सिनेमा उद्योग को हर दिन हो रहा है 30 लाख रुपये का नुकसान

Published by :Pritish Sahay
Updated at :24 Apr 2020 11:41 PM
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सिनेमा उद्योग को हर दिन हो रहा है 30 लाख रुपये का नुकसान

पटना : कोरोना संकट के आते ही राजधानी के मल्टीप्लेक्स और सिनेमा हॉल बंद कर दिये गये थे. प्रबंधकों की मानें तो राजधानी पटना में सिनेमा उद्योग का हर दिन का कारोबार लगभग 30 लाख रुपये का है, जिसका नुकसान हो रहा है. इनको बंद किये हुए एक माह से अधिक समय हो गया है. […]

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पटना : कोरोना संकट के आते ही राजधानी के मल्टीप्लेक्स और सिनेमा हॉल बंद कर दिये गये थे. प्रबंधकों की मानें तो राजधानी पटना में सिनेमा उद्योग का हर दिन का कारोबार लगभग 30 लाख रुपये का है, जिसका नुकसान हो रहा है. इनको बंद किये हुए एक माह से अधिक समय हो गया है. तीन मई से भी शुरू हो सकेगा या नहीं, स्पष्ट नहीं है. क्योंकि देश में सिनेमा उद्योग का प्रमुख केंद्र मुंबई कोरोना से सबसे अधिक प्रभावित है और राजधानी पटना लॉकडाउन की वजह से ठप है.

ऐसी स्थिति में सिनेमा व मल्टीप्लेक्स मालिकों की हालत खराब हो रही है. बंद की अवधि का वेतन और प्रबंधन खर्च भी मुश्किल में डाल रहा है. ऐसे में सरकार से इसे शुरू करने और राहत देने की मांग मल्टीप्लेक्स प्रबंधकों ने की है. राजधानी पटना में प्रमुख रूप से तीन मल्टीप्लेक्स हैं. इसके अलावा कई सिनेमा हॉल संचालित हैं, जहां हर दिन 14 हजार से अधिक लोग सिनेमा देखने पहुंचते हैं. सिनेमा उद्योग से 2 हजार से अधिक परिवारों की रोजी रोटी जुड़ी है. उपकरणों के खराब होने का डरज्ञात हो कि मार्च में कोरोना के फैलाव के बाद 12 मार्च से फिल्म इंडस्ट्रीज बंद है.

संक्रमण फैलाव की संभावना को बताते हुए सबसे पहले इन्हें ही बंद किया गया था. सिनेमा उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि आगामी हालात को देखते हुए सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की गयी है. इन लोगों का कहना कि सरकार को बिजली बिल और जीएसटी में कटौती करनी चाहिए. मल्टीप्लेक्स के प्रबंधकों की मानें, तो लगातार बंद रहने और रख-रखाव के अभाव में डिजिटल उपकरण भी खराब होने का डर बना हुआ है.

जिस तरह की स्थितियां बन रही हैं, अगले एक माह और सिनेमा के शुरू होने की संभावना बहुत ही कम है. कोट : क्या कहते हैं मल्टीप्लेक्स चलानेवालेराज्य सरकार कारोबार पर आये संकट को दूर करने पर गंभीरता से विचार कर रही है. सरकार का जो आदेश आयेगा उसके अनुसार सिने उद्योग काम करेगा. सुनील कुमार सिन्हा, प्रमुख, रिजेंट मल्टीप्लेक्सहर दिन लाखों रुपये का नुकसान हो रहा है. लाॅकडाउन समाप्त होने के बाद भी इस उद्योग को पटरी पर आने में छह माह से अधिक का समय लग सकता है. राहत पैकेज मिलना चाहिए.शरद गुप्ता, मोना सिनेमा

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प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.

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