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सीएम नीतीश का शिक्षा विभाग को निर्देश, देवनागरी व रोमन में मिले प्रमाणपत्र

Updated at : 21 Feb 2017 7:48 AM (IST)
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सीएम नीतीश का शिक्षा विभाग को निर्देश, देवनागरी व रोमन में मिले प्रमाणपत्र

पटना : सोमवार को लोक संवाद कार्यक्रम में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शिक्षा विभाग को निर्देश दिया कि विद्यार्थियों का प्रमाणपत्र देवनागरी और रोमन स्क्रिप्ट में दिया जाये. उन्होंने कहा कि यह कैसे होगा कि राज्य की भाषा हिंदी है और प्रमाणपत्र व निबंधन में कोई अन्य भाषा का प्रयोग किया जा रहा […]

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पटना : सोमवार को लोक संवाद कार्यक्रम में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शिक्षा विभाग को निर्देश दिया कि विद्यार्थियों का प्रमाणपत्र देवनागरी और रोमन स्क्रिप्ट में दिया जाये. उन्होंने कहा कि यह कैसे होगा कि राज्य की भाषा हिंदी है और प्रमाणपत्र व निबंधन में कोई अन्य भाषा का प्रयोग किया जा रहा है. मुझे तो इस बात की नयी जानकारी मिल रही है. दूसरी राजभाषा के विकास के लिए भी प्रयास किया जा रहा है. स्कूल में पढ़नेवाले विद्यार्थियों का प्रमाणपत्र देवनागरी स्क्रिप्ट में हो.

