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विश्वविद्यालयों में दर्जनों विषयों में नहीं एक भी शिक्षक

बिहार के पारंपरिक विश्वविद्यालयों में अकादमिक स्तर के पिछड़ने की बात का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अभी भी तमाम ऐसे दर्जनों विषय हैं, जिनमें एक भी शिक्षक नियुक्त नहीं है. अधिकतर विषय विज्ञान,भाषा, मानविकी और चलन में आये नवागत विषयों से जुड़े हैं. उन विषयों की पढ़ाई भगवान भरोसे हैं.

फ्लेग- कक्षा ले रहे अतिथि शिक्षकों को 11 माह से नहीं हुआ वेतन भुगतान, विश्वविद्यालय और शिक्षा विभाग में फंसा मामला नालंदा खुला विश्वविद्यालय में एक भी नियमित शिक्षक नहीं मुंगेर विश्वविद्यालय में स्नोतकोत्तर के पद भी स्वीकृत नहीं, स्नातक के शिक्षक ले रहे स्नातकोत्तर कक्षाएं बीएन मंडल के लिए स्वीकृत 14 विषय में 11 में एक भी शिक्षक नहीं संवाददाता,पटनाबिहार के पारंपरिक विश्वविद्यालयों में अकादमिक स्तर के पिछड़ने की बात का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अभी भी तमाम ऐसे दर्जनों विषय हैं, जिनमें एक भी शिक्षक नियुक्त नहीं है. अधिकतर विषय विज्ञान,भाषा, मानविकी और चलन में आये नवागत विषयों से जुड़े हैं. उन विषयों की पढ़ाई भगवान भरोसे हैं. कुछ विश्वविद्यालयों में आधे अधूरे मन से बस अतिथि शिक्षकों के बल पर कक्षाएं संचालित की जा रही हैं. इसमें भी अचंभे की बात है कि जिन अतिथि शिक्षकों की दम पर कुछ कक्षाएं लगायी भी जा रही हैं, उन्हें 11 माह से वेतन नहीं मिला है. वह भी इसलिए कि शिक्षा विभाग ने राशि मुहैया नहीं करायी है. उल्टे हाथ खड़े करते हुए शिक्षा विभाग ने विश्वविद्यालयों से कहा है कि वे अपने आंतरिक स्रोत से अतिथि शिक्षकों का वेतन भुगतान करें. उदाहरण के तौर पर ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय में 19 विषय ऐसे शिक्षक हैं, जिनमें पद स्वीकृत होते हुए भी एक भी शिक्षक नहीं है. भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय में 14 विषयों में 11 विषयों के शिक्षक नहीं है. मुंगेर विश्वविद्यालय में स्नातकोत्तर विषय में शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर पद स्वीकृत तक नहीं है. स्नातकोत्तर विषय स्वीकृति की प्रत्याशा में चल रहे हैं. गजब की बात है कि यहां स्नातक के शिक्षक स्नातकोत्तर पढ़ा रहे हैं. पूर्णिया विश्वविद्यालय के विभिन्न कॉलेजों में 25 विषयों के कुल 115 शिक्षक नहीं हैं. वहीं तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय 15 विषयों के 44 स्वीकृत पद के विरुद्ध एक भी नियमित शिक्षक नहीं है. जय प्रकाश विश्वविद्यालय में 11 विषयों के 28 शिक्षक नहीं है. नालंदा खुला विश्वविद्यालय एक भी नियमित शिक्षक नहीं है. समन्वयक के रूप में सेवानिवृत प्रोफेसर्स की सेवा ली जाती है. मगध विश्वविद्यालय में 11 विषयों में और आर्यभट्ट विश्वविद्यालय में चार ऐसे विषय हैं, जिसमें कोई शिक्षक नहीं है. पटना विश्वविद्यालय विश्वविद्यालय में बंगला विषय और पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय में पाली और बंगाली विषय का एक भी शिक्षक नहीं है. विश्वविद्यालय वार स्वीकृत पद के विरुद्ध खाली पद की स्थिति —– विश्वविद्यालय- रिक्त पदों की संख्या ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय – 117 बीआरए बिहार विवि- 552 (28 विषयों के कुल स्वीकृत पद 1690) वीर कुंवर सिंह विवि- 614 (स्वीकृत पद 965) पूर्णिया विश्वविद्यालय-604 (स्वीकृत पद 782 ) मौलाना एमएमएच अरबी-फारसी विवि- 16 (स्वीकृत पद 32) कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विवि-180 मगध विश्वविद्यालय- 504 आर्यभट्ट ज्ञान विवि- 140 (कुल स्वीकृत पद 201) बिहार कृषि विवि-202 (स्वीकृत पद 676) ————– राज्य के विश्वविद्यालयों के विभिन्न खातों में जमा 1521 करोड़ से अधिक राशि का ब्याैरा विश्वविद्यालय- खातों की संख्या- जमा राशि ( करोड़ में ) पटना विवि- 42-174 एलएनएमयू-121- 224 बीएनमंडल विवि-11-110 मगध विवि-27- 317 जेपी विवि- 19-6.69 केएसडीएस विवि- 20- 5.16 एमएसएच अरबी-फारसी विवि-12- 36.61 बीआरए बिहार विवि-34- 181 टीएमबीयू-2- ब्यौरा उपलब्ध नहीं आर्यभट्ट ज्ञान विवि-27- 14.60 पूर्णियां विवि-26- 43 वीर कुंवर सिंह विवि-3- 118 मुंगेर विवि-13- 0.72 पाटलिपुत्र विवि-20- 100 नालंदा खुला विवि-10- 5.55 बिहार कृषिविवि-17- 45 बिहार पशु विज्ञान विवि-18- 77 नोट- इस खबर में प्रयुक्त सभी आंकड़े 20 मार्च को कुलाधिपति की अध्यक्षता में आयाेजित बैठक की जारी प्रोसीडिंग रिपोर्ट से लिये गये हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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