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बेहाल मध्यवर्ग : सरकार गरीबों को दे रही मुफ्त राशन, पर मध्यवर्ग की आय घटी, खर्च बढ़ा

By Prabhat Khabar Print Desk
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मध्यम वर्ग
मध्यम वर्ग
प्रभात खबर

पटना :बिहार में 1.68 करोड़ परिवार खाद्य सुरक्षा अधिनियम के दायरे में हैं. इन परिवारों को कोरोना काल में सरकार मुफ्त राशन दे रही है. यह खाद्यान्न परंपरागत तौर पर मिलने वाले राशन से अलग है. साथ ही राज्य सरकार ने इन परिवारों को एक-एक हजार रुपये भी दिये हैं. इसका लाभ इन 1.68 करोड़ परिवारों के 8.71 करोड़ से अधिक लोगों को मिल रहा है. इसके अतिरिक्त राज्य में मध्यम वर्ग की करीब डेढ़ करोड़ आबादी है.

घटी कमाई, ऊपर से महंगाई

कोरोना के समय इस आबादी के बारे में किसी ने नहीं सोचा. इसके बड़े हिस्से की आजीविका गैर सरकारी काम, अपना कारोबार या निजी सेक्टर में नौकरी से चलती है. कोरोना के दौरान इनमें कई का रोजगार चला गया. वेतन में कटौती कर दी गयी. नियमित मिलनेवाली वृद्धि बंद कर दी गयी. सब कुछ सामान्य रहने के कारण मध्य वर्ग के लोगों ने अपना खर्च भी बढ़ा लिया था. कई ने जीवन स्तर सुधारने के लिए बैंकों से कार लोन, होम लोन, एजुकेशन लोन आदि ले रखा है, जिसकी इएमआइ अब मुसीबत बन गयी है. उनके सामने अब जीवन-मरण के हालात हो गये हैं. लॉकडाउन के दौरान खान-पान, बैंक का लोन, स्कूल की फीस, दवा का खर्च बचत के पैसों से चला, लेकिन अब वह सहारा भी नहीं है. ऊपर से महंगाई बढ़ने से मध्य वर्ग की कमर टूट गयी.

पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ीं

लॉकडाउन के बाद अब तक पेट्रोल की कीमत में 8.37 रुपये और डीजल की कीमत में 9.57 रुपये प्रति लीटर का इजाफा हो चुका है. वहीं, पिछले छह माह में अरहर, मसूर और चना दाल में पांच से 10 रुपये प्रति किलो तक की तेजी दर्ज की जा चुकी है. हालांकि, मूंग दाल में 10 प्रति किलो की गिरावट दर्ज की गयी. जबकि सरसों तेल में मार्च से अब तक 25 से 30 रुपये प्रति लीटर का इजाफा हो चुका है. वहीं, गुड की कीमत में 15 रुपये की बढ़ोतरी हो चुकी है. चना में प्रति किलो 10 रुपये का इजाफा देखने को मिला.

ऑनलाइन क्लास के नाम पर वसूले चार्ज

कोरोना के कारण पिछले छह महीने से स्कूल तो बंद हैं, मगर अभिभावकों को फीस में किसी तरह की राहत नहीं दी गयी. कोरोना काल में स्कूलों में शुरू हुई ऑनलाइन पढ़ाई का सीधा असर अभिभावकों की जेब पर पड़ा. ऑनलाइन पढ़ाई के लिए अभिभावकों ने महंगे स्मार्टफोन और लैपटॉप की खरीदारी की. इसके साथ ही हर महीने डेटा प्लान के लिए भी अलग से अभिभावकों को खर्च करना पड़ रहा है. वहीं, कई स्कूल ऑनलाइन पढ़ाई के नाम पर ट्यूशन फीस में अतिरिक्त शुल्क जोड़ कर ले रहे हैं.

सब्जियों के दाम में 50 फीसदी तक इजाफा

सबसे अधिक मार सब्जियों के कारण पड़ा है. अप्रैल से अब तक सब्जियों के भाव में 50% तक वृद्धि हो चुकी है. टमाटर तीन से चार गुना महंगा हो गया है. आलू के दाम 20-22 रुपये से बढ़कर आज 40 रुपये किलो तक पहुंच चुके हैं, जबकि प्याज के दाम आठ रुपये किलो तक बढ़ गये हैं. यहीं हाल हरी सब्जियों का भी है.

डॉक्टरों ने बढ़ा दी ओपीडी की फीस, दवाएं भी हुई महंगी

अधिकतर डॉक्टरों ने ओपीडी की फीस भी बढ़ा दी है. वहीं, दूसरी ओर अगस्त में दवा कंपनियों ने नयी बैच की दवाएं बाजार में उतारी हैं. सभी कंपनियों ने दवाओं के रेट 10 प्रतिशत तक बढ़ा दिया है. कोरोना काल में प्राइवेट अस्पतालों में इलाज का खर्च 20% तक बढ़ गया है. गाइडलाइन के अनुसार ऑपरेशन से पहले मरीजों की कोरोना जांच अौर डॉक्टर व पैरा मेडिकल स्टाफ के लिए पीपीइ किट पहनना आवश्यक है. साथ ही ओटी को सैनिटाइजेशन से लेकर अन्य सुरक्षा उपाय में भी करने हैं. इससे निजी अस्पतालों ने मरीजों पर अतिरिक्त बोझ डाल दिया है, जिससे इलाज का खर्च 20% बढ़ गया है.

स्पेशल ट्रेन में अधिक किराया

जेइइ मेन, नीट व एनडीए की परीक्षा को लेकर चलायी जा रही स्पेशल इंटरसिटी एक्सप्रेस का किराया 25 से लेकर 120 रुपये तक अधिक है. पहले पटना से बाढ़, मोकामा व बख्तियारपुर जाने को यात्रियों को 50 रुपये एक्सप्रेस का किराया चुकाना पड़ता था, जबकि स्पेशल इंटरसिटी में यात्रा के लिए 70 रुपये देने पड़ रहे हैं. वहीं, गया के लिए एक्सप्रेस ट्रेन के जनरल डिब्बे में 50 रुपये किराया है, लेकिन अब 75 रुपये देने पड़ रहे हैं.

निजी संस्थान बना रहे दबाव

यूजीसी ने सभी शिक्षण संस्थानों को आदेश दिया था कि हालात सुधरने तक छात्रों पर फीस के लिए दबाव न बनाएं. पीयू के डीन प्रो एनके झा ने कहा कि सरकारी संस्थानों के स्टूडेंट्स को कोई परेशानी नहीं है. सभी की फीस जमा है. अगर फीस बाकी भी है, तो उन पर कोई दबाव नहीं बनाया जा रहा है. लेकिन, प्राइवेट यूनिवर्सिटी और कॉलेज छात्रों पर फीस समेत अन्य प्रकार के शुल्क तुरंत जमा करने का दबाव बना रहे हैं.

posted by ashish jha

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