दूसरे राज्य में भी प्रमाणपत्र पढ़ा जा सके इसके लिए अगर आवश्यक है, तो रोमन स्क्रिप्ट में भी प्रमाणपत्र दिया जाये. कानून बने और दोनों स्क्रिप्ट में प्रमाणपत्र दिया जाये. राज्य के सरकारी विद्यालय में यह नियम ठीक नहीं है. मौलिक प्रश्न है कि जब से तकनीक आयी है तब से इसे ठीक नहीं किया गया. इस बात के लिए मुख्यमंत्री ने जानकारी देने के लिए मो अविबुल हक को धन्यवाद भी दिया. उन्होंने अधिकारियों से पूछा कि इस तरह का काम रूस व फ्रांस में हो रहा है क्या? रूस व जापान में क्या हो रहा है.
कोई देश विकसित हुआ है, तो वह अपने ज्ञान व कौशल के बल पर विकसित हुआ है. यह बात समझ में नहीं आती की सर्टिफिकेट में यह बाध्यता कैसे आयी. पटना के शिक्षक मो अविबुल हक द्वारा मुख्यमंत्री से आठवीं पास होने के बाद विद्यार्थियों को दिये जानेवाले स्थानांतरण प्रमाणपत्र व नौवीं कक्षा में पंजीकरण के समय उत्पन्न होनेवाली नाम में गलती को लेकर सुझाव दिया गया. मो हक ने सुझाव दिया कि नौवीं कक्षा में बोर्ड परीक्षा के पंजीकरण समय एक ही नाम को रोमन स्क्रिप्ट में भिन्न-भिन्न तरह से लिखा जाता है. उन्होंने बताया कि पूजा नाम को रोमन में दो तरह से लिखा जाता है, जिसमें एक गलत है. गलती को दूर करने के लिए स्क्रिप्ट में सुधार कराया जाये.
इन्होंने दिये सुझाव
लोक संवाद कार्यक्रम में समस्तीपुर के मनीष कुमार ने सभी अनुमंडलों में वृद्धाश्रम खोलने, मुंगेर के अजीत कुमार ने सभी विश्वविद्यालयों में पुस्तकालय विज्ञान की शिक्षा के लिए स्थायी व्याख्याताओं की नियुक्ति करने और मोतिहारी के ब्रज मोहन कुमार ने स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड को लेकर सुझाव दिये.
विकास आयुक्त विद्यालयों की समीक्षा करें
सहरसा के सामाजिक कार्यकर्ता कपिलदेव राम ने एससी व एसटी आवासीय विद्यालयों के लिए सरकारी जमीन नहीं मिलने का मामला उठाया. इस पर मुख्यमंत्री ने विकास आयुक्त शिशिर सिन्हा को इसकी समीक्षा कर समाधान करने का निर्देश दिया. उन्होंने समाज कल्याण विभाग के प्रधान सचिव वंदना किन्नी से इसकी रिपोर्ट ली. वंदना किन्नी ने बताया कि आवासीय विद्यालय के लिए छात्रावास व खेल मैदान के लिए पांच एकड़ जमीन की आवश्यकता होती है. राज्य के 80 आवासीय विद्यालयों में से 42 के पास पांच एकड़ जमीन उपलब्ध है, जबकि अन्य में तीन से पांच एकड़ जमीन है.
सस्ती दवा उपलब्ध कराने का आदेश
पूर्णिया के सामाजिक कार्यकर्ता मो परवेज द्वारा जेनरिक दवा की अधिक कीमत लेकर बेचे जाने के मामले पर मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव को सरकारी अस्पतालों में सस्ती दवा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि 2006 से सरकारी अस्पतालों में जेनरिक दवाएं आधी कीमत पर मरीजों को दी जा रही हैं. आखिर दवाओं का दर कौन निर्धारित करता है और दर निर्धारण का पैमाना क्या है. इस बाबत उन्होंने भारत सरकार को पत्र लिखने का निर्देश दिया.
पोषाहार में बंदरबांट गंभीर
सीतामढ़ी के सामाजिक कार्यकर्ता जयप्रकाश भगत के द्वारा टेक होम राशन में कमीशन लिये जाने की शिकायत पर मुख्यमंत्री ने कहा कि पोषाहार को पारदर्शी बनाएं. इसकी राशि में बंदरबांट गंभीर बात है. टेक होम राशन खरीद के बाद वाउचर जमा कराने को लेकर कोई चेक बैलेंस सिस्टम होना चाहिए. वाउचर के साथ कमीशन देने पर रोक लगनी चाहिए. इसे पारदर्शी बनाने के लिए इलेक्ट्रॉनिक सुझाव मिल रहा है, तो इसकी समीक्षा की जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि जिले में स्थापित किये गये लोक शिकायत की मॉनिटरिंग सामान्य प्रशासन विभाग के प्रधान सचिव कहीं से कर सकते हैं, तो टेक होम राशन का क्यों नहीं हो सकता.
अब नहीं बनेंगे किसी तरह के मित्र
पटना के सैयद जावेद हसन द्वारा सरकारी योजना की जानकारी देने के लिए गांव में सूचना मित्र बनाये जाने पर मुख्यमंत्री ने कहा कि अब कोई मित्र नहीं होगा. सरकार तकनीक का प्रयोग कर जानकारी पहुंचाने का काम कर रही है. उन्होंने कहा कि पहले मित्र रखिए, फिर आंदोलन होगा और उसके बाद समान काम के लिए समान वेतनमान की मांग की जायेगी.
शिक्षा विभाग को समीक्षा का निर्देश
आइटी सेक्टर में प्रशिक्षण देनेवाले मो शाहिद अखलाक द्वारा पेपर लीक को समाप्त करने के सुझाव पर सीएम ने शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव को अखलाक से बात कर समीक्षा करने का निर्देश दिया. मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी बात को सुनकर पेपर लीक को रोकने के लिए क्या प्रयास किया जा सकता है इसकी पूरी जानकारी ले लें.
किसी को नहीं मिलेगी नदी की जमीन
मो परवेज द्वारा नदी की जमीन मछुआरों को बंदोबस्त करने के सुझाव पर मुख्यमंत्री ने कहा कि नदी की जमीन किसी को बंदोबस्त नहीं की जायेगी. नदी की धार को चालू रखने के लिए प्रयास किया जायेगा. यह संभव नहीं है कि जो नदी गाद से भर जाये और पानी सूख जाये तो उसकी जमीन किसी को बंदोबस्त कर दी जाये.
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