या है पूरा मामला

अगर यह रेग्यूलेशन यूजीसी के नियमानुसार 18 जुलाई 2018 से प्रभावित होता है, तो इस अवधि से 2021 के बीच हुए सभी प्रोमोशन स्वत: निरस्त हो जायेंगे.

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पटना. वर्ष 2018-21 के बीच प्रदेश के सभी पारंपरिक विश्व विद्यालयों के प्राध्यापकों की प्रोन्नति फंस गयी है. इसकी वजह यूजीसी रेग्यूलेशन 2018 है. तीन साल बाद शिक्षा विभाग इस रेग्यूलेशन को अब लागू करने के प्रस्ताव को मंजूरी देने जा रही है. शिक्षा विभाग की मंशा है कि यह रेग्यूलेशन 18 जुलाई 2018 से प्रभावी किया जाये.

वही विश्वविद्यालय शिक्षक संघों का कहना है कि यह रेग्यूलेशन तत्काल प्रभाव (प्रदेश में जब से नियम लागू किया जाये) से लागू किया जाये. ताकि 2018 से 2021 के बीच हुए प्रोमोशनों की मान्यता बनी रहे. बिहार के विभिन्न विश्वविद्यालयों के शिक्षक संघों के मुताबिक प्रदेश में 2018 से 21 के बीच 1998 के परिनियम के अनुसार प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों मे एक से डेढ़ हजार के बीच प्रमोशन हुए है.

अगर यह रेग्यूलेशन यूजीसी के नियमानुसार 18 जुलाई 2018 से प्रभावित होता है, तो इस अवधि से 2021 के बीच हुए सभी प्रोमोशन स्वत: निरस्त हो जायेंगे. लिहाजा शिक्षक संघ चाहते है कि इस परिनियम को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाये. सुनिश्चत किया जाये कि अवधि मे हुए सभी प्रोमोशन मान्य रहेंगे.

बिहार में प्रोमोशन पर फिलहाल रोक लगी हुई है. आधिकारिक जानकारी के मुताबिक शिक्षा विभाग के उच्च शिक्षा निदेशालय के हालिया आदेश से 2018 के बाद हुए प्रोमोशन पर फिलहाल रोक लगा दी गयी है. दरअसल विभाग का मानना है कि प्रोमोशन की प्रक्रिया 2018 से की जानी चाहिए. फिलहाल शिक्षा विभाग ने इस मामले में विधि विभाग और वित्त विभाग से सलाह लिया है.

आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक बिहार उच्चतर शिक्षा परिषद ने यूजीसी 2018 रेग्यूलेशन पर बिहार के संदर्भ में परिनियम तैयार कर लिया है. जानकारों के मुताबिक शिक्षा विभाग उस परिनियम पर अपना मंतव्य जोड कर इसे राजभवन भेजने की अनुशंसा करेगा. हैरत की बात है कि 1998 के बाद यूजीसी के दो परिनियम 2005 और 2010 में आये.

दोनों ही परिनियम लागू नही है, जबकि उससे पहले का परिनियम 1998 अभी तक लागू है. इस विसंगति को दूर करने के लिए शिक्षा विभाग किसी भी कीमत पर 2018 का यूजीसी एक्ट लागू करना चाहता है. पीयू शिक्षक संघ ने इस मामले मे आधिकारिक तौर पर शिक्षा मंत्री एवं अन्य उच्च अफसरों से मिल कर आग्रह किया है कि यूजीसी के 2018 के रेग्यूलेशन को अधिनियम के निर्गत होने की तिथि से लागू किया जाये.

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