मांझी सरकार ने बांटी रेबड़ी, सवर्णो को आरक्षण

पटना: राजनीतिक उठापटक के बीच जदयू से निकलने के बाद अपने खेमे के सात मंत्रियों के साथ मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने मंगलवार को पहली कैबिनेट की. ऐसे तो उनके खेमे में आठ मंत्री हैं, लेकिन पीएचइडी मंत्री महाचंद्र प्रसाद सिंह के दिल्ली में होने के कारण वे इस कैबिनेट में मौजूद नहीं थे. बैठक […]
बैठक में 23 एजेंडों को स्वीकृति प्रदान की गयी. इनमें कुछ बेहद महत्वपूर्ण फैसले भी शामिल हैं. इसमें हर वर्ग के लिए कुछ-न-कुछ अच्छा किया गया है. सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए आर्थिक रूप से कमजोर सवर्ण वर्ग के लोगों को सरकारी नौकरी में आरक्षण देने की पहल की है.
इसके लिए तीन सदस्यीय एक एक्सपर्ट कमेटी का गठन किया गया है, जो तमाम स्थितियों की समीक्षा कर तीन महीने में अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी. इसके बाद ही सरकार यह तय करेगी कि किसे कितना प्रतिशत आरक्षण देना है. इस कमेटी के तीनों सदस्य सामाजिक विज्ञान और आरक्षण समीक्षा से जुड़े मामलों के एक्सपर्ट होंगे. सरकार जल्द ही एक्सपर्टो का चयन कर लेगी. फैसले की जानकारी कैबिनेट विभाग के प्रधान सचिव बी. प्रधान ने बैठक के बाद दी. इसके अलावा अब राज्य के सभी सरकारी स्कूलों में पढ़नेवाले छात्रों को पोशाक, साइकिल, प्रोत्साहन या मेधावृत्ति और छात्रवृत्ति के लिए 75 फीसदी हाजिरी की अनिवार्यता में कटौती की गयी है. इन सुविधाओं को प्राप्त करने के लिए सामान्य वर्ग के छात्रों को 60 प्रतिशत और बीसी, इबीसी, एससी, एसटी समेत अन्य आरक्षित वर्ग के छात्रों के लिए 55 प्रतिशत ही उपस्थिति की जरूरत होगी.
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