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फसल अवशेष जलाने की समस्या को खत्म, पुआल से बनेगा अब बायोचार, मिट्टी में दूर होगी कार्बन की कमी

फसल अवशेष जलाने की समस्या को खत्म करने और मिट्टी में कार्बन की कमी को दूर करने के लिए सरकार ' बायोचार ' का उत्पादन करने जा रही है. रोहतास, बक्सर आरा, कैमूर से इसकी शुरुआत होगी.

By Prabhat Khabar Print Desk
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फसल के अवशेष जलाते किसान
फसल के अवशेष जलाते किसान
फाइल

पटना. फसल अवशेष जलाने की समस्या को खत्म करने और मिट्टी में कार्बन की कमी को दूर करने के लिए सरकार ' बायोचार ' का उत्पादन करने जा रही है. रोहतास, बक्सर आरा, कैमूर से इसकी शुरुआत होगी.

कृषि विभाग खरीफ का धान कटते ही पुआल को किसानों से खरीदकर केविके को देकर उत्पादन शुरू करा देगा. केवीके पर इसके लिए करीब एक लाख लागत वाली भट्ठी स्थापित की जायेगी.

बायोचार किसानों को खेत में मिलाने के लिए निशुल्क वितरित किया जायेगा. योजना के मुताबिक कृषि विभाग चयनित जिलों में खरीफ का धान की फसल कटते ही पुआल खरीदकर चारों जिलाें के कृषि विज्ञान केंद्रों को उपलब्ध करा देगा.

केविके भट्ठी में इसे जलायेंगे. 400 डिग्री तापमान पर पुआल को अवशेष में बदल दिया जायेगा. यह अवशेष ही बायोचार है. एक क्विंटल पुआल में करीब 60 किलो बायोचार मिलेगा. फसल अवशेष (पुआल आदि) को खेतों में ही जलाकर नष्ट करने की 16 जिलों में समस्या अधिक है.

मालूम हो कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार में फसल अवशेष जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए सभी जरूरी कदम उठाने के आदेश दिये हैं. पुआल जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए किस विभाग ने किस स्तर पर कितना- कितना काम किया इसकी रिपोर्ट सरकार द्वारा नियमित मांगी जा रही है.

निगरानी के लिए कृषि विभाग के सहायक निदेशक (शष्य) को फसल अवशेष जलाने की घटनाओं के फोटो- नक्शा आदि एकत्रित कर कार्रवाई के लिए नोडल अधिकारी पहले ही नियुक्त किया जा चुका है.

Posted by Ashish Jha

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